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आचार संहिता लागू होने के कितने दिन बाद होती है वोटिंग, बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले जान लें नियम

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरो पर है. ऐसे में आपने इलेक्शन के समय आचार संहिता शब्द काफी बार सुना होगा. तो आइए आपको बताते हैं कि क्या होती है आचार संहिता और ये कब लागू होती है?

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरो पर है. सभी राजनीतिक दल जनता को अपने वादों से लुभाने की पूरी कोशिश में लगे हैं. कहीं महिलाओं को 1500 देने की बात है तो कहीं 2500 देने की. ऐसे में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया हर इलेक्शन के दौरान कुछ नियम कानून लागू करता है जिन्हें मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट कहा जाता है. आपने अक्सर इलेक्शन के समय आचार संहिता शब्द सुना होगा लेकिन कभी सोचा है कि क्या है ये आचार संहिता और कब ये लागू होती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि इलेक्शन कमीशन की गाइडलाइंस के अनुसार कब लगती है आचार संहिता और इसके कितने दिन बाद शुरू होती है वोटिंग. 

क्या है आचार संहिता
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया आचार संहिता को लागू कर सकती है. आचार संहिता कोड ऑफ कंडक्ट होता है जो सभी राजनीतिक दलों के बीच समानता लाने और किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो इस बात को सुनिश्चित करने के लिए लगाई जाती है. इसके अलावा ये भी देखा जाता है कि कई बार पॉलिटिकल पार्टियां अपने लाभ के लिए गवर्नमेंट रिसोर्सेज का इस्तमाल कैंपेनिंग में और कई चीजों में करती हैं. ऐसे में इन रिसोर्सेज का गलत इस्तेमाल न हो ये आचार संहिता का उद्देश्य होता है.

आचार संहिता के नियम
आचार संहिता के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है. ऐसा न करने पर इलेक्शन कमीशन तुरंत उस पार्टी या कैंडिडेट के खिलाफ एक्शन ले सकती है. ये नियम इस प्रकार हैं:
1. कोई भी नेता या पार्टी इलेक्शन के दौरान किसी भी काम के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल नहीं कर सकती है.
2. कोई भी नेता या पार्टी इलेक्शन कैंपेनिंग के लिए सरकारी गाड़ियों या बंगले का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. 
3. आचार संहिता लागू होने के बाद कोई भी पार्टी किसी भी प्रकार की नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर सकती है.
4. इस दौरान चुनावी रैलियों या सभाओं के लिए पुलिस से अनुमति लेनी होती है.
5. आचार संहिता लगते ही धर्म या जाति के आधार पर वोट मांगना भी मना होता है.

कब लगती है आचार संहिता
आचार संहिता को लागू करने का समय इलेक्शन कमीशन तय करती है. 
1. चुनाव की तारीख की घोषणा: जिस दिन इलेक्शन कमीशन चुनावों की तारीख की घोषणा करती है, उसी समय से अचार संहिता भी लागू हो जाती है. 
2. चुनाव प्रोसेस का अंत: आचार संहिता तब तक लागू रहती है जब तक चुनाव और वोट काउंटिंग पूरी नहीं हो जाती. इसके बाद जैसे ही चुनाव के रिजल्ट की घोषणा होती है, आचार संहिता हट जाती है.

इसके अलावा आचार संहिता लागू होने के कितने दिन बाद वोटिंग शुरू होगी इस बात का भी कोई फिक्सड जवाब नहीं है, क्योंकि इस घोषणा के 3-6 हफ्तों बाद अक्सर वोटिंग शुरू हो जाती है. लेकिन कई बार इससे अधिक समय भी लग जाता है.  

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आंखों में सपने लिए, घर से हम चल तो दिए, जानें ये राहें अब ले जाएंगी कहां... कहने को तो ये सिंगर शान के गाने तन्हा दिल की शुरुआती लाइनें हैं, लेकिन दीपाली की जिंदगी पर बखूबी लागू होती हैं. पूरा नाम दीपाली बिष्ट, जो पहाड़ की खूबसूरत दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. किसी जमाने में दीपाली के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ कंधे पर झोला टांगकर और हाथों में अखबार लेकर घूमने वाले लोग होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों में इसी दुनिया का सितारा बनने के सपने पनपने लगे और वह भी पत्रकारिता की दुनिया में आ गईं. उन्होंने अपने इस सफर का पहला पड़ाव एबीपी न्यूज में डाला है, जहां वह ब्रेकिंग, जीके और यूटिलिटी के अलावा लाइफस्टाइल की खबरों से रोजाना रूबरू होती हैं. 

दिल्ली में स्कूलिंग करने वाली दीपाली ने 12वीं खत्म करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और सत्यवती कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रैजुएशन किया. ग्रैजुएशन के दौरान वह विश्वविद्यालय की डिबेटिंग सोसायटी का हिस्सा बनीं और अपनी काबिलियत दिखाते हुए कई डिबेट कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की. 

साल 2024 में दीपाली की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (नोएडा) से टीवी जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. उस दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और एंकरिंग की बारीकियां सीखीं. कॉलेज खत्म करने के बाद वह एबीपी नेटवर्क में बतौर कॉपीराइटर इंटर्न पत्रकारिता की दुनिया को करीब से समझ रही हैं. 

घर-परिवार और जॉब की तेज रफ्तार जिंदगी में अपने लिए सुकून के पल ढूंढना दीपाली को बेहद पसंद है. इन पलों में वह पोएट्री लिखकर, उपन्यास पढ़कर और पुराने गाने सुनकर जिंदगी की रूमानियत को महसूस करती हैं. इसके अलावा अपनी मां के साथ मिलकर कोरियन सीरीज देखना उनका शगल है. मस्ती करने में माहिर दीपाली को घुमक्कड़ी का भी शौक है और वह आपको दिल्ली के रंग-बिरंगे बाजारों में शॉपिंग करती नजर आ सकती हैं.

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