Fuel Price Increased: तो इस तरह महंगाई से मिल सकती है राहत, अगर आज बंद हो जाएं ये टैक्स तो कौड़ियों के भाव बिकेंगे डीजल-पेट्रोल
पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले भारी टैक्स के कारण आम जनता महंगाई से परेशान है. देश में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. आइए जानें कि कौन से टैक्स हटा देने से तेल की कीमतें एकदम गिर सकती हैं.

- डीलर कमीशन, कच्चे तेल की कीमत भी अंतिम दाम तय करते हैं.
Fuel Price Increased: देश में पेट्रोल और डीजल के दाम एक बार फिर आसमान छू रहे हैं, जिससे हर आम और खास आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है. तेल कंपनियों द्वारा लगातार की जा रही बढ़ोतरी ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ईंधन के लिए आप इतनी भारी कीमत चुका रहे हैं, उसकी असल कीमत क्या है? अगर ईंधन पर लगने वाले सरकारी टैक्स के मकड़जाल को हटा दिया जाए, तो आज ही पेट्रोल और डीजल बेहद सस्ते दामों पर मिल सकते हैं. आइए जानते हैं कि टैक्स का यह खेल कैसे आपकी जेब खाली कर रहा है.
तेल कंपनियों ने दिया नया झटका
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. मंगलवार को तेल कंपनियों ने एक बार फिर आम जनता को झटका देते हुए पेट्रोल और डीजल के दामों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है. एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिसने महंगाई को और हवा दे दी है. इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं डीजल की दरें भी 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुकी हैं.
कौन से टैक्स हटाने से मिलेगी राहत?
क्या आप जानते हैं कि जब आप एक लीटर पेट्रोल या डीजल खरीदते हैं, तो उसका आधा हिस्सा सिर्फ टैक्स के रूप में सरकार के पास जाता है? पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों की सबसे बड़ी वजह इस पर लगने वाला दोहरा टैक्स है. अगर आज ही केंद्र और राज्य सरकारें इन टैक्सों को पूरी तरह से बंद कर दें, तो पेट्रोल-डीजल कौड़ियों के भाव यानी अपनी असल कीमत के आसपास बिकने लगेंगे. वर्तमान में आम जनता को ईंधन की कुल खुदरा कीमत का 50 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा सिर्फ टैक्स और उपकर के रूप में चुकाना पड़ता है.
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केंद्र की एक्साइज ड्यूटी
ईंधन की कीमतों को बढ़ाने में केंद्र सरकार के टैक्स की बड़ी भूमिका होती है. केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर के हिसाब से एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती है. इस टैक्स स्ट्रक्चर में केवल बुनियादी उत्पाद शुल्क ही शामिल नहीं होता, बल्कि इसके साथ कृषि बुनियादी ढांचा विकास उपकर (Cess) और अन्य शुल्क भी जोड़े जाते हैं. यह टैक्स हर लीटर पर फिक्स होता है, जिससे तेल की मूल कीमत काफी ज्यादा बढ़ जाती है और आम जनता तक पहुंचते-पहुंचते यह बहुत महंगा हो जाता है.
राज्यों का वैट नेटवर्क
केंद्र सरकार के बाद बारी आती है राज्य सरकारों की, जो अपनी तरफ से ईंधन पर वैट (VAT) या बिक्री कर वसूलती हैं. राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल के आधार मूल्य (Base Price) और केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए उत्पाद शुल्क, दोनों को आपस में मिलाकर उस कुल रकम पर अपने राज्य के हिसाब से वैट लगाती हैं. यही कारण है कि देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं, क्योंकि हर राज्य की वैट दरें एक-दूसरे से काफी भिन्न होती हैं.
डीलर कमीशन का गणित
कच्चे तेल को साफ करने और टैक्स लगाने के बाद आखिरी कड़ाके का खर्च डीलर का कमीशन होता है. डीलर कमीशन वह मुनाफा है जो पेट्रोल पंप मालिकों को ईंधन बेचने पर मिलता है. यह कमीशन भी प्रति लीटर के हिसाब से तय होता है और अंतिम खुदरा मूल्य में जोड़ा जाता है. इन सभी टैक्सों और कमीशन के अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और तेल को रिफाइन करने में आने वाली लागत (Refining Cost) मिलकर पेट्रोल-डीजल का अंतिम दाम तय करते हैं.
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