पहली बार अनशन नहीं कर रहे सोनम वांगचुक, जानें कब-कब और क्यों की भूख हड़ताल?
सोनम वांगचुक इस वक्त दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं. वे जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे, जिसके बाद पुलिस ने उनको भर्ती कराया. आइए जानें कि इससे पहले वे कब अनशन पर बैठे.

लद्दाख की जमीनी और संवैधानिक लड़ाइयों का चेहरा बन चुके प्रसिद्ध समाज सेवी सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में बने हुए हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उनको पुलिस ने 18 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई. अस्पताल के बिस्तर पर होने के बाद भी उन्होंने न तो कोई ड्रिप ली और न ही कोई लिक्विड लिया. बीते दिन सोनम ने सोशल मीडिया पर अपनी तीन शर्तें भी रखी थीं और कहा था कि अगर सरकार उसमें से एक को भी मान लेती है तो वे अपनी भूख हड़ताल खत्म कर सकते हैं. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे हों, वे इससे पहले भी भूख हड़ताल कर चुके हैं, चलिए जानें.
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अनशन
सोनम वांगचुक का ध्यान हमेशा से लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और स्थानीय अधिकारों की रक्षा पर रहा है. वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए लगातार मांग उठाते रहे हैं. फिलहाल वे नीट परीक्षा पेपर लीक के मामले में छात्रों के लिए मजबूती से आवाज उठा रहे हैं.
पर्यावरण बचाने के लिए क्लाइमेंट फास्ट
जून 2023 में सोनम वांगचुक ने लद्दाख के नाजुक इकोसिस्टम की तरफ दुनिया का ध्यान खींचने के लिए 9 दिनों का क्लाइमेट फास्ट किया था. शून्य से नीचे तापमान में किए गए इस उपवास का मकसद हिमालयी ग्लेशियरों को पिघलने से बचाना और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करना था. उन्होंने सरकार से मांग की थी कि लद्दाख के प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल रोका जाए और वहां की पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं.
21 दिनों का मैराथन अनशन
साल 2024 के मार्च महीने में सोनम वांगचुक ने लद्दाख के इतिहास की सबसे लंबी भूख हड़तालों में से एक का नेतृत्व किया. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची लागू करने की मुख्य मांग को लेकर वे लगातार 21 दिनों तक अनशन पर रहे. इस दौरान कड़ाके की ठंड की बाद भी हजारों स्थानीय निवासियों ने उनका साथ दिया. वांगचुक का कहना था कि लद्दाख की भूमि, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को केवल संवैधानिक सुरक्षा कवच के जरिए ही सुरक्षित रखा जा सकता है.
दिल्ली में 16 दिनों की भूख हड़ताल
मार्च आंदोलन के बाद भी जब केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस हल नहीं निकला, तो अक्टूबल 2024 में वांगचुक ने अपनी मांगों को लेकर राजधानी दिल्ली का रुख किया. उन्होंने लगातार 16 दिन तक दिल्ली में उपवास रखा था, जिससे लद्दाख का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर गरमा गया था.
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