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Hormuz Strait Route: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत आने में जहाज को कितने घंटे लगते हैं, इसमें कितना खर्च हो जाता है तेल?

Hormuz Strait Route: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट में भी आवाजाही सीमित हो गई है. आइए जानते हैं कि होर्मुज से भारत आने में एक जहाज को कितना समय लगेगा.

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  • ईरान ने चुनिंदा देशों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की दी अनुमति।
  • ईरान से भारत तक जहाज को पहुंचने में लगते हैं 2-3 दिन।
  • जहाज के आकार पर निर्भर करती है ईंधन की खपत।
  • ईंधन की लागत जहाज के संचालन खर्च का बड़ा हिस्सा।

Hormuz Strait Route: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है. ईरान ने सिर्फ कुछ चुनिंदा देशों को ही यहां से गुजरने की अनुमति दी है. इसी के साथ ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल भी लगाने जा रहा है. दरअसल होर्मुज स्ट्रेट और भारत के बीच का समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे व्यस्त और सबसे अहम शिपिंग कॉरिडोर में से एक है. आइए जानते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत तक शिप को आने में कितना समय लगता है और ईंधन के मामले में इसकी कितनी लागत आती है.

सफर का समय 

होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट तक के सफर में आमतौर पर 2 से 3 दिन लगते हैं. यह मंजिल वाले बंदरगाह और जहाज की रफ्तार पर निर्भर करता है. ज्यादातर कमर्शियल जहाज लगभग 24 से 31 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से चलते हैं. 

कांडला बंदरगाह या फिर मुंद्रा बंदरगाह जाने वाले जहाजों के लिए सफर का समय आमतौर पर लगभग 36 से 40 घंटे होता है. इससे यह सबसे छोटे रास्तों में से एक बन जाता है. वहीं अगर मुंबई बंदरगाह की बात करें तो यहां जाने वाले जहाजों को थोड़ा ज्यादा समय लगता है. यह समय 50 से 55 घंटे का होता है. इस अंतर से पता चलता है कि रास्ते और रफ्तार में छोटे-मोटे बदलाव भी सफर के कुल समय पर कैसे असर डाल सकते हैं. 

ईंधन की खपत 

इस सफर के दौरान ईंधन का इस्तेमाल जहाज के आकार और प्रकार पर काफी ज्यादा निर्भर होता है. बड़े कंटेनर जहाज जो भारी मात्रा में माल ढोते हैं हर दिन 150 से 250 टन तक की खपत कर सकते हैं. इसके उलट मध्यम आकार के जहाज या फिर तेल के टैंकर काफी ज्यादा किफायती होते हैं. ये आमतौर पर हर दिन लगभग 40 से 70 टन ईंधन का इस्तेमाल करते हैं. होर्मुज स्ट्रेट से मुंबई तक के 2 से 3 दिन के एक आम सफर के लिए एक बड़ा टैंकर लगभग 100 से 200 टन बंकर ईंधन जला सकता है. 

सफर की लागत 

ईंधन सिर्फ मात्रा की बात नहीं हैं बल्कि इसमें लागत भी एक बड़ी भूमिका निभाती है. समुद्री ईंधन जिसे अक्सर बंकर ईंधन भी कहा जाता है जहाज के ऑपरेशनल खर्चों का एक काफी बड़ा हिस्सा होता है. इस रास्ते पर चलने वाले जहाज को रोजाना $5000 से ज्यादा का खर्चा करना पड़ सकता है. इसमें ईंधन का हिस्सा ही सबसे ज्यादा होता है.

यह भी पढ़ें: इस देश के पास है दुनिया की सबसे खतरनाक नौसेना, जानें ईरान और इजरायल किस पायदान पर

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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