मंगल पर देखने को मिलता है नीला सूर्यास्त, जानें पृथ्वी से क्यों है यह उलट?
Mars Blue Sunset: मंगल ग्रह पर नीले रंग का सूर्यास्त होता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Mars Blue Sunset: पृथ्वी पर सूर्यास्त आमतौर पर नारंगी, लाल और गुलाबी रंग के आश्चर्यजनक रंगों से जुड़ा होता है. लेकिन मंगल ग्रह पर एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है. लाल ग्रह पर सूर्यास्त नीला दिखाई दे सकता है. इससे एक ऐसा नजारा बनता है जो पृथ्वी पर मनुष्य के अनुभव के लगभग उलट है. नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने गेल क्रेटर से इस असामान्य मंगल ग्रह के सूर्यास्त की तस्वीर खींची हैं. इसकी वजह खुद सूरज में नहीं बल्कि जिस तरह से सूरज का प्रकाश मंगल के काफी ज्यादा पतले वातावरण और उसके अंदर निलंबित महीन लोहे से भरपूर धूल के साथ संपर्क करता है.
पृथ्वी का सूर्यास्त लाल क्यों होता है?
मंगल ग्रह को समझने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पृथ्वी पर क्या होता है. दरअसल हमारा वायुमंडल नाइट्रोजन और ऑक्सीजन अणुओं से बना है. यह दृश्य प्रकाश की वेवलेंथ की तुलना में काफी छोटा है. ये अणु रेले स्कैटरिंग नाम की घटना की वजह से बनते हैं. निली रोशनी की वेवलेंथ छोटी होती है और यह लाल रोशनी की तुलना में ज्यादा तेजी से फैलती है.
दिन के समय यह बिखरी हुई निली रोशनी अलग-अलग दिशाओं से हमारी आंखों तक पहुंचती है. इससे आकाश नीला दिखाई देता है. हालांकि सूर्यास्त के समय, सूरज की रोशनी वायुमंडल के काफी लंबे हिस्से से होकर गुजरता है क्योंकि सूरज क्षितिज के करीब होता है.
सीधी धूप हम तक पहुंचने से पहले ज्यादातर नीली रोशनी बिखर जाती है. लंबी वेवलेंथ खास तौर से लाल, नारंगी और पीली इस वजह से ज्यादा प्रमुख हो जाती है. इससे परिचित लाल या नारंगी सूर्यास्त बनता है.

मंगल अलग तरह से काम करता है
मंगल ग्रह का वातावरण पृथ्वी की तुलना में लगभग 100 गुना ज्यादा पतला है. गैस अणुओं की एक मोटी परत के बजाय इसके वातावरण में भारी मात्रा में महीन धूल होती है. यह मंगल ग्रह की धूल ग्रह के असामान्य आकाश रंगों के लिए जरूरी है. कण काफी ज्यादा छोटे होते हैं, आमतौर पर आकर में एक से तीन माइक्रोन के आसपास. इसमें जरूरी मात्रा में आयरन ऑक्साइड होता है. इससे ही मंगल ग्रह की सतह पर जंग लगता है.
माई स्कैटरिंग क्या है?
यह तो बहुत है जब प्रकाश उन कणों के साथ संपर्क करता है जो प्रकाश की वेवलेंथ के बराबर या फिर उससे बड़े आकार के होते हैं. मंगल ग्रह के धूल के कण पृथ्वी के वायुमंडल में छोटे गैस अणुओं की तुलना में सूर्य के प्रकाश के साथ अलग तरह से संपर्क करते हैं. वे आगे की दिशा सहित खास दिशा में प्रकाश बिखरते हैं. यह मंगल ग्रह पर सूर्यास्त के दौरान सूरज के चारों तरफ से सामान्य रंग पैटर्न बनाने में मदद करता है.
मंगल ग्रह दिन में लाल क्यों दिखता है?
मंगल ग्रह पर दिन के समय निलंबित धूल आकाश को लाल-भूरा, गुलाबी या बटरस्कॉच जैसा रूप देती है. लोहे के कण सूरज के प्रकाश के साथ संपर्क करते हैं और अलग-अलग वेवलेंथ को बिखरते या अवशोषित करते हैं. इससे लाल और नारंगी रंग काफी ज्यादा प्रमुख हो जाते हैं.
यही एक वजह है कि अंतरिक्ष में देखने पर भी मंगल ग्रह लाल दिखाई देता है. महीन धूल लगातार निलंबित रहती है और पतले वायुमंडल के जरिए से जगह बदलती रहती है. इससे पूरे ग्रह की उपस्थिति प्रभावित होती है.

नीला सूर्यास्त कैसा दिखाई देता है?
जैसे-जैसे सूरज मंगल ग्रह के क्षितिज के करीब पहुंचता है उसकी रोशनी को धूल भरे वातावरण में काफी लंबे रास्ते से गुजरना पड़ता है. यह विस्तारित यात्रा बदल जाती है कि डूबते सूरज के चारों तरफ प्रकाश की कौन सी वेवलेंथ सबसे ज्यादा दिखाई देती है.
धूल लंबे रास्ते पर लाल और पीले रंग की ज्यादातर रोशनी को हटा देती है या फिर बिखेर देती है. इसी के साथ मिला रोशनी सूरज की दिशा के पास पर्यवेक्षक की तरफ तेजी से आगे की तरफ बिखरी हुई हो सकती है. यही वजह है कि डूबते सूरज के आसपास का क्षेत्र एक खास नीली या नीली चमक पैदा करता है.
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