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क्या किसी भी जमीन पर बना सकते हैं हेलिपैड, क्यों जमीन में धंस गया राष्ट्रपति का हेलिकॉप्टर?

Droupadi Murmu Helicopter Gets Sinks: केरल में सबरीमाला दौरे के वक्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का हेलीकॉप्टर नए बने हेलीपैड के गड्ढे में धंस गया. आइए जानें कि क्या किसी भी जमीन पर हेलीपैड बन सकता है?

केरल के प्रमादोम स्टेडियम में हाल ही में एक असामान्य और चौंकाने वाली घटना घटी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हेलीकॉप्टर के उतरने के दौरान हेलीपैड का टारमैक अचानक धंस गया. इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस और दमकल विभाग के कर्मियों ने मिलकर हेलीकॉप्टर को धंसी हुई जगह से निकालने में तुरंत मदद की. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए यह यात्रा सबरीमाला मंदिर दर्शन के लिए आयोजित की गई थी. सौभाग्य से, घटना के समय राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर के अंदर नहीं थीं. लेकिन सवाल यह है कि राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर जमीन में क्यों धंस गया और क्या किसी भी जमीन पर हेलीपैड बनाया जा सकता है या नहीं. आइए जानते हैं.

क्यों धंसा राष्ट्रपति का हेलिकॉप्टर?

अधिकारियों की मानें तो प्रमादोम स्टेडियम में हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए यह हेलीपैड अंतिम क्षणों में तय किया गया था, इसलिए इसे देर रात मंगलवार को तैयार किया गया था. समस्या का मुख्य कारण यह था कि हेलीपैड का टारमैक पूरी तरह से सेट नहीं हुआ था. निर्माण अभी पूरी तरह सूखा नहीं था, जिससे वह हेलीकॉप्टर के भारी वजन को संभाल नहीं पाया. इसके चलते हेलीकॉप्टर के पहियों के नीचे टारमैक धंस गया और गड्ढे बन गए.

क्या कहीं भी बनाया जा सकता है हेलीपैड?

यह बात तो सभी जानते हैं कि हेलिकॉप्टर उतारने और उड़ाने के लिए हेलिपैड का होना जरूरी है, लेकिन क्या किसी भी जमीन पर हेलिपैड बनाया जा सकता है? जवाब है, नहीं. किसी भी जगह हेलिपैड बनाने के लिए कानूनी अनुमति, सुरक्षा मानक, और स्थानीय प्रशासन की मंजूरी अनिवार्य है. सबसे पहले बात करते हैं अनुमति की. भारत में हेलिकॉप्टर या हेलिपैड से जुड़ी सारी गतिविधियों की निगरानी DGCA (Directorate General of Civil Aviation) करती है. कोई भी व्यक्ति या संस्था अगर हेलिपैड बनाना चाहती है तो उसे DGCA से तकनीकी मंजूरी लेनी होगी. इसके साथ ही स्थानीय नगर निगम, पंचायत, या जिला प्रशासन की अनुमति भी जरूरी है.

कैसी होनी चाहिए जमीन?

जमीन का प्रकार भी मायने रखता है. हेलिपैड सिर्फ उन जमीनों पर बनाया जा सकता है जो गैर-कृषि के रूप में रजिस्टर्ड हों. खेती की जमीन या ऐसी जगह जहां लोग रहते हों, वहां हेलिपैड बनाना कानूनी रूप से मुमकिन नहीं है. इसके अलावा DGCA के सुरक्षा मानक जैसे कम से कम 30×30 मीटर की क्लियरिंग एरिया, मजबूत सतह, लैंडिंग मार्किंग और लाइटिंग सिस्टम का पालन भी जरूरी है.

एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अनुमति

यदि हेलिपैड अस्थायी है, जैसे किसी इवेंट, VIP विजिट या आपदा राहत कार्य के लिए है तो उसे भी स्थानीय प्रशासन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अनुमति लेनी होती है. यह अनुमति सिर्फ सीमित समय के लिए होती है और इसके बाद हेलिपैड को बंद करना पड़ता है. बिना अनुमति हेलिपैड बनाना गंभीर अपराध माना जाता है. DGCA और कानून के अनुसार, अगर कोई बिना परमिशन हेलिकॉप्टर लैंडिंग करता है या हेलिपैड बनाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई, जुर्माना और कभी-कभी सजा तक हो सकती है.

यह भी पढ़ें: कब तक खत्म हो जाएगी हमारी पृथ्वी? NASA ने कैलकुलेट करके बता दी फाइनल तारीख

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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