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यूरोप में ही क्यों बढ़ रहा गर्मी का कहर, जानें किस महाद्वीप पर कितनी ज्यादा गर्मी?

Europe heatwave 2026: यूरोप में गर्मी का कहर बढ़ता ही जा रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि किस महाद्वीप में कितनी ज्यादा गर्मी है.

Europe heatwave 2026: जलवायु परिवर्तन दुनिया के हर कोने को प्रभावित कर रहा है. लेकिन इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं है. यूरोप सबसे तेजी से गर्म होने वाला मुख्य महाद्वीप बनकर उभरा है. यहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में काफी तेजी से बढ़ रहा है. बार-बार पड़ने वाली हीट वेव, कई इलाकों में तापमान का 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाना और लंबे समय तक भीषण गर्मी ने गर्मियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए एक बढ़ती हुई चुनौती बना दिया है.  लेकिन आपको बता दें कि यूरोप अकेला नहीं है. महाद्वीपों के बीच तापमान बढ़ने की रफ्तार और उसके नतीजों में काफी अंतर है.

यूरोप इतनी तेजी से क्यों गर्म हो रहा है?

1990 के दशक के मध्य से यूरोप का औसत तापमान हर दशक में लगभग 0.56 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है. इससे यह सबसे तेजी से गर्म होने वाला मुख्य महाद्वीप बन गया है. एक बड़ी वजह आर्कटिक के साथ यूरोप का भौगोलिक जुड़ाव है. आर्किटेक्ट काफी तेजी से गर्म हो रहा है और बर्फ के पिघलने से पृथ्वी का एल्बिडो प्रभाव कम हो जाता है. 

आमतौर पर बर्फ और हिमपात सूर्य की रोशनी के एक बड़े हिस्से को वापस अंतरिक्ष में रिफ्लेक्ट कर देते हैं. जब वे गायब हो जाते हैं तो गहरे रंग की जमीन और पानी ज्यादा सौर ऊर्जा सोखते हैं. इससे और ज्यादा गर्मी बढ़ती है. आल्प्स और दूसरे पहाड़ी इलाकों में भी बर्फ कम हो रही है. इससे भी इसी तरह की प्रतिक्रिया पैदा होती है और महाद्वीप के कुछ हिस्सों में गर्मी और बढ़ सकती है. 


यूरोप में ही क्यों बढ़ रहा गर्मी का कहर, जानें किस महाद्वीप पर कितनी ज्यादा गर्मी?

हीट डोम हालात को और खराब कर रहे हैं 

यूरोप में गर्मियों के दौरान ज्यादा तापमान की एक और बड़ी वजह हीट डोम का बनना है. ये उच्च वायुमंडलीय दबाव वाले ऐसे क्षेत्र होते हैं जो गर्म हवा को पृथ्वी की सतह के पास ही रोक कर रखते हैं. 

यूरोप में कुछ हीट वेव के दौरान उत्तरी अफ्रीका और सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म हवा उत्तर की तरफ बढ़ती है. तब उच्च दबाव वाला सिस्टम एक ढक्कन की तरह काम करता है. इससे गर्म हवा आसानी से बाहर नहीं निकल पाती. यही वजह है कि रात में तापमान में काफी गिरावट आने के बाद कई दिनों तक तापमान असाधारण रूप से ज्यादा बना रहता है.

अलग-अलग महाद्वीप कितनी तेजी से गर्म हो रहे हैं? 

पूरी दुनिया में गर्मी बढ़ने की रफ्तार अलग-अलग है. दिए गए आंकड़ों के आधार पर हर दशक में तापमान में लगभग इतनी बढ़ोतरी हो रही है:

  • आर्कटिक क्षेत्र: 0.75 डिग्री सेल्सियस
  • यूरोप: 0.56 डिग्री सेल्सियस
  • एशिया: 0.46 डिग्री सेल्सियस
  • उत्तरी अमेरिका: 0.42 डिग्री सेल्सियस
  • अफ्रीका: 0.36 डिग्री सेल्सियस
  • दक्षिण अमेरिका: 0.27 डिग्री सेल्सियस
  • ऑस्ट्रेलिया: 0.23 डिग्री सेल्सियस 

इस वजह से आर्कटिक सबसे ज्यादा तेजी से गर्म होने वाला क्षेत्र बना हुआ है. बाकी दिए गए आंकड़ों में मुख्य महाद्वीपों में यूरोप में गर्मी बढ़ने की दर सबसे ज्यादा है. 


यूरोप में ही क्यों बढ़ रहा गर्मी का कहर, जानें किस महाद्वीप पर कितनी ज्यादा गर्मी?

एशिया को गर्मी से अलग तरह का खतरा 

एशिया में गर्मी बढ़ने की दर का अनुमान हर दशक में लगभग 0.46 डिग्री सेल्सियस है. इस महाद्वीप की काफी ज्यादा आबादी की वजह से भीषण गर्मी का खतरा और भी बढ़ जाता है. तेजी से शहरीकरण, ज्यादा आबादी घनत्व और कंक्रीट से बने शहरों के विस्तार से अर्बन हीट आईलैंड बन सकते हैं. यहां तापमान आसपास के इलाकों की तुलना में काफी ज्यादा रहता है. इस वजह से दक्षिण और पूर्वी एशिया के देश लंबे समय तक चलने वाली हीट वेव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते जा रहे हैं. 

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उत्तरी अमेरिका के हाल

उत्तरी अमेरिका में गर्मी बढ़ने की दर का अनुमान हर दशक में लगभग 0.42 डिग्री सेल्सियस है. तापमान बढ़ने से कोई क्षेत्र में भीषण गर्मी का दौर बार-बार देखा जा रहा है. ज्यादा तापमान से पेड़ पौधे सूख सकते हैं और जंगल की आग का खतरा बढ़ सकता है. कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ हिस्सों में जंगल की आग का गंभीर दौर देखा गया है. इससे पता चलता है कि गर्मी कैसे पर्यावरण पर कई तरह के असर डाल सकती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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