एक्टिंग के बचपन से ही शौकीन थे परेश रावल, 9 साल की उम्र में बिना टिकट थिएटर में घुस जाते थे एक्टर
Paresh Rawal: बचपन में थिएटर में बिना टिकट एंट्री मारने वाले परेश रावल आज इंडियन सिनेमा के सबसे आइकॉनिक स्टार्स में गिने जाते हैं. विलेन से बाबूराव तक, उनके किरदार आज भी फैंस के फेवरेट हैं.

एक्टर परेश रावल आज इंडियन सिनेमा का ऐसा नाम हैं, जिन्होंने हर तरह के किरदार में अपनी अलग पहचान बनाई. कॉमेडी हो, विलेन का रोल हो या गंभीर किरदार, उन्होंने हर बार दर्शकों को अपना दीवाना बनाया. लेकिन उनके एक्टिंग के इस सफर की शुरुआत एक छोटे से थिएटर से हुई थी, जहां उनका जुनून बचपन से ही साफ नजर आने लगा था. आइए जानते हैं उनके सफर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.
परेश रावल आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. उनके बर्थडे के मौके पर उनकी लाइफ के इंटरेस्टिंग किस्से के बारे में बता रहे हैं. अभिनेता बचपन से ही एक्टिंग के शौकीन थे और आलम ये था कि वो थियेटर में बिना टिकट लिए ही घुस जाते थे. लेकिन आज उनकी फिल्मों के लिए करोड़ों लोग टिकट खरीदने के लिए आगे रहते हैं और उनकी काम की सराहना करते हैं. परेश रावल ने आज अपनी बेहतरीन एक्टिंग, कॉमिक टाइमिंग और गंभीर किरदारों से करोड़ों दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है.
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परेश रावल का जन्म 30 मई 1955 को मुंबई में एक गुजराती परिवार में हुआ था. उनका बचपन मुंबई के पार्ले ईस्ट इलाके में बीता, जहां पास ही एक ओपन थिएटर ग्राउंड हुआ करता था. वहीं से उनके अंदर एक्टिंग के प्रति रुचि पैदा हुई.
9 साल की उम्र में बिना टिकट देखते थे नाटक
बचपन में वो पढ़ाई के साथ-साथ बेहद शरारती भी थे, लेकिन उनका सबसे बड़ा जुनून थिएटर था. बताया जाता है कि सिर्फ 9 साल की उम्र में वो बिना टिकट नाटक देखने थिएटर में घुस जाया करते थे. कई बार उन्हें पकड़कर बाहर निकाल दिया जाता था, लेकिन उनकी दीवानगी कभी कम नहीं हुई.
एक बार जब वह बार-बार थिएटर में घुसने की कोशिश करते पकड़े गए तो थिएटर के लोगों ने उनके जुनून को समझा और उन्हें प्ले देखने की परमिशन दी. धीरे-धीरे उन्हें वहां छोटे-छोटे रोल भी मिलने लगे. यही उनके करियर का पहला आधार बना.
बैंक की नौकरी छोड़ चुनी एक्टिंग
शुरुआती दौर में परेश रावल ने बैंक ऑफ बड़ौदा में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगता था. उन्होंने कुछ ही दिनों में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से एक्टिंग की दुनिया में आ गए.
फिल्मों में ऐसे मिली पहचान
फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने 1984 में फिल्म 'होली' से की, और फिर 1985 में 'अर्जुन' जैसी कई फिल्मों में छोटे-छोटे रोल निभाए. असली पहचान उन्हें 1986 की फिल्म 'नाम' से मिली, जहां उन्होंने अपने अभिनय से लोगों का ध्यान खींचा. इसके बाद उन्होंने 80 और 90 के दशक में लगातार काम किया और लगभग 100 से ज्यादा फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाईं. 'राम लखन', 'मोहरा', 'क्रांतिवीर' और 'दामिनी' जैसी फिल्मों में उनकी एक्टिंग काफी सराहा गया.
'बाबूराव' बनकर छा गए परेश रावल
परेश रावल ने विलेन के अलावा कई गंभीर और कॉमिक किरदारों को भी निभाया. साल 2000 में आई फिल्म 'हेरा फेरी' ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी. इस फिल्म में उनका किरदार 'बाबूराव गणपत आप्टे' इतना पॉप्यूलर हुआ कि आज भी वो भारतीय कॉमेडी सिनेमा का एक यादगार चेहरा माना जाता है.
कई हिट फिल्मों में दिखाया दम
इसके बाद उन्होंने 'हंगामा', 'गरम मसाला', 'भूल भुलैया', 'वेलकम', 'गोलमाल' सीरीज और 'ओह माय गॉड' जैसी फिल्मों में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने साबित किया कि वो हर तरह के किरदार में फिट हो सकते हैं, चाहे वो कॉमेडी हो या गंभीर किरदार. उनके काम को कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. उन्हें दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, एक बार फिल्मफेयर अवॉर्ड और साल 2014 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया.
निजी जीवन और राजनीति का सफर
निजी जीवन में परेश रावल ने एक्ट्रेस स्वरूप संपत से शादी की, जो मिस इंडिया रह चुकी हैं. दोनों की प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प रही, जो कॉलेज के दिनों से शुरू होकर शादी तक पहुंची.
परेश रावल ने राजनीति में भी कदम रखा और 2014 में अहमदाबाद पूर्व से सांसद बने. इसके साथ ही, वो नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के प्रमुख भी बनाए गए.
Source: IOCL























