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यह देश बना रहा जमीन से 2000 मीटर ऊपर उड़ने वाला टर्बाइन, जानें यह कैसे करेगा काम?

एक देश ने दुनिया के पहले मेगावॉट-क्लास उड़ने वाले विंड टर्बाइन S2000 का सफल परीक्षण किया है. यह तकनीक पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए बिजली का एक बड़ा और स्थिर स्रोत साबित हो सकती है.

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  • यह दुर्गम इलाकों के लिए ऊर्जा का एक नया, शक्तिशाली स्रोत है.

दुनिया जब स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्पों की तलाश में है, तब चीन ने एक ऐसी तकनीक का सफल परीक्षण किया है जो विज्ञान फंतासी फिल्म जैसा अहसास कराती है. अब बिजली जमीन पर लगे विशाल खंभों से नहीं, बल्कि बादलों को चीरते हुए हवा में उड़ने वाले टर्बाइन से पैदा होगी. बीजिंग की एक कंपनी ने दुनिया का पहला मेगावॉट-क्लास फ्लाइंग विंड टर्बाइन तैयार कर ऊर्जा क्षेत्र में सनसनी फैला दी है. यह तकनीक न केवल भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का दम रखती है, बल्कि उन दुर्गम इलाकों के लिए भी वरदान साबित हो सकती है जहां बिजली पहुंचाना अब तक नामुमकिन माना जाता था.

बीजिंग की कंपनी का ऐतिहासिक प्रयोग

चीन की राजधानी बीजिंग स्थित कंपनी बीजिंग लिनयी युनचुआन एनर्जी टेक्नोलॉजी ने नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में यह साहसिक कदम उठाया है. इस परियोजना के तहत दुनिया के पहले मेगावॉट-क्लास उड़ने वाले विंड टर्बाइन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनोखी तकनीक भविष्य में बिजली उत्पादन के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह से बदलकर रख सकती है. यह प्रयोग साबित करता है कि ऊर्जा उत्पादन के लिए अब हमें केवल जमीन या समुद्र पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है.

हीलियम गैस और टर्बाइनों का अनूठा संगम

इस प्रणाली को 'S2000' नाम दिया गया है, जो एक एयरबोर्न विंड एनर्जी सिस्टम (AWES) है. यह मूल रूप से हीलियम गैस से भरा एक विशालकाय एयरशिप है. इस एयरशिप की खासियत यह है कि इसमें कुल 12 छोटे विंड टर्बाइन लगाए गए हैं. यह प्रणाली जमीन से हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़कर वहां मौजूद तेज और स्थिर हवाओं का लाभ उठाती है. हवा के निरंतर दबाव से ये टर्बाइन घूमते हैं और बिजली पैदा करते हैं, जो इसे एक निरंतर चलने वाला ऊर्जा स्रोत बनाता है.

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केबल के जरिए जमीन तक पहुंचती बिजली

उड़ने वाले इस पावर हाउस से पैदा हुई बिजली को जमीन तक पहुंचाने के लिए एक विशेष तकनीक का उपयोग किया जाता है. एयरशिप से जुड़ी एक मजबूत और उच्च तकनीक वाली केबल बिजली को सीधे जमीन पर लगे स्टेशन तक पहुंचाती है. यहां से इस बिजली को पावर ग्रिड से जोड़ दिया जाता है, जिससे इसे आम घरों और उद्योगों तक पहुंचाया जा सके. यह केबल न केवल बिजली लाती है, बल्कि एयरशिप को एक निश्चित स्थान पर थामे रखने का काम भी करती है.

सिचुआन प्रांत में हजारों फीट ऊपर परीक्षण

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का वास्तविक परीक्षण चीन के सिचुआन प्रांत में किया गया. परीक्षण के दौरान S2000 एयरशिप को जमीन से लगभग 6560 फीट यानी करीब 2,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ाया गया. इतनी ऊंचाई पर हवा का वेग जमीन के मुकाबले कहीं अधिक और स्थिर होता है. परीक्षण के नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे, जिसने इस तकनीक की व्यवहार्यता पर मुहर लगा दी है. इतनी ऊंचाई पर टर्बाइन बिना किसी रुकावट के बिजली पैदा करने में सक्षम रहे.

एक घंटे के काम में आधे महीने की बिजली 

क्षमताओं की बात करें तो S2000 एक विशालकाय संरचना है, जो करीब 60 मीटर लंबी और 40 मीटर ऊंची व चौड़ी है. परीक्षण के दौरान इस सिस्टम ने 385 किलोवॉट/घंटा बिजली पैदा करने का रिकॉर्ड बनाया. विशेषज्ञों का आकलन है कि बिजली की यह मात्रा एक सामान्य परिवार की करीब दो हफ्तों की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है. कंपनी के अनुसार, इस पूरे सिस्टम की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 3 मेगावॉट तक पहुंच सकती है, जो इसे व्यावसायिक रूप से बेहद आकर्षक बनाती है.

दुर्गम इलाकों के लिए 'गेम चेंजर' तकनीक

कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि इस तकनीक का सबसे क्रांतिकारी उपयोग उन क्षेत्रों में होगा जहां बिजली की लाइनें बिछाना मुश्किल है. ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों, सीमा पर बनी सैन्य चौकियों और दूर-दराज के गांवों में जहां पारंपरिक विंड मिल लगाना कठिन है, वहां यह उड़ने वाला टर्बाइन बिजली का सबसे बड़ा स्रोत बन सकता है. इसके अलावा, इसे जमीन पर पहले से मौजूद विंड फार्मों के ऊपर उड़ाकर थ्री-डायमेंशनल एनर्जी सप्लाई सिस्टम के तौर पर भी विकसित किया जा सकता है.

ऊंचाई पर टर्बाइन ज्यादा असरदार

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो जैसे-जैसे हम जमीन से ऊपर जाते हैं, हवा की गति और उसका 'एनर्जी डेंसिटी' यानी ऊर्जा घनत्व बढ़ता जाता है. जमीन पर लगे टर्बाइन अक्सर पेड़ों, इमारतों या पहाड़ियों के कारण हवा के घर्षण का सामना करते हैं, जिससे उनकी दक्षता कम हो जाती है. इसके विपरीत, 2,000 मीटर की ऊंचाई पर हवा बेरोक-टोक चलती है. यही कारण है कि उड़ने वाले विंड टर्बाइन जमीन पर लगे टर्बाइनों की तुलना में कई गुना अधिक बिजली पैदा करने की क्षमता रखते हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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