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राजस्थान का भूतिया किला! शाम 6 बजने के बाद साक्षात मौत करती है तांडव

भारत के राजस्थान में यूं तो एक से एक किले हैं. लेकिन क्या आप यहां के भूतीया किले के बारे में जानते हैं. आज हम आपको बताएंगे राजस्थान के अलवर के भूतीया किले के बारे में.

भूत जैसा कुछ नहीं होता है ये कहते हुए आपने अक्सर लोगों को सुना होगा. लेकिन क्या हो जब आप ऐसी कोई जगह अपनी आंखों से देख लें. भारत के पश्चिम में बसे राजस्थान का यह आलीशान किला आज एक खंडहर मात्र रह गया है, जहां भूतिया साया होने का दावा किया जाता है. इस किले में शाम के 6 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है, जिसके बाद कोई भी यहां आने जाने की हिम्मत नहीं करता है. ऐसा माना जाता है कि इस किले में पैरानॉर्मल एक्टिविटी होती हैं, जिनमें चीखने और चिल्लाने की आवाजें आना आम बात है. ASI यानि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 6 बजे के बाद यहां आने पर रोक लगा रखी हैं. यहां आने वाले टूरिस्ट इस किले को केवल दिन में ही इसे देख सकते हैं. आइए जानते हैं इस किले के बारे में. 

किसने बनवाया था यह किला?

बता दें कि हम जिस किले की बात कर रहे हैं, वह है राजस्थान के अलवर में मौजूद भानगढ़ किला. इतिहास के अनुसार 17वीं शताब्दी में इस किले को आमेर के राजा भगवत दास ने इसे अपने छोटे बेटे माधो सिंह प्रथम के लिए 1573 में बनवाया था. एक समय पर राजा का आलीशान महल होने वाला यह किला आज केवल खंडहर बनकर रह गया है. इतना ही नहीं इस किले के साथ भूतों और श्राप की कई कहानियां जुड़ गई हैं.

क्यों मिला भानगढ़ को श्राप?

आज भानगढ़ का यह किला भूतिया माना जाता है. लोगों का कहना है कि यह पैरानॉर्मल एक्टिविटी होती है और चीखने-चिल्लाने की आवाजें आती हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस किले को बनाने से पहले यहां के राजा माधो सिंह ने पास में रहने वाले एक तपस्वी से अनुमति मांगी. दरअसल, उस साधु ने शर्त रखी कि इस किले की छाया कभी उसकी कुटिया पर नहीं पड़नी चाहिए. साधु की इस शर्त को अनदेखा करके यहां ऊंचा किला बनवाया गया. इसके बाद इस किले की छाया उस साधु की कुटिया पर पड़ गई और उसने गुस्से में आकर पूरे भानगढ़ को श्राप दे दिया.

क्या है इसके भूतिया होने की कहानी

ऐसा कहा जाता है कि उस तांत्रिक के श्राप के कारण बाद यहां गंभीर युद्ध हुआ, जिसमें बहुत से लोग मारे गए और धीरे-धीरे यह जगह शापित हो गई. साथ ही यहां पर लड़ाई में मारे गए लोगों की आत्माएं भटकने लगीं. इस किले के भूतिया होने के पीछे एक कहानी और भी मानी जाती है. एक कहानी यह भी है कि एक बार कोई तांत्रिक यहां की राजकुमारी रत्नावती के प्यार में पड़ गया था. उसने जादू की मदद से रानी को हासिल करना चाहा और रानी के इत्र में जादू कर दिया. रानी को इसका पता चल गया और उन्होंने वह इत्र भी फेंक दिया, जिस कारण जादू का असर तांत्रिक पर ही हो गया और वह मर गया. मरने से पहले वह पूरे भानगढ़ को नष्ट होने का श्राप दे गया.

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आंखों में सपने लिए, घर से हम चल तो दिए, जानें ये राहें अब ले जाएंगी कहां... कहने को तो ये सिंगर शान के गाने तन्हा दिल की शुरुआती लाइनें हैं, लेकिन दीपाली की जिंदगी पर बखूबी लागू होती हैं. पूरा नाम दीपाली बिष्ट, जो पहाड़ की खूबसूरत दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. किसी जमाने में दीपाली के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ कंधे पर झोला टांगकर और हाथों में अखबार लेकर घूमने वाले लोग होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों में इसी दुनिया का सितारा बनने के सपने पनपने लगे और वह भी पत्रकारिता की दुनिया में आ गईं. उन्होंने अपने इस सफर का पहला पड़ाव एबीपी न्यूज में डाला है, जहां वह ब्रेकिंग, जीके और यूटिलिटी के अलावा लाइफस्टाइल की खबरों से रोजाना रूबरू होती हैं. 

दिल्ली में स्कूलिंग करने वाली दीपाली ने 12वीं खत्म करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और सत्यवती कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रैजुएशन किया. ग्रैजुएशन के दौरान वह विश्वविद्यालय की डिबेटिंग सोसायटी का हिस्सा बनीं और अपनी काबिलियत दिखाते हुए कई डिबेट कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की. 

साल 2024 में दीपाली की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (नोएडा) से टीवी जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. उस दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और एंकरिंग की बारीकियां सीखीं. कॉलेज खत्म करने के बाद वह एबीपी नेटवर्क में बतौर कॉपीराइटर इंटर्न पत्रकारिता की दुनिया को करीब से समझ रही हैं. 

घर-परिवार और जॉब की तेज रफ्तार जिंदगी में अपने लिए सुकून के पल ढूंढना दीपाली को बेहद पसंद है. इन पलों में वह पोएट्री लिखकर, उपन्यास पढ़कर और पुराने गाने सुनकर जिंदगी की रूमानियत को महसूस करती हैं. इसके अलावा अपनी मां के साथ मिलकर कोरियन सीरीज देखना उनका शगल है. मस्ती करने में माहिर दीपाली को घुमक्कड़ी का भी शौक है और वह आपको दिल्ली के रंग-बिरंगे बाजारों में शॉपिंग करती नजर आ सकती हैं.

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