Cjp Protest Lathi Charge: पुलिस की इस लाठी से क्यों थर-थर कांपते हैं अपराधी, CJP के प्रदर्शन में लाठीचार्ज के बीच जानें जवाब
Cjp Protest Lathi Charge: बीते दिन सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. इस दौरान आपने जो पुलिस के हाथों में सफेद रंग की स्टिक देखी, चलिए उसकी खासियत जानें.

Cjp Protest Lathi Charge: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जमकर बलाव देखने को मिला. बीते दिन सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता और छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद भवन की तरफ मार्च निकालने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जब सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने लगी तो पुलिस को हालात पर काबू करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. देखते ही देखते मौके पर अफरातफरी मच गई और पुलिस पर पत्थरबाजी भी हुई. छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिसमें आपको उनके हाथों में सफेद सी स्टिक दिख रही होगी. आइए आज इस खास लाठी और उसकी ताकत के बारे में जानें.
पॉलीकॉर्बोनेट लाठी की खासियत
समय के साथ सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस बल ने पुराने ढर्रे को छोड़कर काफी वक्त पहले आधुनिक पॉलीकार्बोनेट लाठियों को अपना लिया है. पारदर्शी और प्लास्टिक जैसी दिखने वाली यह स्पेशल लाठी दिखने में भले ही बांस की तुलना में हल्की लगे, लेकिन इसका असर बहुत तेज होता है. लगभग 3-4 फीट लंबी इस स्टिक के दोनों सिरों पर मजबूत चमड़ा लगा होता है. भारी न होने की वजह से पुलिस के जवान इसे आसानी से संभाल सकते हैं और जरूरत पड़ने पर भीड़ को काबू में करने के लिए इसका तेजी से इस्तेमाल कर सकते हैं.
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मारक क्षमता और शरीर पर इसका असर
पॉलीकार्बोनेट लाठी की सबसे बड़ी खासियत इसका जबरदस्त लचीलापन है. जब पुलिस किसी प्रदर्शनकारी या फिर अपराधी पर इससे वार करती है, तो शरीर पर तेज बिजली का झटका लगने जैसा तीखा अहसास होता है. जब यह लाठी हवा में लहराकर किसी पर पड़ती है तो स्पार्क जैसी खौफनाक आबाज निकलती है जो उपद्रवियों में दहशत भर देती है. इसकी मार का पता तुरंत नहीं चलता है, लेकिन करीब 4-5 घंटे के बाद चोट वाली जगह पर भयंकर दर्द और भारी सूजन आ जाती है. हैरानी की बात यह है कि इस लाठी से मार के बाद चोट लगने के बावजूद चमड़ी पर कोई निशान नहीं बनता है.
पुरानी लकड़ी की लाठियों में क्या थीं खामियां?
पहले के समय में पुलिस बेकाबू भीड़ को शांत करने और अपराधियों से निपटने के लिए बांस या मजबूत लकड़ी से बनी भारी लाठियों का इस्तेमाल करती थी. हालांकि इन पारंपरिक लाठियों को लंबे वक्त तक हाथ में उठाकर घूमना पुलिस के लिए काफी थकाऊ था. इसके अलावा लकड़ की लाठी बार-बार इस्तेमाल करने से टूट जाती थी और उसमें दरारें आ जाती थीं. सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि उस लाठी से लोगों को बेहद गंभीर या जानलेवा चोट लग जाती थी. इससे पुलिस की कार्रवाई अक्सर विवादों में घिरती थी और मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठते थे.
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