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खेती में सिंचाई संयंत्र लगाने के लिए 70 से 75 फीसदी सब्सिडी देती है सरकार, कमाल की है 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना

Per Drop More Crop Scheme: कम पानी में बंपर पैदावार देने वाली पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना किसानों के लिए वरदान है. ड्रिप और स्प्रिंकलर लगाने के लिए सरकार 70 से 75 फीसदी तक की भारी सब्सिडी दे रही है.

Per Drop More Crop Scheme: खेती-किसानी में पानी की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है और पारंपरिक तरीके से सिंचाई करने पर पानी की बहुत ज्यादा बर्बादी होती है. इस समस्या को दूर करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना चला रही है जो बेहद शानदार है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर बूंद पानी का सही इस्तेमाल करना और फसल की पैदावार को बढ़ाना है. 

सबसे अच्छी बात यह है कि सरकार आधुनिक सिंचाई संयंत्र जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने के लिए किसानों को 70 से 75 फीसदी तक की भारी सब्सिडी दे रही है. इस सरकारी मदद से किसान बहुत ही कम खर्च में अपने खेतों में आधुनिक तकनीक अपनाकर पानी और पैसे दोनों की बड़ी बचत कर सकते हैं. जान लें कैसे मिलता है इस योजना में लाभ

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर मिलती है छूट

इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों में ड्रिप (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) जैसी आधुनिक तकनीक लगाने के लिए सरकार की तरफ से तगड़ा वित्तीय सपोर्ट मिलता है. अलग-अलग राज्यों और किसानों की कैटेगरी के हिसाब से इस संयंत्र को लगाने की कुल लागत पर 70 से 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई किसान आधुनिक सिंचाई सिस्टम लगवाता है. 

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तो उसे अपनी जेब से सिर्फ 25 से 30 फीसदी पैसा ही खर्च करना पड़ता है बाकी का पूरा खर्च सरकार खुद उठाती है. इस सब्सिडी का सीधा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा मिल रहा है जो आर्थिक तंगी के चलते महंगे उपकरण नहीं खरीद पाते थे. इस छूट का फायदा उठाकर कोई भी पात्र किसान आसानी से अपने खेत में यह सिस्टम लगवा सकता है.

कम पानी में बंपर पैदावार

पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना को अपनाने से किसानों को एक नहीं बल्कि कई बेहतरीन फायदे मिलते हैं. पारंपरिक सिंचाई के मुकाबले ड्रिप या फव्वारा सिस्टम से खेती करने पर लगभग 40 से 50 प्रतिशत पानी की बचत होती है. जिससे सूखे या कम पानी वाले इलाकों में भी आसानी से बेहतरीन खेती की जा सकती है. इसके अलावा इस सिस्टम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है जिससे फसल को पूरा पोषण मिलता है और पैदावार में 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है. 

लागत में बड़ी कमी

पानी के साथ-साथ इस तकनीक से खाद देने (फर्टिगेशन) पर लेबर का खर्च और बिजली का बिल भी आधा हो जाता है. कुल मिलाकर यह योजना किसानों की खेती की लागत को बहुत कम करके उनके मुनाफे को दोगुना करने का सबसे बेस्ट जरिया साबित हो रही है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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