New Car Maintenance Tips : नई कार खरीदी है? शुरुआती 1000 किलोमीटर में भूलकर भी न करें ये गलतियां
New Car Maintenance Tips : कार खरीदने के बाद पहले 1000 किलोमीटर का सफर उसकी आगे की परफॉर्मेंस, माइलेज और इंजन की लाइफ तय करने में जरूरी भूमिका निभाता है.

New Car Maintenance Tips : नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक खास एक्सपीरियंस होता है. लेकिन सिर्फ नई कार खरीद लेना ही काफी नहीं होता, उसकी शुरुआती देखभाल भी उतनी ही जरूरी होती है. कार खरीदने के बाद पहले 1000 किलोमीटर का सफर उसकी आगे की परफॉर्मेंस, माइलेज और इंजन की लाइफ तय करने में जरूरी भूमिका निभाता है. ऑटोमोबाइल की भाषा में इस समय को रन-इन पीरियड कहा जाता है. इस दौरान इंजन, गियरबॉक्स और दूसरे मैकेनिकल पार्ट्स धीरे-धीरे एक-दूसरे के साथ सही तरीके से काम करना शुरू करते हैं. अगर इस समय ड्राइविंग में लापरवाही की जाए, तो इसका असर लंबे समय तक कार की परफॉर्मेंस पर पड़ सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि नई कार खरीदने के बाद शुरुआती 1000 किलोमीटर में भूलकर भी कौन सी गलतियां न करें.
रन-इन पीरियड क्या होता है?
नई कार खरीदने के बाद शुरुआती कुछ हजार किलोमीटर का समय रन-इन पीरियड कहलाता है. इस दौरान इंजन और उसके दूसरे मैकेनिकल पार्ट्स धीरे-धीरे अपनी सही कार्यक्षमता के साथ काम करना शुरू करते हैं. ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय कार का सही तरीके से इस्तेमाल करने से इंजन की उम्र बढ़ती है, माइलेज बेहतर मिलता है और फ्यूचर में कार की परफॉर्मेंस भी अच्छी बनी रहती है.
शुरुआती 1000 किलोमीटर में भूलकर भी कौन सी गलतियां न करें
1. तेज स्पीड और ज्यादा RPM से बचें - शुरुआती 1000 किलोमीटर तक कार को बहुत तेज स्पीड पर चलाने से बचना चाहिए. कोशिश करें कि कार की स्पीड लगभग 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहे. साथ ही इंजन को 2500 से 3000 RPM से ऊपर न ले जाएं. लगातार ज्यादा स्पीड और हाई RPM पर कार चलाने से इंजन के पुर्जों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
2. एक जैसी स्पीड पर ड्राइव न करें - नई कार को लंबे समय तक एक ही स्पीड पर चलाना सही नहीं माना जाता. बेहतर होगा कि ड्राइविंग के दौरान समय-समय पर स्पीड बदलते रहें. इससे इंजन अलग-अलग परिस्थितियों में काम करना सीखता है और उसके सभी पार्ट्स बेहतर तरीके से सेट हो पाते हैं.
3. एक्सेलरेशन और तेज ब्रेक लगाने से बचें - रन-इन पीरियड के दौरान अचानक तेज एक्सेलरेशन या जोर से ब्रेक लगाने से बचना चाहिए. हमेशा धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाएं और जरूरत पड़ने पर सॉफ्ट ब्रेकिंग करें. इससे इंजन, ब्रेक सिस्टम और दूसरे मैकेनिकल पार्ट्स पर बिन जरूरत दबाव नहीं पड़ता.
4. इंजन को आइडल न रखें - कार को बिना चलाए लंबे समय तक इंजन चालू छोड़ना सही नहीं माना जाता. इससे ईंधन की खपत बढ़ती है और इंजन ऑयल के प्रेशर पर भी असर पड़ सकता है.
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5. लंबी हाईवे ड्राइविंग से बचें - नई कार खरीदने के तुरंत बाद लंबे समय तक हाईवे पर लगातार एक जैसी स्पीड में ड्राइव करने से बचना चाहिए. इससे इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. शुरुआत में छोटी दूरी और अलग-अलग तरह की ड्राइविंग बेहतर मानी जाती है.
6. कार पर ज्यादा वजन न डालें - शुरुआती दिनों में कार में जरूरत से ज्यादा यात्रियों या भारी सामान के साथ सफर करने से बचें. इसी तरह भारी ट्रेलर खींचने से भी परहेज करें. इससे इंजन और ट्रांसमिशन सिस्टम पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता.
7. इंजन ऑयल और कूलेंट की जांच - शुरुआती 1000 किलोमीटर के दौरान हर 200 से 300 किलोमीटर पर इंजन ऑयल और कूलेंट का स्तर जांचना अच्छा माना जाता है. अगर किसी तरह की कमी दिखाई दे, तो समय रहते उसे ठीक करवाना चाहिए.
8. पहली सर्विस समय पर कराएं - कंपनी की ओर से तय पहली सर्विस को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आमतौर पर पहली सर्विस करीब 1000 किलोमीटर पूरी होने के बाद होती है. इस दौरान इंजन ऑयल, फिल्टर और दूसरे जरूरी हिस्सों की जांच की जाती है.
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