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इमरजेंसी और राष्ट्रपति शासन में क्या है अंतर, किसके हाथ में रहती है कितनी पॉवर?

इमरजेंसी पूरे देश में युद्ध या संकट के समय लगती है जिससे मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं, जबकि राष्ट्रपति शासन राज्य सरकार के विफल होने पर केवल उस राज्य में लगता है. चलिए दोनों में शासन के अधिकार जानें.

भारतीय संविधान में देश के शासन को चलाने के लिए सामान्य नियमों के साथ-साथ कुछ असाधारण परिस्थितियों से निपटने के खास अधिकार भी दिए गए हैं. इन्हीं अधिकारों में राष्ट्रीय इमरजेंसी और राष्ट्रपति शासन भी शामिल हैं, जिसको लेकर अक्सर लोगों में असमंजस का माहौल रहता है. हालांकि दोनों ही स्थितियों में शक्तियां केंद्र सरकार के पास आ जाती हैं, लेकिन इनके लगने की वजह, इनके लागू होने के क्षेत्र और आम नागरिकों के अधिकारों पर पड़ने वाले असर में बहुत बड़ा बुनियादी अंतर होता है. चलिए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि किसके हाथ में कितनी पावर आ जाती है.

इमरजेंसी लगने का कारण और दायरा

जब देश पर कोई भी बड़ा संकट आता है तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद 352 एक्टिव हो जाता है. राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू करने के प्रमुख कारणों में विदेशी मुल्कों के साथ युद्ध, बाहरी मुल्कों का हमला या फिर देश के अंदर ही सशस्त्र विद्रोह शामिल है. इसे किसी एक हिस्से में या फिर पूरे भारत में एकसाथ लागू किया जा सकता है. इसके लागू होते ही देश का संघीय ढांचा पूरी तरह से एकात्मक रूप ले लेता है. यानि राज्य सरकारों के फैसले लेने के अधिकार सीमित हो जाते हैं और देश को संचालित करने का सारा नियंत्रण सीधे तौर पर केंद्र सरकार की मुट्ठी में आ जाता है.

कब लागू होता है राष्ट्रपति शासन?

अनुच्छेद 356 और 365 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है. यग कदम तब उठाया जाता है जब किसी राज्य की चुनी हुई सरकार संविधान के प्रावधानों के हिसाब से काम करने में नाकाम रहती है या फिर केंद्र सरकार के निर्देशों की अनदेखी करती है. इसका असर केवल उसी विशिष्ट राज्य की सीमाओं तक सीमित रहता है, जहां की प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हुई हो. इसमें पूरी राज्य सरकार यानी मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर दिया जाता है. इसके बाद राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यपाल राज्य के शासन की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले लेते हैं.

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इमरजेंसी के वक्त केंद्र की शक्तियां और नागरिकों के अधिकार

इमरजेंसी के वक्त केंद्र सरकार की शक्तियां असीमित हो जाती हैं. देश की पूरी कार्यकारी और प्रशासनिक ताकत दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार के पास पहुंच जाती है. सबसे खास बात यह है कि संसद को राज्य सूची में शामिल तमाम विषयों पर भी कानून बनाने का सीधा अधिकार मिल जाता है. इतना ही नहीं आम नागरिकों की रोजमर्रा की आजादी पर भी इसका गहरा असर होता है. अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले स्वतंत्रता के अधिकार जैसे मौलिक अधिकार इस दौरान निलंबित किए जा सकते हैं या फिर उन पर सख्त पाबंदियां लगाई जा सकती हैं, ताकि देश की सुरक्षा बनी रहे.

राष्ट्रपति शासन में शासन व्यवस्था का स्वरूप

राष्ट्रपति शासन लागू होने पर शक्तियां केवल उसी संबंधित राज्य तक सिमटकर रह जाती हैं. वहां की विधानसभा को या तो निलंबित कर दिया जाता है या फिर उसे पूरी तरह से भंग कर दिया जाता है. संसद को उस राज्य के लिए बजट पास करने और कानून बनाने का अधिकार मिल जाता है. हालांकि इस व्यवस्था की सबसे राहत की बात यह है कि इससे आम जनता के मौलिक अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता है. नागरिक अपने अधिकारों का इस्तेमाल सामान्य दिनों की तरह से ही करते हैं. राष्ट्रपति शासन के जरिए सिर्फ उस राज्य का राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा ही केंद्र के अधीन आता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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