Mouni Roy Suraj Nambiar Divorce: एक्ट्रेस मौनी रॉय ने सूरज नांबियार से लिया तलाक, जानें उन्हें कितनी एलीमनी मिलेगी?
Mouni Roy Suraj Nambiar Divorce: टीवी और फिल्म एक्ट्रेस मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार ने अलग होने की पुष्टि कर दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि मौनी रॉय को कितनी एलीमनी मिलेगी.

- मौनी रॉय और सूरज नांबियार ने शादी के चार साल बाद अलग होने की पुष्टि की।
- भारतीय कानून में एलीमनी का निर्धारण कई कारकों पर निर्भर करता है।
- अदालतें आय, वित्तीय दायित्वों और जीवन स्तर पर विचार करती हैं।
- पुनर्विवाह या आर्थिक आत्मनिर्भरता पर एलीमनी भुगतान बंद हो सकता है।
Mouni Roy Suraj Nambiar Divorce: टीवी और फिल्म एक्ट्रेस मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार के तलाक को लेकर पिछले कई दिनों से खबरें चल रही थीं. लेकिन अब शादी के लगभग 4 साल बाद इस जोड़े ने आधिकारिक तौर पर अपने अलग होने की पुष्टि कर दी है. इस घोषणा के बाद से इस बात पर चर्चा हो रही है कि भारतीय कानूनी के तहत मौनी रॉय को तलाक के बाद एलीमनी के तौर पर कितनी रकम मिल सकती है. हालांकि इस जोड़े ने सार्वजनिक तौर पर किसी भी वित्तीय समझौते का ब्योरा नहीं दिया है. आइए जानते हैं कि भारतीय कानून में एलीमनी कैसे तय की जाती है.
भारतीय कानून में एलीमनी तय करने का फॉर्मूला
भारतीय कानून के तहत ऐसा कोई एक फॉर्मूला नहीं है जो तलाक के मामले में एलीमनी को अपने आप तय कर दे. हालांकि अदालतें आमतौर पर भरण पोषण या फिर समझौते की रकम तय करते समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित मिसालों और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के प्रावधानों पर भरोसा करती हैं. अदालतें किसी भी मानक प्रतिशत को आंख मूंदकर लागू करने के बजाय अंतिम फैसला लेने से पहले कई कारकों का मूल्यांकन करती हैं.
कैसे तय होती है एलीमनी?
कई अहम फैसलों में भारतीय अदालतों ने यह पाया है कि अगर एलीमनी मासिक आधार पर दी जाती है तो पति की शुद्ध मासिक आय का लगभग 25% एक उचित पैमाना माना जा सकता है. इस रकम का उद्देश्य जीवनसाथी को शादी के दौरान रहे जीवन स्तर जैसा ही जीवन स्तर बनाए रखने में मदद करना होता है. हालांकि आय के स्तर, वित्तीय दायित्व और मामले की परिस्थितियों के आधार पर वास्तविक रकम में काफी अंतर हो सकता है.
क्या होगा एकमुश्त समझौता?
अगर दोनों पक्ष एकमुश्त भुगतान के जरिए तलाक का निपटारा करने का फैसला करते हैं तो अदालत एकमुश्त एलीमनी की व्यवस्था पर विचार कर सकती है. कई मामलों में यह रकम पति की कुल नेट वर्थ के 20% से 33% के बीच होती है. इसमें संपत्ति, निवेश और जमीन जायदाद शामिल होती है.
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अदालत की जांच पड़ताल
एलीमनी तय करते समय अदालतें दोनों व्यक्तियों के कई निजी और वित्तीय पहलुओं पर विचार करती हैं. शादी की अवधि एक बड़ी भूमिका निभाती है. क्योंकि लंबी शादियों में अक्सर एलीमनी भी ज्यादा मिलती है. अदालत शादी के दौरान अपनाए गए जीवन स्तर की भी जांच करती है और यह भी देखती है कि क्या किसी एक साथी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए अपने पेशेवर मौकों या फिर करियर में तरक्की की कुर्बानी दी है. भले ही पत्नी नौकरी करती हो लेकिन इसके बावजूद भी वह एलीमनी की हकदार हो सकती है, अगर उसकी कमाई उसके पति की कमाई से कम हो.
कब बंद हो सकती है एलीमनी?
भारतीय कानून में कुछ ऐसी भी स्थितियां बताई गई है जिनमें एलीमनी कम की जा सकती है या फिर देने से मना भी किया जा सकता है. अगर मासिक तौर पर एलीमनी पाने वाला साथी दोबारा शादी कर लेता है तो एलीमनी का भुगतान आमतौर पर तुरंत बंद हो जाता है. इसी तरह अगर दोनों साथी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और उनकी कमाई लगभग बराबर है तो अदालत एलीमनी ना देने का फैसला कर सकती है. बच्चों से जुड़े मामलों में बच्चों के पालन-पोषण का खर्च एलीमनी से अलग तय किया जाता है. साथ ही यह बच्चों की कस्टडी की व्यवस्था पर निर्भर करता है.
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