DU Admission 2026: मई के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी प्रक्रिया, CUET के बाद खुलेंगे फॉर्म
दिल्ली यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रक्रिया कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम पोर्टल के जरिए पूरी की जाती है. यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है, जिसमें सबसे पहले चरण रजिस्ट्रेशन का होता है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. अधिकारियों के अनुसार साल 2026-27 सेशन के लिए अंडर ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह से शुरू हो सकती है. यह प्रक्रिया कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट 2026 शुरू होने के तुरंत बाद शुरू की जाएगी. जिससे छात्रों को समय पर एडमिशन मिल सके और शैक्षणिक सत्र में देरी न हो.
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सीयूईटी के साथ शुरू होगा रजिस्ट्रेशन
यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रक्रिया कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम पोर्टल के जरिए पूरी की जाती है. यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है, जिसमें सबसे पहले चरण रजिस्ट्रेशन का होता है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही सीयूईटी परीक्षा शुरू होगी, उसके आसपास सीएसएएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिया जाएगा. वहीं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के अनुसार CUET-UG 2026 परीक्षा 11 मई से 31 मई के बीच आयोजित की जा सकती है. इसी के आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी अपनी एडमिशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी.
सीयूईटी रिजल्ट पर निर्भर होगा एडमिशन
सीएसएएस पोर्टल के माध्यम से एडमिशन मुख्य रूप से सीयूईटी के स्कोर पर आधारित होगा. परीक्षा का नतीजा आने के बाद छात्र सब्जेक्ट की मैपिंग के आधार पर अपने पसंदीदा कोर्स के लिए आवेदन कर सकेंगे. यह प्रक्रिया छात्रों के लिए काफी अहम होती है, क्योंकि इसी के जरिए उनकी मेरिट और सीट एलोकेशन तय होता है. वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी की एडमिशन डीन हनीत गांधी ने छात्रों को सलाह दी है कि वह सीयूईटी के लिए सही सब्जेक्ट चुनें, जो उन्होंने कक्षा 12 में पढ़े हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि सब्जेक्ट मैपिंग के लिए दोनों के बीच कम से कम 50 प्रतिशत समानता जरूरी होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो एडमिशन प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है.
एडमिशन प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी
दिल्ली यूनिवर्सिटी का फोकस इस बार एडमिशन प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने पर है. ताकि कक्षाएं समय पर शुरू हो सके. इसके लिए सीट एलोकेशन के हर राउंड की अवधि को कम करने की योजना बनाई जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि हर राउंड में एक-दो दिन की कटौती से पूरी प्रक्रिया तेज हो सकती है. वहीं पिछले कुछ वर्षों में सीट आधारित एडमिशन सिस्टम लागू होने के बाद यूनिवर्सिटी में एडमिशन में देरी को लेकर शिक्षकों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित होता है, ऐसे में इस बार प्रक्रिया को टाइम पर तरीके से पूरा करने पर खास जोर दिया जा रहा है.
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Source: IOCL



























