एक्सप्लोरर

क्या यूपी को है दो सीएम की जरूरत? इतिहास में हो चुका है ये कारनामा, दो मुख्यमंत्रियों के हाथ आई थी राज्य की कमान

शशि थरूर ने उत्तर प्रदेश के लिए दो मुख्यमंत्रियों की मांग कर नई बहस छेड़ दी है. हालांकि एक वक्त पर यूपी इस स्थिति को देख चुका है, जब राज्य में एक साथ दो मुख्यमंत्री हो गए थे. आइए इसके बारे में जानें.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • शशि थरूर ने उत्तर प्रदेश के लिए दो मुख्यमंत्रियों की मांग की.
  • 1998 में राज्यपाल ने कल्याण सिंह को बर्खास्त कर पाल को नियुक्त किया.
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कल्याण सिंह की सरकार बहाल की.
  • सुप्रीम कोर्ट के कंपोजिट फ्लोर टेस्ट में कल्याण सिंह जीते.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए एक बेहद चौंकाने वाली मांग रखी है. थरूर का सुझाव है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो मुख्यमंत्रियों की व्यवस्था होनी चाहिए. थरूर के इस बयान ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या संवैधानिक रूप से यह संभव है? हालांकि, आज यह मांग भले ही अजीब लगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक ऐसा दौर भी आया था जब राज्य की कमान वास्तव में दो मुख्यमंत्रियों के हाथों में चली गई थी. यह 1998 का वह साल था, जब लखनऊ के गलियारों में लोकतंत्र का ऐसा नाटक खेला गया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.

जब राजभवन बना सियासी शतरंज का केंद्र

यह फरवरी 1998 की बात है, जब देश 12वीं लोकसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा था. उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह की सरकार चल रही थी, लेकिन राजभवन में बैठे राज्यपाल रोमेश भंडारी की मंशा कुछ और ही थी. 21 फरवरी 1998 को जब मुख्यमंत्री कल्याण सिंह चुनाव प्रचार के लिए गोरखपुर में थे, तब लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सरकार गिराने का चक्रव्यूह रच दिया. मायावती ने दावा किया कि कल्याण सिंह सरकार ने उनकी पार्टी को गलत तरीके से तोड़ा है और अब वह इस सरकार को खत्म कर देंगी. दोपहर 2 बजे तक मायावती ने लोकतांत्रिक कांग्रेस के जगदंबिका पाल को आगे कर राज्यपाल के सामने नई सरकार का दावा पेश कर दिया.

रात के अंधेरे में मुख्यमंत्री की बर्खास्तगी

इतिहास के पन्नों में 21 फरवरी की रात 10 बजकर 16 मिनट का समय हमेशा दर्ज रहेगा. राज्यपाल रोमेश भंडारी ने बिना किसी देरी के और बिना कल्याण सिंह को बहुमत साबित करने का मौका दिए, सरकार को बर्खास्त कर दिया. आनन-फानन में जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी गई. यह प्रक्रिया इतनी हड़बड़ी में हुई कि शपथ ग्रहण के बाद होने वाला पारंपरिक राष्ट्रगान तक नहीं हुआ. महज 10 मिनट के भीतर उत्तर प्रदेश का निजाम बदल चुका था. जगदंबिका पाल मुख्यमंत्री बन चुके थे और नरेश अग्रवाल को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

यह भी पढ़ें: Tamil Nadu liquor shops closure: सीएम बनते ही विजय ने तमिलनाडु की 717 दुकानों को लगाया ताला, इससे सरकार को कितना होगा घाटा?

अटल बिहारी वाजपेयी का आमरण अनशन

अगले दिन यानी 22 फरवरी को जब लखनऊ में मतदान हो रहा था, तब देश के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने इस लोकतांत्रिक हत्या के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. लखनऊ से चुनाव लड़ रहे वाजपेयी ने अपना वोट डाला और तुरंत स्टेट गेस्ट हाउस में राज्यपाल के फैसले के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठ गए. दिल्ली में तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने भी प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल को पत्र लिखकर राज्यपाल रोमेश भंडारी की भूमिका पर गहरा असंतोष व्यक्त किया. लखनऊ की सड़कों से लेकर दिल्ली के गलियारों तक हड़कंप मच चुका था.

एक सचिवालय और दो दावेदार

सचिवालय का नजारा बेहद अजीब था. मुख्यमंत्री के चेंबर में जगदंबिका पाल अपनी सत्ता जमाए बैठे थे, तो दूसरी तरफ बर्खास्त मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी वहां पहुंच गए. संवैधानिक रूप से उस वक्त पाल ही मुख्यमंत्री थे, लेकिन कल्याण सिंह कैंप ने हार नहीं मानी थी. उन्होंने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया. 23 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जगदंबिका पाल की सरकार को अवैध करार दिया और कल्याण सिंह सरकार को बहाल करने का आदेश दे दिया. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अटल जी ने अपना अनशन खत्म किया.

कुर्सी पर 'सीएम' पर नसीब में रूखा नाश्ता

हाईकोर्ट के फैसले के बाद जगदंबिका पाल की स्थिति सचिवालय में बेहद हास्यास्पद और दयनीय हो गई थी. हालांकि मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था, इसलिए पाल अभी भी पद पर बने रहने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन सचिवालय का स्टाफ अब उन्हें मुख्यमंत्री मानने को तैयार नहीं था. आलम यह था कि जगदंबिका पाल जब पानी मांगते, तो उन्हें एक घंटे बाद पानी मिलता था. एक बार जब उन्होंने नाश्ता मांगा, तो स्टाफ ने उन्हें बहुत थोड़े से बिस्कुट दिए और कहा, ‘साहब, कल्याण सिंह का जो नाश्ता बचा था, वही आपको दिया है.’ सत्ता का ऐसा अपमान भारतीय राजनीति में कम ही देखा गया है.

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक कंपोजिट फ्लोर टेस्ट

मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने एक अनोखा रास्ता निकाला. कोर्ट ने आदेश दिया कि अगले 48 घंटों के भीतर विधानसभा में कंपोजिट फ्लोर टेस्ट कराया जाए. कोर्ट ने कहा कि जब तक यह टेस्ट नहीं होता, तब तक दोनों (कल्याण सिंह और जगदंबिका पाल) को मुख्यमंत्री जैसा सम्मान दिया जाएगा, लेकिन वे कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे. यह भारतीय लोकतंत्र में पहली बार था जब एक साथ दो मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे और उनके बीच शक्ति प्रदर्शन होना था.

विधानसभा में दो कुर्सियां और असली फैसला

26 फरवरी 1998 को विधानसभा में जो नजारा था, वह अद्भुत था. विधानसभा अध्यक्ष केसरीनाथ त्रिपाठी की कुर्सी के दोनों ओर दो विशेष कुर्सियां लगाई गई थीं, जिन पर दोनों मुख्यमंत्री बैठे थे. पूरी कार्यवाही की निगरानी 16 कैमरों से की जा रही थी. शाम को जब नतीजे आए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया. कल्याण सिंह के पक्ष में 225 वोट पड़े, जबकि जगदंबिका पाल के समर्थन में सिर्फ 196 विधायक आए. बसपा के कुछ विधायकों के वोट रद्द होने के बावजूद कल्याण सिंह का बहुमत स्पष्ट था.

5 दिन के नाटक का पर्दाफाश

फ्लोर टेस्ट के नतीजे घोषित होते ही जगदंबिका पाल की दावेदारी हमेशा के लिए खत्म हो गई. इस प्रकार 21 फरवरी से शुरू हुआ यह सियासी ड्रामा 26 फरवरी को कल्याण सिंह की जीत के साथ समाप्त हुआ. यह इतिहास का वह अध्याय है जो याद दिलाता है कि भले ही आज दो मुख्यमंत्रियों की मांग प्रशासनिक आधार पर की जा रही हो, लेकिन अतीत में यह स्थिति केवल संवैधानिक संकट और राजनीतिक खींचतान के कारण पैदा हुई थी. उत्तर प्रदेश ने वह दौर देखा है जब एक ही समय में दो चेहरों ने खुद को राज्य का मुखिया बताया था.

यह भी पढ़ें: Neet Paper Leak 2026: नीट में ही क्यों होता है घपला? JEE Main या Advance में ऐसा क्यों नहीं, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

समुद्र में भी होते हैं कब्रिस्तान, भारत के इस राज्य में मौजूद है यह समुद्री मौत
समुद्र में भी होते हैं कब्रिस्तान, भारत के इस राज्य में मौजूद है यह समुद्री मौत
ब्रह्मोस मिसाइल को हवा में क्यों नहीं रोक सकता कोई भी देश, जानें किस टेक्नोलॉजी पर यह करती है काम?
ब्रह्मोस मिसाइल को हवा में क्यों नहीं रोक सकता कोई भी देश, जानें किस टेक्नोलॉजी पर यह करती है काम?
Safest Countries 2026: ये हैं दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देश, जानें लिस्ट में भारत का कौन सा नंबर?
ये हैं दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देश, जानें लिस्ट में भारत का कौन सा नंबर?
Zojila Tunnel Benefits: जोजिला सुरंग बनाने में कितना पैसा हुआ खर्च, जानें इसके बनने से क्या होगा फायदा?
जोजिला सुरंग बनाने में कितना पैसा हुआ खर्च, जानें इसके बनने से क्या होगा फायदा?
Advertisement

वीडियोज

SHOCKING! नीले ड्रम में बंद होने का था डर, इसलिए कर दिया...! ABPLIVE
Xi Jinping North Korea visit 2026: किम जोंग उन पर शी जिनपिंग ने क्यों डाले डोरे? ABPLIVE
US Iran War: 2 हफ्ते में ईरान पर जीत, धड़ाम होंगे तेल के दाम! जंग के बीच ट्रंप का बड़ा ऐलान !
बॉलीवुड न्यूज़: आलिया भट्ट ने 'Alpha' के धांसू टीज़र में अपने खतरनाक एक्शन अवतार से उड़ाए होश
125cc Scooter Battle: Burgman vs Avenis vs Ntorq | कौन है असली King? #burgmanstreet #autolive
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
संकट में भी ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं ये सांसद, सयानी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान तक छिटके
संकट में भी ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं ये सांसद, सयानी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान तक छिटके
झारखंड राज्यसभा चुनाव: BJP समर्थित परिमल नथवानी पर EC का बड़ा फैसला, कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
झारखंड राज्यसभा चुनाव: BJP समर्थित परिमल नथवानी पर EC का बड़ा फैसला, कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
वो सिर्फ बातें करते हैं, काम नहीं... ईरान को लेकर ट्रंप का बयान, US प्रेसीडेंट ने अल्लाह को किस बात का कहा शुक्रिया
वो सिर्फ बातें करते हैं, काम नहीं... ईरान को लेकर बोले ट्रंप, अल्लाह को किस बात का किया शुक्रिया
IND vs ENG: 12 गेंद में चाहिए थे 38 रन, भारत ने इंग्लैंड के जबड़े से छीन ली थी जीत; फिर लास्ट तीन गेंद में मिली हार
12 गेंद में चाहिए थे 38 रन, भारत ने इंग्लैंड के जबड़े से छीन ली थी जीत; फिर लास्ट तीन गेंद में मिली हार
22 साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेगी अक्षय-रवीना की जोड़ी, जानें 7 फिल्मों में कितनी रहीं हिट-कितनी फ्लॉप?
22 साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेगी अक्षय-रवीना की जोड़ी, जानें 7 फिल्मों में कितनी रहीं हिट-कितनी फ्लॉप?
Explained: भारत में सत्ता से हटते ही पार्टी की एकजुटता मुश्किल क्यों, कैसे सत्ताधारी दल की अरदली बन जाती छोटी पार्टियां?
सत्ता से हटते ही पार्टी की एकजुटता कठिन क्यों, कैसे सत्ताधारी दल की अरदली बनती छोटी पार्टियां?
पहले लगता था बस से डर, फिर भारत में मिला ऐसा अनुभव कि फैन हो गई विदेशी महिला- वीडियो वायरल
पहले लगता था बस से डर, फिर भारत में मिला ऐसा अनुभव कि फैन हो गई विदेशी महिला- वीडियो वायरल
Rathi Cow: एक दिन में कितना दूध देती है राठी गाय, जानें कितनी है इसकी कीमत?
एक दिन में कितना दूध देती है राठी गाय, जानें कितनी है इसकी कीमत?
Embed widget