LPG Consumed India: गुजरात पहुंच चुकी है 20 हजार टन एलपीजी, जानिए भारत में इससे कितने दिन चल जाएगा काम?
LPG Consumed India: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच 20 हजार टन एलपीजी लेकर 'सिमी' जहाज गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच गया है. आइए जानें कि इतनी गैस की खपत भारत में कितने दिनों में हो जाएगी.

- देश की वार्षिक एलपीजी मांग 3.1-3.3 करोड़ टन, 45 दिन का स्टॉक.
LPG Consumed India: ग्लोबल लेवल पर चल रही उथल-पुथल के बीच भारत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन को लेकर बनी चिंताओं के बीच एलपीजी से लदा एक बड़ा समुद्री टैंकर सुरक्षित भारत पहुंच गया है. इस खेप के आने से भारतीय ऊर्जा बाजार और सप्लाई को थोड़ी मजबूती जरूर मिलेगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ता देश भारत में इतनी बड़ी मात्रा में आई गैस आखिर कितने समय तक टिक पाएगी? आइए आंकड़ों के जरिए देश की इस भारी-भरकम गैस खपत की हकीकत को गहराई से समझते हैं.
गुजरात सुरक्षित पहुंचा गैस टैंकर
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच 20 हजार टन एलपीजी लेकर 'सिमी' नाम का एक विशाल कैरियर गुजरात के कांडला में मौजूद दीनदयाल पोर्ट पर सुरक्षित रूप से पहुंच चुका है. मौजूदा सुरक्षा निगरानी वाले ऑपरेशन्स के तहत होर्मुज स्ट्रेट जैसी खतरनाक जगह को पार करने वाला 'सिमी' 11वां एलपीजी टैंकर बन गया है. इस मालवाहक जहाज ने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट के मुश्किल रास्ते को पार किया था. इस टैंकर की सुरक्षित यात्रा को पूरा कराने में जहाज पर सवार कुल 21 क्रू सदस्यों की बड़ी भूमिका रही, जिनमें 8 यूक्रेनी और 13 फिलिपीनी नागरिक शामिल थे.
कितने दिन में खत्म होगी 20 हजार टन एलपीजी?
भले ही 20 हजार टन एलपीजी सुनने में बहुत बड़ी मात्रा लगती है, लेकिन भारत जैसे विशाल देश के लिए यह महज कुछ घंटों की ही खुराक है. आंकड़ों को देखें तो इतनी गैस से हमारे देश में सिर्फ एक तिहाई दिन यानी महज 8 घंटे ही काम चल पाएगा. इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत इस समय पूरी दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश बन चुका है. यहां आम घरों से लेकर कमर्शियल सेक्टर्स तक गैस की डिमांड इतनी ज्यादा है कि हजारों टन की यह बड़ी खेप भी एक दिन पूरा नहीं निकाल सकती है.
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दैनिक एलपीजी खपत का आंकड़ा
भारत की एलपीजी मांग को गहराई से समझें तो यहां सामान्य दिनों में हर रोज लगभग 55,000 से 60,000 मीट्रिक टन एलपीजी की भारी-भरकम खपत होती है. कई बार पीक सीजन या त्योहारों के दौरान देश में रोजाना गैस की कुल डिमांड बढ़कर 80,000 से 90,000 टन प्रतिदिन तक भी पहुंच जाती है. देश की इस विशाल जरूरत को पूरा करने के लिए घरेलू रिफाइनरियां लगातार काम कर रही हैं. इंडियन ऑयल और बीपीसीएल जैसी दिग्गज सरकारी कंपनियां देश की कुल एलपीजी मांग का लगभग 40% से 60% हिस्सा देश के भीतर ही उत्पादित कर लेती हैं.
सालाना मांग और भंडार
भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर साल बहुत बड़े पैमाने पर एलपीजी का इंतजाम करना पड़ता है. देश की कुल वार्षिक एलपीजी मांग लगभग 3.1 करोड़ टन से लेकर 3.3 करोड़ टन तक पहुंच चुकी है. इस भारी डिमांड को संभालने के लिए भारत के पास कुल एलपीजी स्टोरेज क्षमता लगभग 1.6 मिलियन टन यानी 16 लाख टन की है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरी स्टोरेज व्यवस्था के दम पर भारत के पास हमेशा लगभग 45 दिनों का रोलिंग स्टॉक यानी एडवांस एलपीजी इन्वेंट्री का बैकअप मौजूद रहता है.

























