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क्या सरकारी कर्मचारी और न्यायिक अधिकारी आंदोलन कर सकते हैं, क्या हैं नियम?

सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बीच एक सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों को हड़ताल या सार्वजनिक आंदोलन करने की अनुमति है या नहीं. चलिए जानें.

दिल्ली में मानसून सत्र के पहले दिन संसद के बाहर जमकर हंगामा देखने को मिला. सीजेपी के कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी छात्रों ने संसद चलो मार्च का आयोजन किया और वे संसद के करीब पहुंच गए. उनको रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल करना पड़ा. अब भारत में लोकतंत्र है, ऐसे में यहां पर आम नागरिकों को अपनी मांगों के लेकर विरोध जताने का तो अधिकार मिला है, वहीं देश की प्रशासनिक व्यवस्था और न्याय प्रणाली को चलाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियम पूरी तरह से अलग हैं. सरकारी सेवा में तैनात कर्मियों और जजों के हड़ताल या प्रदर्शन करने के लिए भारतीय कानून में बेहद सख्त प्रावधान तय किए हैं. चलिए इसके बारे में जान लेते हैं.

सरकारी कर्मचारियों के लिए हड़ताल के नियम

भारत के आम लोगों को भले ही संविधान से मौलिक अधिकार प्राप्त हों, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के पास हड़ताल पर जाने या काम ठप्प करने का कोई कानूनी या संवैधानिक अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने टी.के.रंगराजन बनाम तमिलनाडु राज्य जैसे एतिहासिक मामलों में साफ तौर पर फैसला सुनाया है कि सरकारी मुलाजिमों को आंदोलन का अधिकार नहीं है. देश के नागरिकों को मिलने वाले अधिकारों पर लोक सेवा के हित में वाजिब बंदिशें लागू होती हैं, क्योंकि सरकारी कर्मचारियों की पहली जिम्मेदारी जनता तक बिना रुकावट सेनाएं पहुंचाना है.

क्या कहती है आचरण नियमावली?

केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी प्रकार की हड़ताल, सामूहिक छुट्टी, काम धीमा करने की नीति या फिर बंद में हिस्सा नहीं ले सकता है. अगर कोई कर्मचारी बिना अनुमति के प्रदर्शनों में शामिल होता है या कार्यालय का काम बाधित करता है, तो इसे गंभीर कदाचार माना जाता है. ऐसे मामलों में प्रशासन उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकता है, जिसमें वेतन काटना, निलंबित करना और गंभीर मामलों में सेवा से बर्खास्त कर देना तक शामिल है.

यह भी पढ़ें: CJP Protest: भारत में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार कहां से मिलता है, संविधान क्या कहता है?

न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रदर्शन के नियम

न्यायपालिका ये जुड़े अधिकारियों और जजों की जिम्मेदारी किसी भी अन्य सेवा से कहीं अधिक संवेदनशील मानी जाती है. न्यायिक अधिकारी संप्रभु सार्वजनिक पद पर बैठते हैं और उनके आचरण पर आम जनता का भरोसा टिका होता है. यही वजह है कि जजों और न्यायिक अधिकारियों के किसी भी तरह से सार्वजनिक प्रदर्शन रैली या हड़ताल में शामिल होने पर पूरी तरह से पाबंदी है. अगर कोई न्यायिक अधिकारी इस नियम का उल्लंघन करता है तो इसे न्यायिक नैतिकता का हनन माना जाता है और संबंधित हाईकोर्ट उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है.

शिकायत निवारण के लिए तय हैं रास्ते

यदि सरकारी कर्मचारियों या फिर न्यायिक अधिकारियों को अपने वेतन, भत्ते, कार्यस्थल की स्थितियों या प्रशासनिक व्यवस्था से कोई शिकायत होती है, तो वे सड़कों पर नहीं उतर सकते हैं. इसके बजाय उनको तय संस्थागत तंत्र का इस्तेमाल करना होता है. न्यायिक अधिकारियों को अपनी समस्याएं सुलझाने के लिए सीधे संबंधित उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के समझ अपनी बात रखनी होती है. ऐसे ही सरकारी कर्मियोंके लिए भी प्रशासनिक ट्रिब्यूनल और विभागीय माध्यम तय किए हैं, ताकि बिना काम प्रभावित हुए समस्याओं का हल निकाला जा सके.

यह भी पढ़ें: CJP Protest: कितनी मजबूत होती है संसद की सुरक्षा, जानें कितने लेयर में तैनात होते हैं जवान

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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