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चुनाव जीतने के बाद कैसे बनती है सरकार, क्या होता है गठन का प्रोसेस?

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पहली बार सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है. अब सभी की निगाहें नए मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिकी हैं. आइए जानें कि इसके बाद सरकार का गठन कैसे होता है.

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  • राज्यपाल दिलाएंगे मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हो चुका है और भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की दहलीज पर खड़ी है. दशकों के इंतजार के बाद प्रदेश में कमल खिला है, लेकिन जीत के उत्साह के बीच सबसे बड़ा सवाल 'अगला मुख्यमंत्री कौन?' बना हुआ है. सुवेंदु अधिकारी से लेकर दिलीप घोष तक कई नाम चर्चा में हैं, पर भाजपा आलाकमान का चौंकाने वाला अंदाज सस्पेंस बरकरार रखे हुए है. आइए समझते हैं कि प्रचंड बहुमत के बाद राजभवन में सरकार बनाने का दावा कैसे पेश किया जाता है.

पश्चिम बंगाल में सत्ता का नया समीकरण

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है. चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणामों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है, जिसके बाद प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार बनना तय है. अब तक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी, लेकिन अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सत्ता परिवर्तन का दौर शुरू हो गया है. राज्य की जनता के मन में अब केवल एक ही सवाल है कि बंगाल की कमान किसके हाथों में होगी.

निवर्तमान मुख्यमंत्री का पद से त्यागपत्र

सरकार गठन की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम वर्तमान मुख्यमंत्री का इस्तीफा होता है. मतगणना के अंतिम नतीजे आने के बाद, जब यह साफ हो जाता है कि मौजूदा सरकार अपना बहुमत खो चुकी है, तब निवर्तमान मुख्यमंत्री राजभवन जाकर अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपते हैं. पश्चिम बंगाल में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा. हालांकि, नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री को केयरटेकर के तौर पर काम जारी रखने का आग्रह कर सकते हैं.

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विधायक दल के नेता का आधिकारिक चयन

बहुमत प्राप्त करने वाली पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम अपने नेता का चुनाव करना होता है. भाजपा के निर्वाचित विधायक एक औपचारिक बैठक करेंगे, जिसमें सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना जाएगा. बंगाल में मुख्यमंत्री पद के लिए सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य जैसे कद्दावर नेताओं के नाम रेस में हैं. यह भी संभव है कि मोदी-शाह की जोड़ी किसी महिला चेहरे को आगे कर सबको चौंका दे. चुना गया यही नेता आगे चलकर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेता है.

राजभवन में बहुमत का दावा पेश करना

जब पार्टी अपने नेता का नाम तय कर लेती है, तो वह नेता राज्यपाल से मुलाकात का समय मांगता है. राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं. बहुमत वाली पार्टी का नेता राज्यपाल को अपने विधायकों के समर्थन की सूची सौंपता है और सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश करता है. यदि किसी एक पार्टी को बहुमत न मिले, तो गठबंधन की स्थिति में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है. राज्यपाल संतुष्ट होने के बाद सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने का निमंत्रण देते हैं.

शपथ ग्रहण और संवैधानिक औपचारिकताएं

राज्यपाल द्वारा निमंत्रण मिलने के बाद शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी शुरू होती है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं. एक गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है. मुख्यमंत्री के साथ-साथ उनके मंत्रिमंडल के कुछ खास मंत्रियों को भी इसी दिन शपथ दिलाई जा सकती है. यह वह क्षण होता है जब नई सरकार आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाल लेती है और राज्य की मशीनरी को दिशा देना शुरू करती है.

मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों का आवंटन

मुख्यमंत्री के शपथ लेने के बाद अगला बड़ा काम कैबिनेट का विस्तार करना होता है. मुख्यमंत्री अपनी पसंद और वरिष्ठता के आधार पर मंत्रियों की सूची तैयार करते हैं और राज्यपाल उन्हें पद की शपथ दिलाते हैं. इसके बाद मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों जैसे कि गृह, वित्त, शिक्षा और स्वास्थ्य का बंटवारा करते हैं. बंगाल जैसे बड़े राज्य में विभागों का सही आवंटन सरकार की सफलता के लिए बहुत जरूरी माना जाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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