Jawaharlal Nehru PM Without Elections : क्या बिना चुनाव लड़े पीएम बने थे जवाहर लाल नेहरू, जानें 1952 से पहले कैसे हुआ था सरकार का गठन?
Jawaharlal Nehru PM Without Elections : 15 अगस्त 1947, भारतीय इतिहास का वह दिन है, जब भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली, लेकिन आजादी के समय भारत में कोई आम चुनाव नहीं हुए थे.

Jawaharlal Nehru PM Without Elections : 1946 और 1947 के बीच भारत में कई अहम घटनाएं चल रही थीं. एक ओर भारत छोड़ो आंदोलन अपने चरम पर था, जिससे ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ रहा था. वहीं दूसरी ओर विश्व युद्ध अपने आखिरी चरण में था और ब्रिटिश सरकार भी लगभग मान चुकी थी कि युद्ध खत्म होने के बाद भारत को आजाद करना होगा. इसी समय भारतीय नेताओं ने आजाद भारत के शासन की तैयारी शुरू कर दी. इसी क्रम में मार्च 1946 में ब्रिटेन की लेबर सरकार ने कैबिनेट मिशन भारत भेजा. इसका उद्देश्य संविधान की रूपरेखा तैयार करना और एक अंतरिम सरकार बनाना था.
मुस्लिम लीग लगातार पाकिस्तान की मांग कर रही थी, इसलिए भारतीय नेताओं के बीच यह बहस चल रही थी कि आजाद भारत की अंतरिम सरकार कैसे बनेगी और उसका नेतृत्व कौन करेगा? 15 अगस्त 1947, भारतीय इतिहास का वह दिन है, जब भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली, लेकिन आजादी के समय भारत में कोई आम चुनाव नहीं हुए थे. ऐसे में सवाल उठता है कि उस समय देश का नेतृत्व कौन कर रहा था और कैसे जवाहरलाल नेहरू बिना किसी आम चुनाव में हिस्सा लिए देश के पहले प्रधानमंत्री बने? आइए जानते हैं क्या बिना चुनाव लड़े जवाहर लाल नेहरू पीएम बने थे और 1952 से पहले सरकार का गठन कैसे हुआ था?
कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव और प्रधानमंत्री पद
महात्मा गांधी ने सुझाव दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जल्दी कर लिया जाए, क्योंकि जो व्यक्ति कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा, वही, भविष्य में देश का पहला प्रधानमंत्री बनने के लिए सबसे मजबूत दावेदार होगा. उस समय मौलाना अबुल कलाम आजाद कांग्रेस अध्यक्ष थे. आजाद 1946 में फिर से अध्यक्ष पद के लिए चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे. कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव सामान्य रूप से ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सभी सदस्यों के तहत होता था, लेकिन गांधी जी चाहते थे कि यह सिर्फ प्रदेश कांग्रेस समितियों (PCC) के अध्यक्षों के मत से तय हो. इस चुनाव प्रक्रिया के आधार पर ही भविष्य के प्रधानमंत्री का रास्ता तय होना था.
पटेल और नेहरू अध्यक्ष पद का संघर्ष
चुनाव के दौरान कुल 15 PCC ने अपने-अपने उम्मीदवारों का नाम भेजा, 12 समितियों ने वल्लभभाई पटेल का समर्थन किया, सिर्फ केवल दो ने जे.बी. कृपलानी को समर्थन दिया और एक ने अपना मत अस्पष्ट रखा. किसी भी PCC ने नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया. ऐसे में गांधी जी ने जेबी कृपलानी से कहा कि वे नाम वापस लेकर नेहरू का समर्थन करें. इसके बाद पटेल ने भी गांधी जी की सलाह पर नेहरू को अध्यक्ष बनने दिया. ज्यादातर नेताओं का झुकाव पटेल की तरफ था, गांधी जी के हस्तक्षेप से नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने और साथ ही भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने की राह खुल गई.
क्या बिना चुनाव लड़े जवाहर लाल नेहरू पीएम बने थे?
भारत आजाद होने के समय, 15 अगस्त 1947 तक कोई आम चुनाव नहीं हुए थे. 1 अगस्त 1946 को वायसराय लॉर्ड वेवल ने कांग्रेस अध्यक्ष नेहरू को अंतरिम सरकार बनाने का न्योता दिया. 2 सितंबर 1946 को नेहरू ने अपने 11 अन्य सदस्यों के साथ शपथ ली. उस समय उन्हें आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री नहीं कहा गया था, लेकिन वे सरकार के प्रमुख थे. 15 अगस्त 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत भारत आजाद हुआ, उसी दिन लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू को भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई. इस तरह नेहरू बिना किसी आम चुनाव लड़े ही प्रधानमंत्री बने.
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1952 से पहले सरकार का गठन कैसे हुआ था?
भारत का पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 के बीच हुआ. इसके बाद ही संविधान के तहत पहली बार लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार सत्ता में आई तब भी नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने. इस बीच, 3 अप्रैल 1952 को राज्यसभा की पहली बैठक हुई और इसे पहले राज्य परिषद कहा जाता था. डॉ. एस. राधाकृष्णन राज्यसभा के पहले अध्यक्ष बने. श्री एस.वी. कृष्णमूर्ति राव पहले उपाध्यक्ष बने.
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