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French Fries: फ्रांस नहीं बल्कि यहां हुआ था फ्रेंच फ्राइज का आविष्कार, जानें फिर कैसे पड़ा इसका यह नाम?

French Fries: अक्सर ही लोगों को यह लगता है कि फ्रेंच फ्राइज का आविष्कार फ्रांस में हुआ था. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.

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  • फ्रेंच फ्राइज का आविष्कार फ्रांस नहीं, बेल्जियम में हुआ था।
  • 17वीं सदी में नदी जमने पर ग्रामीणों ने आलू को विकल्प बनाया।
  • प्रथम विश्व युद्ध में अमेरिकी सैनिकों ने इन्हें फ्रेंच फ्राइज नाम दिया।
  • बेल्जियम आज भी खुद को इस डिश का जन्मस्थान मानता है।

French Fries: फ्रेंच फ्राइज दुनिया के सबसे मशहूर फास्ट फूड में से एक हैं. सड़क किनारे के कैफे से लेकर आलीशान रेस्टोरेंट तक आलू का यह कुरकुरा नाश्ता लगभग हर जगह काफी पसंद किया जाता है. क्योंकि इसके नाम के साथ फ्रेंच शब्द जुड़ा है इस वजह से ज्यादातर लोगों को यह लगता है कि इस डिश की शुरुआत फ्रांस में हुई थी. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतिहासकार और खान-पान के विशेषज्ञ यह कहते हैं कि फ्रेंच फ्राइज का आविष्कार असल में सदियों पहले बेल्जियम में हुआ था.

कहां से होती है कहानी की शुरुआत? 

रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रेंच फ्राइज की जड़ें 17वीं सदी के आखिर में बेल्जियम से जुड़ी हैं. 1680 की कड़ाके की ठंड के दौरान बेल्जियम के नामुर इलाके से बहने वाली म्यूज नदी कथित तौर पर पूरी तरह से जम गई थी. नदी के पास रहने वाले स्थानीय ग्रामीण अपने रोज के खाने के लिए मछली पकड़ने पर काफी ज्यादा निर्भर थे. वे नदी से छोटी मछलियां पकड़ते थे और उन्हें तेल में तलकर खाते थे. लेकिन जब नदी जम गई तो मछली पकड़ना नामुमकिन हो गया और खाने-पीने की चीजों की कमी होने लगी.

आलू मछली का विकल्प बना 

खाने की कमी का सामना करते हुए ग्रामीणों ने एक ऐसे विकल्प की तलाश शुरू की जो तली हुई मछली की जगह ले सके. उन्होंने आलू को छोटी मछलियों की तरह लंबे और पतले टुकड़ों में काटना शुरु कर दिया और उन्हें गर्म तेल में डीप फ्राई किया. यह प्रयोग सफल रहा. आलू के ये कुरकुरे तले हुए टुकड़े जल्द ही स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए. 

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इन्हें फ्रेंच फ्राइज क्यों कहा जाता है? 

फ्रेंच फ्राइज नाम काफी बाद में सामने आया और इसका गहरा संबंध पहले विश्व युद्ध से है. युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक बेल्जियम में तैनात थे. वहां बेल्जियम के सैनिकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें आलू की इस तली हुई डिश से परिचित कराया. उस समय बेल्जियम की सेना में और बेल्जियम के कई हिस्सों में फ्रेंच भाषा बड़े पैमाने पर बोली जाती थी. लोगों को फ्रेंच में बात करते सुनकर अमेरिकी सैनिकों ने गलती से मान लिया कि वे या तो फ्रांस में हैं या फिर कोई फ्रेंच डिश खा रहे हैं. बस यहीं से उन्होंने इन तले हुए आलुओं को फ्रेंच फ्राइज कहना शुरू कर दिया.

बेल्जियम आज भी इस डिश पर अपना दावा करता है 

आज भी बेल्जियम गर्व से खुद को फ्रेंच फ्राइज का असली जन्मस्थान मानता है. इस देश का फ्राइज के साथ एक गहरा संस्कृतिक जुड़ाव है. बेल्जियम स्टाइल फ्रेंच फ्राइज आमतौर पर ज्यादा मोटे होते हैं और उन्हें ज्यादा कुरकुरा बनाने के लिए दो बार तला जाता है और साथ ही उन्हें केचप के बजाय कई तरह की सॉस के साथ परोसा जाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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