एक्सप्लोरर

नेत्रहीन लोगों को कैसे मिलता है दिन-रात होने का सिग्नल? जानिए साइंस

दृष्टिहीन लोग केवल रोशनी से ही नहीं, बल्कि अपने शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी, हार्मोनल सिग्नल्स, वातावरणीय आवाजों, आधुनिक टॉकिंग डिवाइसेस की मदद से दिन और रात का सटीक पता लगाते हैं.

रोशनी और रंगों से भरी इस दुनिया में जब हम आंखें खोलते हैं, तो ढलती शाम या उगते सूरज को देखकर पल भर में समझ जाते हैं कि दिन है या रात. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो लोग देख नहीं सकते, वे बिना किसी दृश्य के सुबह या रात का फर्क कैसे महसूस करते हैं? इसका जवाब केवल रोशनी की कमी या मौजूदगी में नहीं, बल्कि मानव शरीर की अद्भुत जैविक संरचना, दिमाग के खास सिग्नल्स, शरीर के हार्मोन और आसपास के वातावरण में छिपा है. विज्ञान की नजर से देखें तो दृष्टिहीन लोगों के पास समय का सटीक अंदाजा लगाने की एक पूरी प्राकृतिक प्रणाली मौजूद होती है.

क्या पूरी तरह बंद होता है रोशनी का अहसास?

आम तौर पर यह माना जाता है कि जो लोग देख नहीं सकते, उन्हें केवल गहरा अंधेरा ही दिखाई देता है. हालांकि, मेडिकल साइंस के आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश दृष्टिबाधित लोगों में बिल्कुल भी रोशनी न दिखने की स्थिति बेहद कम होती है. अधिकांश लोगों को किसी न किसी रूप में रोशनी का आभास जरूर होता है. वे यह आसानी से बता सकते हैं कि वे एक उजाले वाले कमरे में हैं या अंधेरे में, अथवा खिड़की की तरफ से धूप या रोशनी आ रही है या नहीं. यह हल्का सा उजाला ही उन्हें सुबह और रात का अंतर बताने के लिए काफी होता है.

शरीर की आंतरिक घड़ी का विज्ञान

जो लोग पूरी तरह से देखने में असमर्थ होते हैं, उनके शरीर में सर्कैडियन रिदम यानी 24 घंटे की आंतरिक जैविक घड़ी काम करती है. हमारी आंखों में देखने में मदद करने वाली रोड्स और कोन्स कोशिकाओं के अलावा एक विशेष प्रकार की कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें ipRGC (इंट्रिंसिकली फोटोसेंसिटिव रेटिनल गैंग्लियन सेल्स) कहा जाता है. इन कोशिकाओं में मेलेनॉप्सिन नाम का एक खास पिगमेंट होता है. कई शोधों से यह साबित हो चुका है कि दृष्टिबाधित लोगों में भी ये कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और बिना इमेज बनाए रोशनी को पहचानकर दिमाग के मुख्य हिस्से (SCN) तक समय के सिग्नल्स पहुंचाती हैं.

यह भी पढ़ें: खराब सड़कों के कारण रोज जा रही इतने मासूमों की जान, हैरान कर देंगे आंकड़े


नेत्रहीन लोगों को कैसे मिलता है दिन-रात होने का सिग्नल? जानिए साइंस

हार्मोनल बदलाव और नींद का विकार

जब दिमाग के SCN हिस्से को रोशनी या अंधेरे का सिग्नल मिलता है, तो शरीर में मेलाटोनिन नाम के हार्मोन का स्तर बदल जाता है. यह हार्मोन हमारी नींद और जागने के चक्र को पूरी तरह नियंत्रित करता है. रात के समय अंधेरा महसूस होते ही मेलाटोनिन बढ़ता है, जिससे नींद आने लगती है. हालांकि, जिन लोगों में रोशनी महसूस करने की क्षमता शून्य हो जाती है, उन्हें नॉन-24-अवर स्लीप-वेक डिसऑर्डर का सामना करना पड़ सकता है. इस विकार में शरीर की जैविक घड़ी रोज थोड़ी आगे खिसक जाती है, जिससे सोने और जागने का नियमित समय प्रभावित होता है.

आसपास के माहौल और आवाजों का असर

जैविक कारणों के अलावा, दृष्टिहीन लोग अपने आसपास के माहौल और आवाजों की मदद से भी समय का सटीक अंदाजा लगा लेते हैं. सुबह होते ही पक्षियों की चहचहाहट, सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक का शोर, दूध या अखबार वाले की आवाज और मंदिर-मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाजें उन्हें बता देती हैं कि दिन की शुरुआत हो चुकी है. इसके विपरीत, रात के समय वातावरण में छाई शांति और गाड़ियों की कम आवाज उन्हें रात होने का संकेत देती है.


नेत्रहीन लोगों को कैसे मिलता है दिन-रात होने का सिग्नल? जानिए साइंस

तापमान और आधुनिक तकनीक से मदद

दिन के अलग-अलग समय पर मौसम और तापमान में होने वाला बदलाव भी शरीर को समय का एहसास कराता है. सुबह की हल्की ठंडक, दोपहर की तीखी धूप की गर्मी और रात की ठंडी हवा से उन्हें समय समझ आता है. इसके अलावा, घर के सदस्यों का उठना-बैठना और दैनिक दिनचर्या भी समय का बड़ा संकेत होती है. आज के आधुनिक दौर में टॉकिंग वॉच, टॉकिंग क्लॉक और गूगल होम या एलेक्सा जैसे स्मार्ट एआई स्पीकर्स ने नेत्रहीन लोगों के लिए एक क्लिक में समय और मौसम जानना बेहद आसान और सटीक बना दिया है.

यह भी पढ़ें: क्या टाटा संस में सिर्फ पारसी करते हैं काम, जानें किन धर्मों के लोग कार्यरत?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

जहां थी PM मोदी की चाय की दुकान, वहां कैसे करें विजिट?
जहां थी PM मोदी की चाय की दुकान, वहां कैसे करें विजिट?
गुरुग्राम के बाद अब लखनऊ, जानें हर साल कितने हिट एंड रन मामले होते हैं दर्ज
गुरुग्राम के बाद अब लखनऊ, जानें हर साल कितने हिट एंड रन मामले होते हैं दर्ज
अगर फिर से लौटा कैश का दौर तो किन व्यापारियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
अगर फिर से लौटा कैश का दौर तो किन व्यापारियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
कितना होता है दहकते हुए ज्वालामुखी का तापमान, यह कितना खतरनाक?
कितना होता है दहकते हुए ज्वालामुखी का तापमान, यह कितना खतरनाक?
Advertisement

वीडियोज

Lucknow Hit and Run Case: लव जिहाद के शैतान का डरावना खेल, पब्लिक के सामने गर्लफ्रेंड पर चढ़ा दी कार
हाइवे पर कारों की टक्कर..हादसा भयंकर। Jordan। Amman Accident। Viral News
Janhit with Chitra Tripathi : UPI पर चार्ज, अमेरिका को फायदा ? | UPI Payment Charges | Rahul Gandhi
Janhit With Chitra Tripathi: दो बाबाओं की 'टक्कर', Dhirendra Shastri ने किस बाबा का 'पर्चा' निकाला ?
Saudi-Houthi War Update : सऊदी हूती युद्ध पर ताजा हालात | Middle East Conflict | Yemen | Makka
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
चीन-पाकिस्तान सीमा आयोग पर भड़का MEA, कहा- 'गैर-कानूनी और जबरन कब्जा...'
चीन-पाकिस्तान सीमा आयोग पर भड़का MEA, कहा- 'गैर-कानूनी और जबरन कब्जा...'
76 साल के हुए PM मोदी, काशी कैसे मना रही जन्मदिन? जानें BJP का प्लान
76 साल के हुए PM मोदी, काशी कैसे मना रही जन्मदिन? जानें BJP का प्लान
IPL 2027 में नहीं होगा इम्पैक्ट प्लेयर का नियम? ऑक्शन से पहले आया अपडेट
IPL 2027 में नहीं होगा इम्पैक्ट प्लेयर का नियम? ऑक्शन से पहले आया अपडेट
अब इस राज्य में टैक्स फ्री हुई 'हनुमान अंश', बॉक्स ऑफिस पर 230 करोड़ से ज्यादा कर चुकी है कमाई
दो राज्यों में टैक्स फ्री हुई 'हनुमान अंश', बॉक्स ऑफिस पर 230 करोड़ के हो चुकी है पार
दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं और बारिश की फुहार ने बदला मौसम, जानें अपडेट
दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं और बारिश की फुहार ने बदला मौसम, जानें अपडेट
असदुद्दीन ओवैसी के UCC वाले बयान पर गिरिराज सिंह का पलटवार - ‘आप जिन्ना...’
असदुद्दीन ओवैसी के UCC वाले बयान पर गिरिराज सिंह का पलटवार - ‘आप जिन्ना...’
ऑफिस पहुंचकर भी गर्मा गर्म रहेगा टिफिन का खाना, ये तरीके आएंगे काम
ऑफिस पहुंचकर भी गर्मा गर्म रहेगा टिफिन का खाना, ये तरीके आएंगे काम
संजुक्ता पराशर को क्यों कहते हैं असम की आयरन लेडी? अब मिली बड़ी जिम्मेदारी 
संजुक्ता पराशर को क्यों कहते हैं असम की आयरन लेडी? अब मिली बड़ी जिम्मेदारी 
Embed widget