एक्सप्लोरर

बेलारूस में परमाणु हथियार क्यों तैनात करने जा रहा रूस, जानें कितने देशों से मिलती है इसकी सीमा?

रूस ने बेलारूस में परमाणु हथियारों की तैनाती के लिए वहां के सैनिकों की ट्रेनिंग शुरू कर दी है. आइए जानें कि रूस ऐसा क्यों कर रहा है और इस देश की सीमाएं किन देशों के साथ मिलती हैं.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • यह तैनाती यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव लाएगी.

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. रूस ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी बेलारूस की धरती पर परमाणु हथियार तैनात करने की जमीनी तैयारी तेज कर दी है. इसके लिए बेलारूस के सैनिकों को खास सैन्य प्रशिक्षण भी देना शुरू कर दिया गया है. पांच देशों की सीमाओं से घिरे बेलारूस में रूस का यह कदम सिर्फ एक सैन्य फैसला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर यूरोप और पश्चिमी देशों के गठबंधन (नाटो) को मॉस्को की तरफ से दी गई एक बड़ी और खुली रणनीतिक चुनौती है. आइए जानें कि रूस ने ऐसा क्यों किया है.

सैनिकों की परमाणु ट्रेनिंग

रूस ने बेलारूस की धरती पर अपने घातक परमाणु हथियारों को तैनात करने की प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है. इसके तहत सबसे पहले बेलारूस ने अपने सैनिकों के लिए एक विशेष और कड़े प्रशिक्षण अभियान की शुरुआत की है. इस सैन्य ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य बेलारूस के जवानों को इन आधुनिक हथियारों के संचालन के योग्य बनाना है. जैसे ही यह प्रशिक्षण पूरा होगा, वैसे ही रूस की तरफ से परमाणु हथियारों की खेप बेलारूस को सौंप दी जाएगी. ये हथियार सीधे तौर पर मॉस्को के आदेश पर काम करेंगे. 

मॉस्को की बड़ी रणनीति

बेलारूस लंबे समय से रूस का एक बेहद खास और वफादार रणनीतिक साझेदार (स्ट्रैटजिक पार्टनर) रहा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साल 2023 में ही यह साफ कर दिया था कि वे बेलारूस में शुरुआती तौर पर अपने 10 परमाणु हथियार तैनात करेंगे. रूस इस कदम के जरिए बेलारूस की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर पूरे यूरोप और पश्चिमी ताकतों पर एक मनोवैज्ञानिक और सैन्य दबाव बनाना चाहता है. मॉस्को इस इलाके में अपनी स्थिति को इतनी मजबूत कर लेना चाहता है कि विरोधी कोई भी कदम उठाने से पहले सौ बार सोचें.

यह भी पढ़ें: Chicken Neck Corridor: क्या है चिकन नेक? इसे केंद्र सरकार को सौंपने से क्या होगा देश को फायदा, यहां जानिए

पुतिन के दावों पर शक

शुरुआत में जब रूस ने बेलारूस में परमाणु हथियारों को तैनात करने की बात कही थी, तब मॉस्को ने दावा किया था कि इन हथियारों के नियंत्रण और इस्तेमाल में बेलारूस की कोई सीधी भूमिका नहीं होगी. इसका पूरा रिमोट कंट्रोल सिर्फ रूस के पास ही रहेगा. लेकिन अब जिस तरह से बेलारूस के सैनिकों को इन हथियारों को संभालने की सीधी ट्रेनिंग दी जा रही है, उसने राष्ट्रपति पुतिन के पुराने दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेनिंग के बाद बेलारूस की भूमिका सिर्फ एक बेस तक सीमित नहीं रहेगी.

किन देशों से मिलती हैं बेलारूस की सीमाएं?

बेलारूस का भूगोल उसे इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील केंद्र बना देता है. बेलारूस की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं कुल पांच देशों से मिलती हैं. इसके एक तरफ खुद रूस है, तो दूसरी तरफ यूक्रेन स्थित है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेलारूस की सीमाएं तीन नाटो (NATO) सदस्य देशों पोलैंड, लिथुआनिया और लातविया से भी सीधे टकराती हैं. नाटो देशों और यूक्रेन से घिरे होने के कारण रूस के लिए बेलारूस की धरती किसी भी युद्ध की स्थिति में सबसे मुफीद और आक्रामक सैन्य ठिकाने के रूप में काम आ सकती है.

यूक्रेन पर बढ़ता दबाव

यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भी यह तैनाती एक बहुत बड़ा बड़ा बदलाव लेकर आ सकती है. दरअसल, बेलारूस और यूक्रेन के बीच की आपसी सीमा 1000 किलोमीटर से भी अधिक लंबी है. यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में भी रूस ने बेलारूस की जमीन का इस्तेमाल अपनी सेना को आगे बढ़ाने के लिए किया था. अब वहां परमाणु हथियारों की मौजूदगी से रूस यह साफ संदेश दे रहा है कि आने वाले समय में युद्ध का दायरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है. इससे यूक्रेन की उत्तरी सीमा पर हमेशा के लिए खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा.

वैश्विक सुरक्षा पर खतरा

इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को बेहद संवेदनशील स्थिति में डाल दिया है. नाटो देशों की सीमा के इतने करीब परमाणु हथियारों की तैनाती और विदेशी सैनिकों को उसकी ट्रेनिंग मिलना सीधे तौर पर पश्चिमी देशों की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध की तरह है. रूस के इस कदम से यूरोप में शीत युद्ध जैसा माहौल फिर से गहराने लगा है. अब देखना यह होगा कि नाटो और अमेरिका रूस की इस घेराबंदी का मुकाबला करने के लिए आने वाले दिनों में क्या रणनीति अपनाते हैं.

यह भी पढ़ें: Doomsday Clock: प्रलय के कितने करीब पहुंच गई दुनिया, जानें 'डूम्सडे क्लॉक' में कितना बचा तबाही का समय?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Ayatollah Khamenei: कर्नाटक के इस गांव से था खामेनेई का 40 साल पुराना रिश्ता, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह
कर्नाटक के इस गांव से था खामेनेई का 40 साल पुराना रिश्ता, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह
भारत, दुबई और फ्रांस में तापमान 40 डिग्री, कहां-कितना होगा फील? किन फैक्टर्स से होगा चेंज
भारत, दुबई और फ्रांस में तापमान 40 डिग्री, कहां-कितना होगा फील? किन फैक्टर्स से होगा चेंज
क्यों चौकोर ही होते हैं हर देश के झंडे, नेपाल क्यों है इन सबसे अलग? जानें इसका इतिहास
क्यों चौकोर ही होते हैं हर देश के झंडे, नेपाल क्यों है इन सबसे अलग? जानें इसका इतिहास
Rain Measurement Units: इंच, मिलीमीटर और सेंटीमीटर में क्यों गिनी जाती हैं बारिश की यूनिट, इनका क्या है मतलब?
इंच, मिलीमीटर और सेंटीमीटर में क्यों गिनी जाती हैं बारिश की यूनिट, इनका क्या है मतलब?
Advertisement

वीडियोज

Tata Sierra EV QWD first look and interior, features | #tata #tatasierraev #autolive #sierraev
Mumbai Rains: हर तरफ से 'कटा', मुंबई बना टापू! |ABPLIVE
Sansani: ट्रेन के आरक्षित डिब्बे में चलता-फिरता जंगल? | Nagpur
Breaking | Wayanad Landslide | Kerala: वायनाड में पहाड़ से उतरी तबाही! | Rain Alert | ABP News
Ram Mandir Chori Update | Janhit: चंपत ने बताया..चढ़ावा किसने चुराया? | UP News | Ayodhya | SIT
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
निज्जर हत्याकांड में भारत को घसीटने वाले पूर्व कनाडा PM के दावे की निकली हवा, RCMP ने खोली पोल
निज्जर हत्याकांड में भारत को घसीटने वाले पूर्व कनाडा PM के दावे की निकली हवा, RCMP ने खोली पोल
प्रशांत किशोर को बड़ा झटका, इस नेता ने दिया इस्तीफा, बांकीपुर से BJP को दिया समर्थन
प्रशांत किशोर को बड़ा झटका, इस नेता ने दिया इस्तीफा, बांकीपुर से BJP को दिया समर्थन
Dhamaal 4 Advance Booking: अजय देवगन की 'धमाल 4' की एडवांस बुकिंग हुई शुरू, जानें- रिलीज से पहले कितना कर डाला कलेक्शन
'धमाल 4' की एडवांस बुकिंग हुई शुरू, जानें- रिलीज से पहले कितना कर डाला कलेक्शन
इतिहास में दर्ज हुआ अर्जेंटीना और इजिप्ट का मैच, रिकॉर्ड बनने के साथ हुआ भयंकर विवाद; मेसी पर लगा आरोप
इतिहास में दर्ज हुआ अर्जेंटीना और इजिप्ट का मैच, रिकॉर्ड बनने के साथ हुआ भयंकर विवाद
'कैंसर' है ईरान सरकार, जड़ से खत्म करना जरूरी...', ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक के बाद ट्रंप की तेहरान को धमकी
'कैंसर' है ईरान सरकार, जड़ से खत्म करना जरूरी...', ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक के बाद ट्रंप की तेहरान को धमकी
Indian Weapon Demand: ब्रह्मोस से आकाशतीर तक, दुनिया में बढ़ रही भारतीय हथियारों की मांग, इंडिया बनेगा डिफेंस किंग?
ब्रह्मोस से आकाशतीर तक, दुनिया में बढ़ रही भारतीय हथियारों की मांग, इंडिया बनेगा डिफेंस किंग?
Prabhas Mandal Encounter: 'बेटे ने गलत किया, नहीं चाहिए उसका शव, जो चाहो वो करो', बंगाल रेप आरोपी के एनकाउंटर पर बोली मां
'बेटे ने गलत किया, नहीं चाहिए उसका शव, जो चाहो वो करो', बंगाल रेप आरोपी के एनकाउंटर पर बोली मां
मेलोनी पर डोनाल्ड ट्रंप के बदले सुर, तुर्किए पहुंचकर की इटली PM की तारीफ, कहा- 'वो मुझे बहुत पसंद, लेकिन...'  
मेलोनी को लेकर ट्रंप के बदले सुर, तुर्किए पहुंचकर की इटली PM की तारीफ, कहा- 'वो मुझे बहुत पसंद, लेकिन...'  
Embed widget