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खराब सड़कों के कारण रोज जा रही इतने मासूमों की जान, हैरान कर देंगे आंकड़े

India Road Accident Report: देश में खराब सड़कों, गड्ढों और गलत डिजाइन के कारण रोजाना कई लोगों की जान जा रही है. हादसों को रोकने के लिए ट्रैफिक नियमों के साथ-साथ सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार जरूरी है.

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  • सरकार ने 6,358 'ब्लैक स्पॉट्स' में सुधार शुरू।

India Road Accident Report: बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के पास अनंतनगर मेन रोड पर बुधवार सुबह एक खौफनाक हादसा सामने आया. खराब सड़क की वजह से ब्रेक लगाते ही एक बाइक फिसल गई, जिससे पीछे बैठी 32 साल की महिला मेधा सड़क पर गिर पड़ीं. तभी सामने से आ रहे एक मिनी ट्रक ने उन्हें कुचल दिया और अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस दुखद घटना ने एक बार फिर पूरे देश में खराब सड़कों की भयावह हकीकत को उजागर कर दिया है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि रोजाना अनगिनत लोग ऐसी ही जानलेवा सड़कों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं.

खराब सड़कों से मौत के आंकड़े

जब भी देश में कोई सड़क हादसा होता है, तो आमतौर पर तेज रफ्तार, लापरवाही या नशे में गाड़ी चलाने को ही दोषी ठहरा दिया जाता है. लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की रिपोर्ट एक अलग ही कहानी बयां करती है. रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों पर होने वाली मौतों के लिए सिर्फ मानवीय चूक जिम्मेदार नहीं है. सड़कों के जानलेवा गड्ढे, अधूरा निर्माण कार्य, गलत सड़क डिजाइन और समय पर मरम्मत न होना भी लोगों के लिए काल बन रहा है. आंकड़े बताते हैं कि देश में हर दिन औसतन 80 लोग सिर्फ खराब सड़कों और इंजीनियरिंग की कमियों की वजह से दम तोड़ देते हैं.

देश में सड़क हादसों की खौफनाक तस्वीर

सड़क सुरक्षा को लेकर सामने आए आंकड़े बेहद डरावने हैं. साल 2024 के दौरान देश भर में 4.87 लाख से भी ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं. इन हादसों में 1.77 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई और लाखों लोग गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग बन गए. अगर सिर्फ सड़कों की बदहाली और इंजीनियरिंग से जुड़ी कमियों की बात करें, तो इनकी वजह से साल भर में हजारों दुर्घटनाएं हुईं. इनसे यह साफ होता है कि जब तक हमारा बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक ट्रैफिक नियमों का पालन कराने के बाद भी इंसानी जिंदगियों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जा सकता.

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खराब सड़कों के कारण रोज जा रही इतने मासूमों की जान, हैरान कर देंगे आंकड़े

जानलेवा गड्ढों की वजह से कितने हादसे?

सरकारी रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, सड़कों की खराब स्थिति के कारण देश भर में 29,628 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. इसके अलावा सड़क पर बने जानलेवा गड्ढों की वजह से भी 100 से ज्यादा गंभीर हादसे हुए. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि चालकों का ध्यान भटकना हादसों का सबसे बड़ा कारण रहा, जिससे 1.51 लाख से अधिक दुर्घटनाएं हुईं. इस तरह देखा जाए तो सड़कों की खस्ताहाली और चालकों की जरा सी लापरवाही मिलकर भारतीय सड़कों को रोजाना बेहद खतरनाक और जानलेवा बना रही हैं.

सड़कों की खामियां हर साल ले रही हजारों जानें

मंत्रालय की विस्तृत रिपोर्ट से पता चलता है कि अधूरी बनी सड़कों, खराब डिजाइन और गड्ढों के चलते 10 हजार से ज्यादा गंभीर हादसे रिपोर्ट किए गए. इन हादसों में करीब 29 हजार लोग बुरी तरह घायल हुए और लगभग 29 हजार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. जब इस सालाना आंकड़े को दिन के हिसाब से देखा जाता है, तो सामने आता है कि हर रोज करीब 80 मासूम लोग केवल घटिया सड़क और सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ जाते हैं. यह आंकड़ा बताता है कि हमारे शहरों और हाईवे का ढांचा किस कदर सुधार की मांग कर रहा है.


खराब सड़कों के कारण रोज जा रही इतने मासूमों की जान, हैरान कर देंगे आंकड़े

सुधार की पहल और ब्लैक स्पॉट्स की पहचान

रिपोर्ट में यह बात भी रेखांकित की गई है कि अगर निर्माण के कड़े मानकों का पालन हो, तो हादसों को बड़े पैमाने पर रोका जा सकता है. समय-समय पर सड़कों की मरम्मत करना और खतरनाक जगहों की पहचान कर उन्हें सुधारना बेहद जरूरी है. इसी दिशा में कदम उठाते हुए सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर 6,358 ब्लैक कॉरिडोर (अत्यधिक हादसे वाले क्षेत्र) की पहचान की है और वहां सुधार अभियान की शुरुआत की है. अगर इन चिन्हित जगहों को तुरंत ठीक किया जाए और नए निर्माण में आधुनिक तकनीकों का सही इस्तेमाल हो, तो रोजाना जाने वाली 80 जिंदगियों को बचाया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: डोप टेस्ट पॉजिटिव होने पर पायलट के लिए क्या हैं नियम? जानें DGCA के रूल

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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