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Census 2027: लैपटॉप-गाड़ी है या नहीं... इस तरह के सवाल जनगणना में क्यों पूछे जाते हैं, क्या है इसकी वजह?

Census 2027: भारत में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि जनगणना के दौरान आपके पास लैपटॉप या गाड़ी है जैसे सवाल क्यों पूछे जाते हैं.

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  • जनगणना घरों की संपत्ति जानकारी वास्तविक जीवन स्तर दर्शाती है।
  • सरकारी योजनाएं और डिजिटल मिशन संपत्ति डेटा से लक्षित होंगे।
  • यह डेटा शिक्षा, रोजगार और वैश्विक विकास में सहायक होगा।

Census 2027: भारत में जनगणना 2027 की प्रक्रिया जोरों-शोरों से चल रही है. भारत की जनगणना अब देश में कितने लोग रहते हैं सिर्फ इसकी गिनती तक ही सीमित नहीं है. आधुनिक जनगणना अभ्यास घरों के बारे में विस्तृत जानकारी इकट्ठा करते हैं. इस जानकारी में यह भी शामिल होता है कि परिवारों के पास लैपटॉप, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल फोन, गाड़ी, मोटरसाइकिल या फिर दूसरी संपत्ति है या नहीं. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर जनगणना के समय इस तरह के सवाल क्यों पूछे जाते हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

 जीवन स्तर के वास्तविक मानक को मापना

गाड़ी, लैपटॉप, टेलीविजन और इंटरनेट एक्सेस जैसी संपत्तियों के बारे में पूछने का सबसे बड़ा कारण परिवार के वास्तविक जीवन स्तर को समझना है. अकेली इनकम हमेशा पूरी तस्वीर  नहीं दिखाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोग अपनी कमाई की सही-सही जानकारी नहीं दे पाते हैं. घरेलू संपत्ति आर्थिक कल्याण का काफी ज्यादा विश्वसनीय संकेतक प्रदान करती है. इसी के साथ यह नीति निर्माताओं को समाज के समृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर दोनों वर्गों की पहचान करने में मदद करती है.

सरकारी योजनाओं के लक्ष्यीकरण में सुधार 

जनगणना के आंकड़े सरकारों को कल्याणकारी कार्यक्रमों को काफी ज्यादा प्रभावी ढंग से डिजाइन और कार्यान्वित करने में सक्षम बनाते हैं. इंटरनेट एक्सेस, कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों के बारे में जानकारी अधिकारियों को उन जगहों की पहचान करने में मदद करती है जिन्हें डिजिटल साक्षरता पहल, ब्रॉडबैंड विस्तार या फिर सार्वजनिक वाई-फाई सुविधाओं की जरूरत होती है. इसी के साथ संपत्ति आधारित डेटा सब्सिडी, खाद्य सहायता और दूसरे सामाजिक कल्याण लाभों के लिए वास्तव में जरूरतमंद परिवारों की पहचान करने में सहायता कर सकता है.

डिजिटल इंडिया मिशन का समर्थन 

लैपटॉप, स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी की मौजूदगी देश की डिजिटल तैयारी में एक बड़ी भूमिका निभाती है. अगर कुछ जिले या फिर ग्रामीण क्षेत्र कम डिजिटल पहुंच दिखाते हैं तो सरकार कनेक्टिविटी, डिजिटल शिक्षा और प्रौद्योगिकी तक पहुंच में सुधार पर निवेश पर ध्यान केंद्रित कर सकती है. ऐसी जानकारी शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल विभाजन को कम करने में बड़ी भूमिका निभाती है.

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शिक्षा और रोजगार के रुझानों को समझना 

लैपटॉप और कंप्यूटर का स्वामित्व इस बात को भी बताता है कि कितने लोग ऑनलाइन शिक्षा, रिमोट वर्क और डिजिटल सेवाओं में भाग ले सकते हैं. ये रुझान सरकारों को रोजगार सृजन, कौशल विकास, ऑनलाइन शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विस्तार से संबंधित नीतियों को बनाने में मदद करते हैं.

भारत की ग्लोबल डेवलपमेंट प्रोफाइल 

संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन अक्सर किसी देश के विकास के स्तर का आकलन करने के लिए इंटरनेट की सुविधा, घरों की गुणवत्ता, गाड़ियों के मालिकाना हक और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जनगणना के आंकड़ों से भारत को ग्लोबल मंच पर अपनी आर्थिक और सामाजिक प्रगति की साफ तस्वीर पेश करने और दूसरे देशों के मुकाबले अपने विकास का आकलन करने में मदद मिलती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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