लखीमपुर खीरी हिंसा: आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में ढील से SC का इनकार, क्या बोले प्रशांत भूषण
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. किसानों के वकील प्रशांत भूषण ने कार्यवाही की तेज रफ्तार को लेकर सवाल उठाए.

लखीमपुर खीरी (2021) हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 अगस्त) को इनकार कर दिया. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जमानत की शर्तों में ढील देने और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अपने पैतृक स्थान पर जाने की अनुमति मांगी गई थी.
आशीष मिश्रा के वकील ने कहा कि मौजूदा पाबंदियों के कारण वह अपनी बेटियों के जन्मदिन के जश्न सहित पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं. CJI ने कहा कि इस मामले पर विचार करने का कोई आधार नहीं है, इसलिए अर्जी खारिज की जाती है. सुनवाई के दौरान पीड़ित किसानों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने ट्रायल के तरीके पर चिंता जताई.
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों के वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि कार्यवाही की तेज रफ्तार के चलते कई अहम गवाहों जिनमें चश्मदीद गवाह भी शामिल हैं, उनको छोड़ दिया जा रहा है. एक समस्या यह भी है कि ट्रायल किस तरह से चल रहा है. उन्होंने कहा कि मुकदमे की तेजी और जल्दबाजी की वजह से कई अहम गवाहों को छोड़ दिया गया है. उन्हें अगले ही दिन के लिए बुलाया जाता है और अगर वे अगले दिन नहीं आते हैं, तो उन्हें छोड़ दिया जाता है.
प्रशांत भूषण ने क्या बताया
प्रशांत भूषण ने कहा कि वो इन चीजों को लेकर अर्जी दाखिल करना चाहते हैं. इस पर CJI ने कहा कि ऐसी शिकायतें सबसे पहले ट्रायल कोर्ट के सामने उठाई जानी चाहिए. बेंच ने कहा कि आपको सबसे पहले खुद ट्रायल कोर्ट के पास जाना चाहिए और बताना चाहिए कि ये गवाह अहम हैं. भूषण ने ये भी कहा कि कुछ दस्तावेजों का अनुवाद किया जा रहा है और उन्होंने एक अलग मामले का जिक्र किया जिसमें एक व्यक्ति पर कथित तौर पर गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करने के लिए चार्जशीट दाखिल की गई थी.
भूषण ने कहा कि जिस गवाह को कथित तौर पर डराया-धमकाया गया था, उसे बाद में गवाहों की सूची से हटा दिया गया था और अब उसने ट्रायल में शामिल होने की अनुमति के लिए अर्ज़ी दी है. बेंच ने कहा कि वह उस अर्जी पर विचार करेगी. बेंच ने कहा कि आप बता सकते हैं कि वे गवाह क्यों जरूरी हैं और वे किन मुद्दों से जुड़े हैं. जब भूषण ने बताया कि उनमें से कुछ चश्मदीद गवाह थे तो CJI ने कहा कि इससे ट्रायल कोर्ट का रुख करना और भी जरूरी हो जाता है.
क्या है पूरा मामला
3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ किसानों ने प्रदर्शन किया था और इस दौरान 4 किसानों समेत 8 लोगों की मौत हो गई थी. एक SUV ने चार किसानों को कुचल दिया था. इसके बाद नाराज किसानों ने कथित तौर पर 1 ड्राइवर और 2 BJP कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी.
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