एक्सप्लोरर

Doomsday Clock: प्रलय के कितने करीब पहुंच गई दुनिया, जानें 'डूम्सडे क्लॉक' में कितना बचा तबाही का समय?

Doomsday Clock: दुनिया अब तबाही के और करीब आ चुकी है. वैज्ञानिकों ने डूम्सडे क्लॉक के समय में बदलाव किया है. आइए जानते हैं प्रलय के कितने करीब पहुंच गई है दुनिया.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • पहली बार AI को सभ्यता के लिए बड़ा खतरा माना।

Doomsday Clock: दुनिया शायद पहले से कहीं ज्यादा तेज एक वैश्विक तबाही के करीब है. कम से कम बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के वैज्ञानिकों द्वारा रखी जाने वाली मशहूर डूम्सडे क्लॉक के मुताबिक तो यही लगता है. जनवरी में इस संस्था ने इस प्रतीकात्मक घड़ी की सुइयों को चार सेकंड और आगे बढ़ा दिया है. इससे इंसानियत आधी रात से सिर्फ 85 सेकंड दूर रह गई है. यह वह बिंदु है जो वैश्विक प्रलय या फिर सभ्यता को खत्म करने वाली आपदा को दर्शाता है. वैज्ञानिक इसे 1947 में घड़ी के पहली बार बनने के बाद से अब तक का सबसे खतरनाक पल बता रहे हैं.

डूम्सडे क्लॉक क्या है? 

डूम्सडे क्लॉक असल में समय बताने वाली कोई घड़ी नहीं है बल्कि यह एक प्रतीकात्मक चेतावनी प्रणाली है. इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद उन वैज्ञानिकों ने बनाया था जो परमाणु हथियारों और वैश्विक सुरक्षा खतरों को लेकर चिंतित थे. यह घड़ी समय के आधी रात के करीब पहुंचने के रूपक का इस्तेमाल करके इस बात को दर्शाती है कि इंसानियत खुद को खत्म करने की तरफ बढ़ रही है. वैज्ञानिकों का मानना है की घड़ी की सुइयां आधी रात के जितने करीब पहुंचती हैं दुनिया पर परमाणु युद्ध, पर्यावरण के विनाश या फिर तकनीकी आपदा जैसी विनाशकारी घटनाओं का खतरा उतना ही ज्यादा बढ़ जाता है.

दुनिया अब पहले से कहीं ज्यादा करीब 

जब 1947 में पहली बार इस घड़ी को पेश किया गया था तब इसे आधी रात से 7 मिनट पहले पर सेट किया गया था. इसके इतिहास का सबसे सुरक्षित दौर 1991 में आया. उस वक्त अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध खत्म हो गया था. उस समय परमाणु तनाव कम होने की वजह से वैज्ञानिकों ने घड़ी को पीछे करके आधी रात से 17 मिनट पहले पर सेट कर दिया था.

हालांकि बीते कुछ सालों में स्थिति लगातार बिगड़ती गई है. 2023 में घड़ी आधी रात से 90 सेकंड पहले पर थी. 2025 में यह 89 सेकंड पर पहुंच गई और अब वैज्ञानिकों ने इसे फिर से आगे बढ़कर आधी रात से सिर्फ 85 सेकंड पहले पर सेट कर दिया है. 

यह भी पढ़ेंः एक दिन में कितना पेट्रोल फूंक देते हैं भारत के लोग, जानें इस वक्त की सप्लाई से यह कितना ज्यादा?

वैज्ञानिकों ने घड़ी को आगे क्यों बढ़ाया? 

बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के मुताबिक कई आपस में जुड़े हुए वैश्विक संकटों की वजह से उन्होंने घड़ी को आधी रात के और करीब सेट कर दिया है.  सबसे बड़ी चिंताओं में से एक रूस, चीन और अमेरिका जैसी बड़ी ताकतों के बीच बढ़ती परमाणु हथियारों की होड़ है.

युद्ध और वैश्विक संघर्ष बढ़ा रहे हैं जोखिम  

चल रहे अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों ने भी इस घड़ी को आगे बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभाई है. विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि यह संघर्ष परमाणु शक्तियों से जुड़े सैन्य टकराव की जोखिमों को और बढ़ते हैं. 

इतिहास में पहली बार वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी वैश्विक  जोखिम में एक बड़ा योगदानकर्ता के रूप में दिख रहे हैं. तेजी से विकसित हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम गलत सूचना, साइबर युद्ध, स्वायत्त हथियारों और सैन्य संघर्षों के दौरान फैसला लेने में होने वाली गलतियों के बारे में चिंता पैदा कर रहे हैं.

यह भी पढ़ेंः भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का अधिकार किसे, जानें पाकिस्तान में कौन तय करता है कीमतें?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

क्या सभी फ्लाइट में तैनात होते हैं एयर मार्शल, इंटरनेशनल फ्लाइट का क्या रूल?
क्या सभी फ्लाइट में तैनात होते हैं एयर मार्शल, इंटरनेशनल फ्लाइट का क्या रूल?
गांधी जी का चश्मा, घड़ी और चप्पल आज कहां है, इसे किसने खरीदा था?
गांधी जी का चश्मा, घड़ी और चप्पल आज कहां है, इसे किसने खरीदा था?
दुनिया के कितने देशों में है महात्मा गांधी का स्मारक, देख लीजिए नाम
दुनिया के कितने देशों में है महात्मा गांधी का स्मारक, देख लीजिए नाम
क्या है फॉर्म 6,7,8 और 8A? EC विवाद के बीच जान लें इनके बीच का अंतर
क्या है फॉर्म 6,7,8 और 8A? EC विवाद के बीच जान लें इनके बीच का अंतर

वीडियोज

कॉकपिट में 'कसाई' पायलट...प्लेन क्रैश का 'टेरर प्लान' !
बिहार में बाढ़ का तांडव! बेघर हुए लाखों लोग...
SIR में 'गड़बड़' सॉफ्टवेयर का 'डेवलपर' कौन?
कैप्टन स्मिथ की पूरी कहानी!
फॉर्म 6 को लेकर विवाद क्यों? विश्लेषकों का सटीक विश्लेषण

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
पीएम मोदी, सोनिया गांधी और राहुल ने एक दूसरे को जोड़े हाथ, खरगे से भी हुई बात
पीएम मोदी, सोनिया गांधी और राहुल ने एक दूसरे को जोड़े हाथ, खरगे से भी हुई बात
CEC के खिलाफ प्रदर्शन पर BJP बोली- बेवजह प्रोटेस्ट, RJD ने कहा- 'बापू होते तो…'
CEC के खिलाफ प्रदर्शन पर BJP बोली- बेवजह प्रोटेस्ट, RJD ने कहा- 'बापू होते तो…'
अगर बारिश की वजह से रद्द हुआ भारत-पाकिस्तान फाइनल, किसे मिलेगा गोल्ड मेडल?
अगर बारिश की वजह से रद्द हुआ भारत-पाकिस्तान फाइनल, किसे मिलेगा गोल्ड मेडल?
OTT रिलीज के बाद भी नहीं थमी 'इरुमुडी' की कमाई, बनी रवि तेजा की पहली 250 करोड़ी फिल्म
OTT रिलीज के बाद भी नहीं थमी 'इरुमुडी' की कमाई, बनी रवि तेजा की पहली 250 करोड़ी फिल्म
'देश आपके साथ', PM मोदी ने स्मित माछर से फोन पर की बात, देखें वीडियो
'देश आपके साथ', PM मोदी ने स्मित माछर से फोन पर की बात, देखें वीडियो
'हमलावर का हुआ था ब्रेनवॉश', नेतन्याहू का फ्लाई दुबई विमान कांड पर बड़ा दावा
'हमलावर का हुआ था ब्रेनवॉश', नेतन्याहू का फ्लाई दुबई विमान कांड पर बड़ा दावा
बार-बार गर्म हो रहा फोन, तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग
बार-बार गर्म हो रहा फोन, तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग
बारिश होते ही बेंगलुरू में 1200 के पार पहुंचा ऑटो किराया, इंटरनेट पर मचा बवाल
बारिश होते ही बेंगलुरू में 1200 के पार पहुंचा ऑटो किराया, इंटरनेट पर मचा बवाल
Embed widget