First IAF Chief: अंग्रेज अफसर कब तक रहे थे भारतीय एयरफोर्स के एयर मार्शल? हकीकत जानकर उड़ जाएंगे होश
First IAF Chief: भारत की आजादी को 79 साल हो चुके है, आज भारत के एयरफोर्स के एयर मार्शल भारतीय मूल के ही है. लेकिन आजादी के 7 साल बाद तक एयर मार्शल अंग्रेज ही क्यों थे?

First IAF Chief: जब 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था. हम सभी जानते है कि अंग्रेजों ने आजादी के बाद देश की बागडोर भारतीयों के हाथों में दे दी थी. क्या आप जानते हैं कि आजादी के बाद भी कई साल तक हमारी भारतीय वायुसेना के एयर मार्शल अंग्रेज अफसर क्यों थे? शायद यह सुनने अजीब लग सकता है, लेकिन यह बिल्कुल सच है. देश की आजादी के साढ़े छह साल बाद तक यानी 31 मार्च 1954 तक भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अधिकारी अंग्रेज ही थे. आइए जानते हैं ऐसा क्यों हुआ था और इसके पीछे क्या वजह थी?
आजादी के बाद भी अंग्रेज अफसर क्यों?
दरअसल जब भारत आजाद हुआ, तब भारतीय वायुसेना बहुत नई थी. उस समय वायुसेना को बने हुए मुश्किल से 15 साल हुए ही थे. उस समय तक किसी भी भारतीय अधिकारी के पास पूरी सेना को संभालने, बड़े युद्ध की रणनीति बनाने और प्रशासनिक काम करने का लंबा अनुभव नहीं था. इसी वजह से भारत सरकार ने फैसला किया कि जब तक भारतीय अधिकारी पूरी तरह तैयार नहीं हो जाते, तब तक वायुसेना की जिम्मेदारी अनुभवी ब्रिटिश अधिकारियों को ही दी जाए.
लगातार तीन अंग्रेज बने थे वायुसेना प्रमुख
आजादी के बाद से लेकर 1954 तक, तीन अंग्रेज अफसरों ने भारतीय वायुसेना के प्रमुख का पद संभाला. एयर मार्शल सर थॉमस एल्महर्स्ट आजाद भारत के पहले वायुसेना प्रमुख बने थे. इन्होंने 15 अगस्त 1947 से 21 फरवरी 1950 तक भारतीय वायुसेना का कार्यभार संभाला. फिर आए एयर मार्शल सर रोनाल्ड इवलॉ-चैपमैन. ये फरवरी 1950 से दिसंबर 1951 तक इस पद पर बने रहे. एयर मार्शल सर जेराल्ड सिब्श भारत के तीसरे और आखिरी ब्रिटिश वायुसेना प्रमुख थे. इन्होंने दिसंबर 1951 से लेकर 31 मार्च 1954 तक भारतीय वायुसेना का कार्यभार संभाला.
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भारत के हाथ में आई कमान
1 अप्रैल 1954 के दिन एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी भारतीय वायुसेना के पहले भारतीय मूल के प्रमुख बने. सुब्रतो मुखर्जी ने जब अंग्रेज अफसर सर जेराल्ड सिब्श से वायुसेना की कमान अपने हाथों में ली. उस दिन से भारतीय वायुसेना पूरी तरह से भारतीय हो गई. सुब्रतो मुखर्जी को उनके शानदार काम और योगदान के लिए आज भी 'फादर ऑफ द इंडियन एयरफोर्स' कहा जाता है. अंग्रेज अफसरों और उनके बाद आए भारतीय अफसरों के सही मार्गदर्शन से भारतीय वायुसेना को एक मजबूत ढ़ाचा मिला. जिसके दम पर आज हमारी एयरफोर्स दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेनाओं में से एक है.
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