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अमेरिका ने न्यूक्लियर टेस्ट में जिस बम को गिराया, जान लीजिए उसकी ताकत

America Launched Nuclear Bomb Test: अमेरिका ने अगस्त 2025 में गुपचुप तरीके से B61-12 परमाणु बम का परीक्षण किया है. आइए जानें कि यह बम कितना ताकतवर होता है.

अमेरिका ने एक बेहद संवेदनशील कदम उठाया है, अगस्त 2025 में नेवादा के परीक्षण क्षेत्र में B61-12 नामक परमाणु बम का परीक्षण किया गया, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें न्यूक्लियर वारहेड नहीं था, यानी यह परीक्षण निष्क्रिय बम के साथ किया गया. इस परीक्षण को एयर फोर्स की F-35 जेट विमान द्वारा अंजाम दिया गया था और इसे गुप्त रूप से किया गया, ताकि हथियार की विश्वसनीयता और प्लेटफॉर्म क्षमताओं का जायजा लिया जा सके. इस कदम ने रणनीतिक गहराइयों में सवाल खड़े कर दिए हैं.

कितना ताकतवर था अमेरिका का परमाणु बम

अमेरिका ने अगस्त 2025 में नेवादा के Tonopah Test Range में B61-12 नामक रणनीतिक परमाणु बम का परीक्षण किया है, लेकिन यह पूरी तरह नहीं था जैसा कि आम तौर पर परमाणु परीक्षण होते हैं. Sandia National Laboratories और अमेरिकी National Nuclear Security Administration (NNSA) के मुताबिक, परीक्षण में बम निष्क्रिय था, यानि उसमें नाभिकीय विस्फोटक वारहेड नहीं था.

कैसे गिराया गया बम

परीक्षण 19 अगस्त से 21 अगस्त के बीच हुआ और इसमें F-35A लड़ाकू विमान का इस्तेमाल किया गया. इन विमानों ने B61-12 बम को अंदर ले जाकर गिराया, ताकि यह देखा जा सके कि यह बम वास्तविक मिशन की स्थिति में कैसे व्यवहार करेगा. अमेरिका के इतिहास में यह एक मील का पत्थर है. परीक्षण ने यह साबित किया कि न सिर्फ विमान खुद, बल्कि क्रू और हथियार भी भरोसेमंद हैं, यानी तकनीकी तौर पर सब कुछ मिशन-तैयार है. 

इन बमों में नहीं होता न्यूक्लियर वारहेड

दिलचस्प बात यह है कि यह टेस्ट joint test assemblies के साथ हुआ, जो असल बम जैसा दिखते हैं लेकिन उनमें कोई न्यूक्लियर वारहेड नहीं होता. साल 2024 के अंत में, NNSA ने B61-12 बम का लाइफ एक्सटेंशन प्रोग्राम पूरा किया था, जिससे इसकी सेवा आयु लगभग 20 साल बढ़ा दी गई. यह कदम अमेरिका की परमाणु रणनीति में एक नए अध्याय की ओर इशारा करता है. B61-12 को अब ऐसे लड़ाकू विमान (जैसे F-35) में भी ले जाया जा सकता है, जो स्टेल्थ खुफिया और आधुनिक युद्ध तकनीक में सक्षम हैं.

टैक्टिकल परमाणु विकल्प के रूप में प्रभावी

इससे यह हथियार टैक्टिकल परमाणु विकल्प के रूप में और अधिक प्रभावी हो सकता है, यानी जरूरी वक्त में परमाणु शक्ति का प्रयोग अधिक चुस्त-दुरुस्त ढंग से किया जा सकता है. लेकिन इस परीक्षण की प्रकृति ने कई देशों और विशेषज्ञों में चिंता पैदा कर दी है. एक ओर, यह प्रदर्शन अमेरिका की क्षमता और निश्चय को दिखाता है, तो दूसरी ओर यह परमाणु वॉरणिंग, न्यूक्लियर प्रसार और रणनीतिक अस्थिरता के सवाल भी उठाता है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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