AI को मजबूत बनाने वाले 100 लोगों में 10 भारतीय, जानें इनके बारे में सबकुछ
टाइम की TIME100 AI 2026 लिस्ट में 10 भारतीय/भारतीय मूल के नाम शामिल हुए हैं. ये लोग एंटरप्राइज एआई, हार्डवेयर, स्वास्थ्य, अदालत जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में एआई को आगे बढ़ा रहे हैं.

टाइम मैगजीन ने अपनी सालाना TIME100 AI 2026 लिस्ट जारी की है, जिसमें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली एआई नेताओं में 10 भारतीय या भारतीय मूल के नाम शामिल हैं. ये लोग सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हार्डवेयर, स्वास्थ्य, अदालत, भाषाई एआई, नीति और कानूनी जवाबदेही जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. आइए इन सभी के बारे में आपको विस्तार से बताएं.
अरविंद कृष्णा
अरविंद कृष्णा आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ हैं, जिन्होंने कंपनी को बड़े जनरल मॉडल की दौड़ के बजाय छोटे, स्पेशलाइज्ड और एंटरप्राइज-फ्रेंडली एआई मॉडल पर फोकस करने की दिशा में मोड़ा है. कृष्णा का मानना है कि एआई का असली आर्थिक फायदा सिर्फ सबसे बड़े मॉडल से नहीं, बल्कि बिजनेस समस्याओं को हल करने वाले टार्गेटेड सिस्टम से आएगा, और यही रणनीति आईबीएम को ग्लोबल एंटरप्राइज मार्केट में अलग बना रही है.
संजय मेहरोत्रा
माइक्रोन टेक्नोलॉजी के चेयरमैन, प्रेसिडेंट और सीईओ संजय मेहरोत्रा एआई के हार्डवेयर लेयर को मजबूत करने वाले अहम चेहरों में एक हैं. खासकर हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स और एडवांस्ड स्टोरेज आर्किटेक्चर के जरिए. एआई वर्कलोड के तेजी से बढ़ने के बीच मेहरोत्रा का नेतृत्व इस बात को सुनिश्चित कर रहा है कि चिप्स, मेमोरी और स्टोरेज सिस्टम इतने तेज और कुशल हों कि बड़े एआई मॉडल रियल-टाइम में चल सकें.
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रवि कुमार एस
कॉग्निजेंट के सीईओ रवि कुमार एस को TIME100 AI 2026 में दूसरे साल शामिल किया गया है, जहां उन्हें एंटरप्राइज एआई और भविष्य के वर्कफोर्स मॉडल पर उनके विजन के लिए सराहा गया है. एक पूर्व न्यूक्लियर साइंटिस्ट के तौर पर रवि कुमार का नजरिया साफ है कि एआई पूरे प्रोफेशन को खत्म नहीं करेगा, बल्कि लोगों के काम करने के तरीके और टास्क मिक्स को बदलेगा, जिसके लिए स्किल अपग्रेड और रिस्किलिंग बहुत जरूरी है.
विवेक राघवन
विवेक राघवन, जिन्होंने पहले एडआधार के तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर में अहम भूमिका निभाई, अब सरवन एआई के सह-संस्थापक के तौर पर भारत की भाषाई विविधता के लिए ओपन-सोर्स/ओपन-वेट फाउंडेशन मॉडल और वॉइस एआई टूल्स बना रहे हैं. सरवन ने 30B और 105B पैरामीटर वाले मल्टीलिंगुअल मॉडल लॉन्च किए हैं, डॉक्यूमेंट एक्सट्रैक्शन के लिए Sarvam Vision जैसे मॉडल तैयार किए हैं, और एनवीडिया समेत निवेशकों से करीब 75 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाकर भारत को एआई में तकनीकी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं.

उत्कर्ष सक्सेना
उत्कर्ष सक्सेना पहले सुप्रीम कोर्ट में लॉ क्लर्क रह चुके हैं. उन्होंने अदालत एआई की शुरुआत की, जो भारतीय भाषाओं, बोलियों और कानूनी शब्दावली पर ट्रेन स्पीच-टू-टेक्स्ट सिस्टम के जरिए कोर्ट रिकॉर्डिंग और ट्रांसक्रिप्शन को आसान बना रहा है. उनकी तकनीक अब 11 राज्यों में 6000 से ज्यादा जजों तक पहुंच चुकी है. केरल ने गवाह गवाही रिकॉर्डिंग के लिए इसे अनिवार्य किया है, सिक्किम में पेपरलेस फाइलिंग में इस्तेमाल हो रहा है, और आंध्र प्रदेश ने अक्टूबर 2026 से डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी लेवल पर पूरे राज्य में अपनाने का ऐलान किया है.
अनिमा आनंदकुमार
आईआईटी मद्रास की पूर्व छात्रा और कैलटेक की प्रोफेसर अनिमा आनंदकुमार एआई को साइंस और रियल-वर्ल्ड फिजिकल सिस्टम से जोड़ने वाले काम के लिए जानी जाती हैं. उनकी खासियत हाई-रिजॉल्यूशन वेदर फोरकास्टिंग और फिजिकल मॉडलिंग में देखी जाती है. उनका नया वेंचर Accelerated Understanding इस बात पर केंद्रित है कि एआई की मदद से भौतिक दुनिया को बेहतर समझा और मॉडल किया जाए, जिससे क्लाइमेट स्टडी से लेकर इंजीनियरिंग तक के क्षेत्रों में सटीक भविष्यवाणी संभव हो.
सुची सरिया
सुची सरिया Bayesian Health की संस्थापक-सीईओ और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. उन्होंने सेप्सिस जैसे खतरनाक संक्रमण के जोखिम वाले मरीजों की पहचान करने वाला एआई सिस्टम तैयार किया है. मई 2026 में इस सिस्टम को एफडीए क्लीयरेंस मिला है, और जॉन्स हॉपकिंस के मुताबिक इसके इस्तेमाल से मौतों में करीब 20% तक की कमी देखी गई है, जो हेल्थकेयर में एआई के असर को साबित करता है.
अरविंद रमन
अरविंद रमन अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (NIST) और U.S. CAISI (Center for AI Standards and Innovation) में अहम भूमिका में हैं. वे एआई सिस्टम की टेस्टिंग, असेसमेंट और रिस्क इवैल्यूएशन पर काम कर रहे हैं. उनका काम इस बात को तय करने से जुड़ा है कि एडवांस्ड एआई सिस्टम को कैसे सुरक्षित तरीके से टेस्ट किया जाए, किन मानकों पर खड़ा होना चाहिए और किन जोखिमों को पहले से पहचाना जाए.
सनी गांधी
सनी गांधी Encode की को-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. उनका फोकस एआई सेफ्टी, ट्रांसपेरेंसी और ह्यूमन ओवरसाइट को मजबूत करने पर है, खासकर जब एआई संवेदनशील क्षेत्रों में इस्तेमाल हो रहा हो. उनका काम नीति संवाद, युवा भागीदारी और जिम्मेदार एआई गवर्नेंस को आगे बढ़ाने से जुड़ा है, ताकि तकनीक के तेज विकास के साथ-साथ सुरक्षा और जवाबदेही के नियम भी मजबूत रहें.
मीताली जैन
मीताली जैन Tech Justice Law Project की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं, जो एआई सिस्टम और चैटबॉट्स से जुड़े नुकसान के मामलों में कानूनी कार्रवाई और वकालत करती हैं. उनका काम इस बड़े सवाल को उजागर करता है कि जब एआई सिस्टम से असली दुनिया में नुकसान होता है तो टेक कंपनियों को कैसे जिम्मेदार ठहराया जाए. वे कानूनी ढांचे को इस हकीकत के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रही हैं.
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