Bab al Mandeb Strait: बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज भी बंद हो गया तो किन चीजों की होगी कमी, भारत पर कितना पड़ेगा असर?
Bab al Mandeb Strait: बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है. यह एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का प्रमुख मार्ग है.

Bab al Mandeb Strait: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग के चलते दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर पहले ही तनाव बना हुआ है. वहीं अब एक और अहम समुद्री रास्ता चिंता की वजह बन गया है. दरअसल मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज का पर खतरा मंडरा रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस रास्ते पर कोई बड़ी रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक व्यापार और भारत की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज बंद हो गया तो किन चीजों की कमी होगी और इसका भारत पर कितना असर पड़ेगा?
क्यों जरूरी है बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज?
बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है. यह एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का प्रमुख मार्ग है. स्वेज नहर तक पहुंचने वाले जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे व्यस्त और राजनीतिक समुद्री मार्गों में शामिल है. वैश्विक स्तर पर करीब 10 से 12 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. जबकि दुनिया के कुल व्यापार का भी बड़ा हिस्सा यहां से गुजरता है. वहीं अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी सक्रिय हो गए हैं. इन्हीं विद्रोहियों ने पहले भी लाल सागर में जहाज को निशाना बनाया. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अगर हालात और बिगड़े तो यह स्ट्रेज प्रभावित हो सकता है. वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे ही स्ट्रेट होर्मुज पर दबाव बढ़ता है, ध्यान बाबा बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज जैसे दूसरे चेक पॉइंट पर चला जाता है जो वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
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खतरे से किन चीजों की हो सकती है कमी?
अगर बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज में दिक्कत आती है, तो सबसे पहले असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ेगा. इसके अलावा कई जरूरी सामानों की आपूर्ति भी प्रभावित होगी. इन सामानों में कच्चा तेल और पेट्रोलियम, खाने का तेल, फर्टिलाइजर, रोजमर्रा का सामान और औद्योगिक कच्चा माल शामिल है. वहीं शिपिंग में देरी और लागत बढ़ने से भी इन चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और बाजार में कमी भी देखने को मिल सकती है. इसके अलावा माना जा रहा है कि अगर यह रास्ता बंद होता है तो जहाज को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ेगा. इससे यात्रा 12 से 20 दिन तक लंबी हो सकती है. इसका सीधा असर ईंधन की लागत, माल ढुलाई और बीमा प्रीमियम पर पड़ेगा, जिससे दुनिया भर में समान महंगा हो सकता है और चेन सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.
भारत पर कितना पड़ सकता है असर?
भारत के लिए बाब-अल-मंडेब स्ट्रेज बहुत जरूरी है, क्योंकि देश के समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होता है. भारत के यूरोप के साथ व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रूट पर निर्भर है, ऐसे में भारत के निर्यात और आयात दोनों पर असर पड़ेगा. वहीं रूसी कच्चे तेल की सप्लाई होने में भी देरी हो सकती है और उद्योगों की लागत बढ़ेगी और उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा खाने का तेल और जरूरी सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी से आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.
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