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क्या मिलिट्री के डॉग को रिटायर होने के बाद मिलती है पेंशन, जानें क्या है नियम?

Army Dogs: सेना के कुत्तों को रिटायर होने के बाद पेंशन मिलती है या नहीं अक्सर ही लोग यह सोचते हैं. आइए जानते हैं क्या है इसका जवाब.

Army Dogs: खास तौर से प्रशिक्षित कुत्ते सैनिक विस्फोटकों और खदानों का पता लगाने से लेकर ट्रैकिंग, सुरक्षा और बचाव अभियान तक के कामों में बड़ी भूमिका निभाते हैं. लेकिन मानव सैनिकों के उलट उन्हें अपनी सेवा पूरी करने के बाद मासिक वेतन या फिर पेंशन नहीं मिलती है. इसके बजाय सेना सेवानिवृत्ति के बाद उनकी देखभाल की जिम्मेदारी लेती है और उनके भोजन, रहने और चिकित्सा उपचार की व्यवस्था करती है. 

क्या सेना के कुत्तों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन मिलती है?

भारतीय सेना के कुत्तों को सेवानिवृत्ति के बाद नकद पेंशन या फिर मासिक वेतन नहीं मिलता. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी सेवा समर्थन के बिना समाप्त हो जाती है. सेवानिवृत्ति के बाद सरकार और सेना उनके निरंतर कल्याण की व्यवस्था करती है. भोजन और चिकित्सा देखभाल सहित उनके सेवा के बाद के खर्च सरकार समर्थित सुविधाओं के जरिए से कवर की जाती है. इससे सेवानिवृत्त कुत्ते सैनिकों को अपना बाकी जीवन सुरक्षित और आरामदायक वातावरण में बिताने की अनुमति मिलती है. 

सेवानिवृत्त सेना कुत्ते कहां रहते हैं?

अपनी सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत कुत्तों को समर्पित पुनर्वास सुविधाओं में ले जाया जाता है. ऐसी ही एक सुविधा उत्तर प्रदेश के मेरठ में रिमाउंट वेटरनरी कॉर्प्स सेंटर और कॉलेज में वृद्ध आश्रम है. इन कुत्तों को हेमपुर, उत्तराखंड में एक सुविधा केंद्र में भी रखा जा सकता है. यह सुविधा खासतौर से उन कुत्तों की देखभाल के लिए डिजाइन की गई है जिन्होंने अपने सैन्य कर्तव्यों को पूरा कर लिया है और अब सक्रिय सेवा के लिए उपयुक्त नहीं है.

उनके भोजन और चिकित्सा व्यय का क्या होता है?

सरकार इन सेना कुत्तों की देखभाल के लिए धन मुहैया कराती है. पुनर्वास सुविधाओं में उनके भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और दूसरी बुनियादी जरूरत का ध्यान रखा जाता है. इस वजह से कुत्तों को अपना सैन्य करियर पूरा करने के बाद खुद की सुरक्षा के लिए नहीं छोड़ा जाता. यह व्यवस्था सेवा के वर्षों के दौरान इन जानवरों की भूमिका पहचानती है और यह पक्का करती है की सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें देखभाल मिले. 


क्या मिलिट्री के डॉग को रिटायर होने के बाद मिलती है पेंशन, जानें क्या है नियम?

क्या नागरिक इन कुत्तों को अपना सकते हैं?

लागू सत्यापन प्रक्रिया के अधीन सेवानिवृत्त सेना कुत्तों को जनता के सदस्यों, स्कूलों और कुत्ते प्रेमियों को दिया जा सकता है. इच्छुक व्यक्ति या संगठन को संबंधित आरवीसी केंद्र को एक लिखित आवेदन जमा करना होगा. आवेदक के सत्यापन और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सेवानिवृत्त कुत्ते को गोद लेने के लिए सौंपा जा सकता है.  हालांकि एक बार गोद लेने के बाद नया मलिक कुत्ते के भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और दूसरे खर्चों के लिए जिम्मेदार हो जाता है. 

सेना के कुत्तों को कैसे प्रशिक्षित किया जाता है?

प्रशिक्षण तब शुरू होता है जब कुत्ते अभी भी छोटे होते हैं. पिल्ले आमतौर पर लगभग 6 महीने की उम्र में खास प्रशिक्षण शुरू करते हैं. प्रशिक्षण लगभग 6 से 9 महीने तक चलता है. उनकी क्षमता और जरूरत के आधार पर कुत्तों को खदान का पता लगाने, विस्फोटक का पता लगाने, ट्रैकिंग, रखवाली और बचाव कार्य सहित खास भूमिका के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. 

उनका प्रशिक्षण काफी कठोर है क्योंकि कुत्तों को अंत में ऐसे वातावरण में तैनात किया जा सकता है जहां छिपे हुए विस्फोटक का पता लगाना या फिर किसी व्यक्ति का पता लगाना जीवन और मृत्यु का मामला हो सकता है.

सेना के कुत्ते कितने समय तक सेवा करते हैं?

सैन्य कुत्ते आमतौर पर लगभग 8 से 9 साल तक सेवा करते हैं. हालांकि सेवानिवृत्ति उनकी शारीरिक फिटनेस और अपने कर्तव्य को जारी रखने की क्षमता पर निर्भर होती है. एक बार जब कोई कुत्ता मुश्किल सैन्य काम को करने में शारीरिक रूप से सक्षम नहीं रह जाता तो उसे सेवानिवृत्त कर दिया जाता है. साथ ही सेवा के बाद की देखभाल में उसे ले जाया जाता है या फिर लागू नियम के तहत गोद लेने के लिए उपलब्ध कराया जाता है. 

क्या सेना के कुत्तों को रैंक और पुरस्कार मिलते हैं?

सेना के कुत्तों को सैन्य इकाइयों के जरूरी सदस्य के रूप में ही माना जाता है और उन्हें उनके करियर के दौरान सेवा संख्या और रैंक सौंपी जाती है. असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुत्तों को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ प्रशस्ति कार्ड प्राप्त हो सकता है. सेना के कुछ कुत्तों को उनकी सेवा और बलिदान के लिए मरणोपरांत वीरता सम्मान भी मिला है.

यह भी पढ़ेंः पृथ्वी के अंदर कितनी गहराई तक पहुंच पाया इंसान, कहां सबसे गहरा प्वाइंट?

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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