'गंदी नाली के कीडे बन गए हैं', सीजेपी प्रोटेस्ट पर फूटा मुकेश खन्ना का गुस्सा, बोले- ‘ये स्पॉन्सर्ड आंदोलन था’
Mukesh Khanna On CJP Protest: मुकेश खन्ना ने एक वीडियो शेयर कर सीजेपी प्रोटेस्ट पर भड़ास निकाली है. उन्होंने छात्रों के इस आंदोलन को स्पॉन्सर्ड होने का भी दावा किया.

एक्ट्रेस-पॉलिटिशियन कंगना रनौत ने हाल ही में सीजेपी में शामिल कुछ प्रदर्शनकारियों को "गटर छाप" कहा था और प्रदर्शनों व सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की गई भाषा की निंदा की थी. वहीं अब बॉलीवुड एक्टर मुकेश खन्ना ने भी 'जेन जी' के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी राय रखी है. उन्होंने खुद को 'कॉकरोच जनता पार्टी' कहने वाले ग्रुप पर रिएक्शन दिया है उन्होंने प्रोटेस्ट को स्पॉन्सर्ड बताया.
‘विरोध-प्रदर्शन वाले ज्यादातर देश के असली छात्र नहीं’
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में मुकेश ने कहा कि भले ही वे अभी भारत से बाहर हैं, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वे हर घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, नीट -यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़े आंदोलन का जिक्र करते हुए, मुकेश ने दावा किया कि जो लोग अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए देखे गए, वे वास्तविक छात्र नहीं थे.
उन्होंने कहा, “अगर ये हमारी जेन जेड है, और अगर आने वाले 25 साल बाद हमारा देश इनके कंधों पर टिकने वाला है, तो आप समझ सकते हैं कि हमारे देश का क्या हाल होगा. लेकिन जितना मैंने देखा है और जितने लोगों को इस मुद्दे पर बोलते हुए सुना है, उसने मुझे ये महसूस हुआ की ज्यादा लोग इस बात से सहमत हैं कि ये हमारे देश के असली छात्र नहीं हैं. ये वो छात्र नहीं हैं जो नीट या पेपर लीक की समस्या को लेकर आंदोलन कर रहे थे.'

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अभिनेता ने आगे आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के राजनीतिक मकसद थे. उन्होने कहा मैंने भी ये वीडियो देखी हैं और शायद आपने भी देखी होंगी, ये लोग असली छात्रों का प्रतिनिधित्व नहीं करते, जो वास्तव में परेशानियां झेल रहे हैं."
प्रदर्शनकारियों की तुलना 'कॉकरोच' से की
मुकेश ने आगे कहा, "मेरे हिसाब से ये कॉकरोच की तरह हैं. जैसे घर में कॉकरोच आ जाए तो हम उसे बाहर निकाल देते हैं, वैसे ही जो लोग कैमरा के सामने आकर इस तरह की गंदी भाषा का इस्तमाल कर रहे हैं, उन्हें भी हटा देना चाहिए और दूर कर देना चाहिए.''

‘ये छात्रों का प्रोटेस्ट नहीं स्पॉन्सर्ड ऑंदोलन था’
एक्टर ने आगे कहा, “ मेरा मानना है कि ये असल मायने में नीट या छात्रों का आंदोलन नहीं था. ये एक स्पॉन्सर्ड आंदोलन था जिसमें भारी पैसा लगाया गया था. और ये लोग हमारे देश के स्टूडेंट्स का प्रतिनिधित्व नहीं करते क्योंकि एक स्टूडेंट कभी इस इस तरह की भाषा का इस्तमाल नहीं करेगा. मुझे लगता है कि इसमें कुछ ऐसे लोग शामिल थे जो चंद पैसे के लिए देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं."

मुकेश ने युवाओं को ऐसे आंदोलन में शामिल होने के लिए किया अगाह
मुकेश ने युवाओं को ऐसे आंदोलनों में शामिल होने के प्रति आगाह करते हुए कहा," मैं उन बच्चों से भी कहना चाहता हूं कि शायद आपको अभी एहसास नहीं है कि आपने अपने कैमरे के सामने जो कुछ बोला है, या किया है उसका असर आपकी आने वाली जिंदगी पर पड़ सकता है. इन लोगों से दूर रहिए.ये लोग आपको सिर्फ इस्तमाल करेंगे और फिर छोड़ देंगे, वरना हर कदम पर आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, हो सकता है कल को नौकरी मिलने में दिक्कत आए या करियर पर बुरा असर पड़े. इसलिए अपने भविष्य के बारे में सोचिये और संभल कर फैसला लीजिये.”
इन कॉकरोचों को बाहर फेंक दो
मुकेश ने वीडियो के साथ कैप्शन मे लिखा है, “इन कॉकरोचों को बाहर फेंक दो, इससे पहले की बहुत देर हो जाए. उन्होंने आगे लिखा है, “घर में जब कॉक्रोचेस आ जाते हैं तो हम क्या करते हैं ?? उन्हें ढूंढ कर ,पकड़ कर, उठा कर बाहर फेंक आते हैं,इनके साथ भी ऐसा ही कीजिए. जो बच्चे इनके बहकावे में आकर
जोश में बहुत ही गलत सलत बोल गए हैं, उनको मेरी चेतावनी है, तुम्हारा स्टेटमेंट हिस्ट्री में रिकॉर्ड हो गया है. तुम इनकी संगत में ख़ुद भी गंदी नाली के कीड़े बन गए हो. इसका ख़ामियाज़ा तुम्हें भुगतना पड़ेगा !!

मुकेश ने आगे लिखा है, “ कोई पुलिस तुम्हारी मदद नहीं करेगा. कई लोग तुम्हें नौकरी देने में हिचकिचायेंगे, सरकारी मदद बंद. शायद तुम्हें कई वीजा भी ना मिले !! परिवार की नजरों में तुम गिर चुके हो. इस लिए इनके चंगुल से जितना जल्दी निकल आओ अच्छा है, मुझे आपके लिए चिंता है.”
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सरकार द्वारा मांगें माने जाने के बाद विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ
मुकेश का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ है. लगभग एक महीने तक चले इस विरोध प्रदर्शन को तब वापस लिया गया जब सरकार ने समूह की कई मांगें मान लीं, जिनमें प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज वापस लेना शामिल था.























