बॉलीवुड में नेपोटिज्म का दर्द झेल चुकी हैं प्रियंका चोपड़ा, कहा- कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के बाद फिल्म से निकाला गया
प्रियंका चोपड़ा ने अपने करियर की शुरुआत में काफी स्ट्रगल किया है. हाल ही में एक्ट्रेस ने बताया एक बार उन्हें एक फिल्म साइन करने और कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद अचानक निकाल दिया गया था.

प्रियंका चोपड़ा ने 2000 के दशक की शुरुआत में हिंदी सिनेमा में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई. लेकिन अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्हें कई मुश्किलों और बुरे एक्सपीरियंस का सामना करना पड़ा. कई बार ऐसा हुआ कि साइन करने के बाद भी उन्हें फिल्मों से बाहर कर दिया गया, क्योंकि मेकर्स या हीरो किसी दूसरी एक्ट्रेस को लेना चाहते थे.
एक किस्से को याद करते हुए प्रियंका ने बताया कि एक हिंदी फिल्म में कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के बावजूद उन्हें हटा दिया गया. उनके मुताबिक, बाद में उनके एक मेल को-स्टार ने आकर बताया कि डायरेक्टर से उन्हें कास्ट करने में गलती हो गई थी, क्योंकि वह रोल पहले से किसी और एक्ट्रेस के लिए सोचा गया था. कानूनी रूप से फिल्म से जुड़ी होने के बावजूद वह उस फैसले के खिलाफ कुछ नहीं कर पाईं.
'सलाम-ए-इश्क' गलती से हुई थी ऑफर
हाल ही में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में बातचीत के दौरान प्रियंका ने यह किस्सा बताया. उन्होंने बताया कि जब वह 2007 की फिल्म 'सलाम-ए-इश्क' की शूटिंग कर रही थीं, तभी उसी फिल्म से जुड़े एक्टर उनसे मिलने आए. उन्हें लगा कि वो शूट से पहले सपोर्ट देने आए हैं, लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'डायरेक्टर ने आपको ये फिल्म गलती से दे दी थी.'
प्रियंका चोपड़ा ने आगे बताया कि एक्टर ने उनसे कहा, 'यह उनकी गलती थी. यह फिल्म तो हमेशा से किसी और लड़की को ही मिलनी थी, लेकिन हम आगे कभी साथ में दूसरी फिल्म करेंगे, आप चिंता मत कीजिए. मैं बस आपको खुद बताना चाहता था. मैं उस वक्त 22 साल की थीं. वो फिल्म मेरे और मेरे करियर के लिए उस वक्त बहुत जरूरी थी, लेकिन मेरी आंखों के सामने मेरा सपना टूट रहा था और मैं कुछ नहीं कर पाई. बस सवाल ये था कि कॉन्ट्रैक्ट साइन करके भी ऐसा क्यों हुआ.’
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नेपोटिज्म पर की बात
प्रियंका ने 2003 में फिल्म 'अंदाज' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था, जिसमें उनके साथ अक्षय कुमार और लारा दत्ता नजर आए थे. उस दौर में फिल्मी परिवारों से आने वाले कई नए चेहरे भी इंडस्ट्री में कदम रख रहे थे. नेपोटिज्म पर बात करते हुए प्रियंका ने कहा कि उस समय वह इस शब्द का मतलब भी नहीं समझती थीं. 'मुझे बस इतना पता था कि हर माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना चाहते हैं, जैसे मेरे माता-पिता ने मेरे लिए किया. लेकिन बाद में मुझे इसकी सीमाएं समझ में आने लगीं.'
उन्होंने कहा, 'कभी मुझे लीड रोल में कास्ट किया जाता और अचानक सेकेंड लीड बना दिया जाता. तब समझ आया कि इंडस्ट्री की अपनी राजनीति होती है. कोई भी फिल्म सिर्फ मेरे लिए नहीं बन रही थी. मैं किसी की रिश्तेदार नहीं थी, न ही बचपन से किसी बड़े फिल्मी घराने से जुड़ी थी.' हालांकि सराहना ने उन्हें हिम्मत दी. उन्होंने तय किया कि वह अलग-अलग तरह के किरदार तलाशेंगी और खुद को साबित करती रहेंगी.
Source: IOCL
























