CJP Protest: हिरासत और गिरफ्तारी में क्या अंतर होता है, क्या कर सकती है पुलिस और क्या नहीं?
CJP Protest: दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. इसी बीच आइए जानते हैं कि हिरासत और गिरफ्तारी में अंतर क्या होता है.

- हिरासत अस्थायी पूछताछ है, गिरफ्तारी औपचारिक कानूनी प्रक्रिया।
- गिरफ्तारी से आपराधिक न्याय प्रक्रिया शुरू होती है, रिकॉर्ड अनिवार्य।
- गंभीर अपराधों में पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है।
- गिरफ्तार को 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी अनिवार्य।
CJP Protest: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई. इसमें 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए. इस प्रदर्शन के दौरान अब तक लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और पुलिस ने दंगा करने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज करनी शुरू कर दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि हिरासत और गिरफ्तारी में क्या अंतर होता है और पुलिस के पास क्या अधिकार हैं.
हिरासत और गिरफ्तारी एक चीज नहीं है
हालांकि दोनों शब्दों का इस्तेमाल अक्सर एक दूसरे की जगह पर किया जाता है लेकिन हिरासत और गिरफ्तारी के कानूनी मतलब अलग-अलग हैं. हिरासत का मतलब आमतौर पर पूछताछ, जांच पड़ताल या फिर ऐतिहासिक वजहों से किसी व्यक्ति की आवाजाही को कुछ समय के लिए रोकना होता है. दूसरी तरफ गिरफ्तारी एक औपचारिक कानूनी कार्रवाई है जो तब की जाती है जब किसी व्यक्ति पर कोई खास अपराध करने का आरोप हो.
आसान शब्दों में कहें तो गिरफ्तार किए गए हर व्यक्ति को पहले हिरासत में लिया जाता है, लेकिन हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाता. हिरासत के लिए गए व्यक्ति को पूछताछ के बाद छोड़ा जा सकता है अगर आगे कोई भी कानूनी कार्रवाई जरूरी ना हो. लेकिन गिरफ्तारी से औपचारिक आपराधिक न्याय प्रक्रिया शुरू होती है.
दोनों के बीच अंतर
हिरासत का मुख्य मकसद किसी व्यक्ति से पूछताछ करना, तथ्यों की पुष्टि करना या फिर किसी स्थिति को बिगड़ने से रोकना होता है. इसके लिए हमेशा एफआईआर या फिर औपचारिक आपराधिक आरोपों की जरूरत नहीं होती. वहीं गिरफ्तारी तब की जाती है जब पुलिस को लगता है कि किसी खास अपराध के सिलसिले में किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं.
हिरासत के दौरान किसी व्यक्ति की आवाजाही को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है लेकिन गिरफ्तारी कानून रूप से व्यक्तिगत आजादी को सीमित करती है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस को गिरफ्तारी मेमो के जरिए गिरफ्तारी का समय, जगह और वजह के साथ पूरा लिखित रिकॉर्ड रखना होता है.
पुलिस किसी व्यक्ति को कितने समय तक रख सकती है?
हर स्थिति में औपचारिक गिरफ्तारी से पहले थोड़ी देर पूछताछ और एहतियाती हिरासत के लिए कोई अलग कानूनी समय सीमा तय नहीं है. हालांकि एक बार जब किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया जाता है तो कानून के मुताबिक पुलिस को आरोपी को 24 घंटे के अंदर सबसे पास के मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है. गिरफ्तार व्यक्ति को इस समय सीमा से ज्यादा समय तक बिना न्यायिक मंजूरी के हिरासत में रखना गैर-कानूनी है. गिरफ्तारी के बाद आरोपी को या तो पुलिस हिरासत में रखा जा सकता है या फिर न्यायिक हिरासत में.
पुलिस के पास क्या अधिकार?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत पुलिस अधिकारी हत्या, बलात्कार या फिर डकैती जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में किसी व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकते हैं. वे संदिग्धों से पूछताछ भी कर सकते हैं, तलाशी ले सकते हैं और जांच के हिस्से के तौर पर सबूत इकट्ठा कर सकते हैं. जांच के दौरान पुलिस आरोपी को अपराध वाली जगह पर ले जा सकती है, सबूत बरामद कर सकती है और कानून के तहत मंजूर दूसरी कानूनी जांच प्रक्रिया भी पूरी कर सकती है.
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पुलिस क्या नहीं कर सकती?
कानून पुलिस के अधिकारों पर भी साफ सीमा तय करता है. गिरफ्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए बिना 24 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता. न्यायिक मंजूरी के बिना इस समय सीमा से ज्यादा समय तक हिरासत में रखना गैर कानूनी हिरासत माना जाता है.
पुलिस अधिकारियों को हिरासत में मौजूद लोगों के साथ मारपीट, उन्हें प्रताड़ित करना या फिर मानसिक रूप से परेशान करने की पूरी तरह से मनाही है. हिरासत में हिंसा और थर्ड डिग्री तरीकों का इस्तेमाल गैर-कानूनी है.
पुलिस के लिए यह भी जरूरी है कि वह गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी की वजहों के बारे में बताएं और जहां लागू हो उन्हें जमानत मांगने के अधिकार के बारे में भी सूचित करें. इन अधिकारों को छिपाया या फिर उनसे इनकार नहीं किया जा सकता.
महिलाओं के लिए भी खास सुरक्षा उपाय हैं. आम नियम के तौर पर किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. जब तक कि सक्षम मजिस्ट्रेट से विशेष लिखित अनुमति ना ली गई हो. किसी महिला की तलाशी सिर्फ महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही ली जानी चाहिए.
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