Aurora Lights: क्या पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रह पर भी होती हैं अरोरा लाइट्स, जानें कैसा होता है वहां का नजारा?
Aurora Lights: सिर्फ पृथ्वी पर ही अरोरा लाइट्स नहीं बनती बल्कि कुछ और ग्रहों पर भी यह नजारा देखने को मिलता है. आइए जानते हैं इस बारे में और जानकारी.

- शनि पर रंगीन छटाएँ, मंगल पर स्थानीय चुंबकीय क्षेत्र से अरोरा बनते हैं.
Aurora Lights: पृथ्वी के द्रव्य आसमान में अक्सर नाचती हुई दिखाई देने वाली शानदार अरोरा की रोशनी सिर्फ हमारे ग्रह तक ही सीमित नहीं है. वैज्ञानिकों इस बात का खुलासा किया है कि सौरमंडल के कई दूसरे ग्रहों पर भी इस तरह की लाइट्स देखने को मिलती हैं. जिस भी ग्रह पर मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल होता है वहां यह शानदार रोशनी का नजारा बन सकता है. हालांकि हर ग्रह पर इनके रंग, चमक और पैटर्न में काफी फर्क होता है.
बृहस्पति पर अरोरा लाइट्स
सौरमंडल में सबसे शक्तिशाली और ऊर्जावान अरोरा बृहस्पति पर ही बनते हैं. ये रोशनी मुख्य रूप से नीले रंग की चमकदार छटाओं में दिखाई देती है और पृथ्वी पर दिखने वाली रोशनी की तुलना में काफी ज्यादा तेज होती है.
पृथ्वी के अरोरा मुख्य रूप से सूरज से आने वाले आवेशित कणों पर निर्भर करते हैं. लेकिन बृहस्पति के अरोरा को उसके ज्वालामुखी वाले चंद्रमा "आयो" से भी ऊर्जा मिलती है. आयो पर लगातार होने वाले विस्फोटों से अंतरिक्ष में गैस निकलती हैं. ये गैस पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को ऊर्जा देती हैं और लगभग लगातार अरोरा लाइट्स बनाती रहती हैं. इस चमक का ज्यादातर हिस्सा पराबैंगनी वेवलेंथ में होता है. इस वजह से इसे खास उपकरणों के बिना इंसानी आंखों से नहीं देखा जा सकता.
शनि पर अरोरा लाइट्स
शनि के अरोरा ग्रह के ध्रुव के चारों तरफ लाल गहरे और गुलाबी रंग के सुंदर चरणों की तरह दिखाई देते हैं. इसका काफी व्यवस्थित चुंबकीय क्षेत्र इन अरोरा को सिमिट्रिकल और देखने में आकर्षक पैटर्न बनाने में मदद करता है.
मंगल पर अरोरा
मंगल की स्थिति बिल्कुल अलग है. क्योंकि यहां पृथ्वी जैसा कोई भी वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है इस वजह से यहां बड़े ध्रुवीय अरोरा नहीं बन पाते. इसके बजाय मंगल की सतह के कुछ हिस्सों में मौजूद स्थानीय चुंबकीय क्षेत्र ग्रह के कुछ खास इलाकों में हल्की अरोरा चमक पैदा करते हैं.
पूरे सोलर सिस्टम में अरोरा कैसे बनते हैं?
अरोरा तब बनते हैं जब चार्जड पार्टिकल्स किसी ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड और वातावरण के संपर्क में आते हैं. जब यह पार्टिकल्स वातावरण की गैस से टकराते हैं तो वह रोशनी के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं. रोशनी का रंग और उनकी तीव्रता ग्रह के वातावरण, मैग्नेटिक फील्ड और चार्जड पार्टिकल के स्रोत पर निर्भर करती है. हालांकि पृथ्वी पर इस तरह की लाइट मुख्य रूप से सोलर विंड्स की वजह से बनती है.
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