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बदलता भारत, बदलते नक्शे; राज्यों और जिलों की अनकही कहानी अब एक मंच पर

पुणे की FLAME University की टीम ने “The India State Stories” प्रोजेक्ट के जरिए 1941 से 2021 तक भारत के राज्यों और जिलों में हुए बदलावों को एक ही मंच पर सहेजा है.

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  • भारत के राज्यों और जिलों के बदलते नक्शे को दर्शाया गया है.
  • 1941 से 2021 तक की भौगोलिक प्रशासनिक यात्रा को समझाया गया है.
  • सरकारी आदेशों से जिलों के गठन की विस्तृत जानकारी दी गई है.
  • आम लोगों और शोधकर्ताओं के लिए एक मुफ्त ऑनलाइन मंच उपलब्ध है.

भारत का नक्शा हम रोज देखते हैं किताबों में, दीवारों पर, मोबाइल स्क्रीन पर. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह नक्शा हमेशा ऐसा ही था? जिन राज्यों और जिलों को हम आज जानते हैं, वे पहले ऐसे नहीं थे. कई जगहों के नाम बदले, सीमाएं बदलीं और कई नए जिले अचानक बन गए. अब इन बदलावों की पूरी कहानी एक जगह देखने का मौका मिल रही है.

पुणे में मौजूद FLAME University की एक टीम ने “The India State Stories” नाम से एक खास प्रोजेक्ट शुरू किया है. इस प्रोजेक्ट में 1941 से 2021 तक भारत के राज्यों और जिलों की बदलती सीमाओं, नामों और नक्शों को एक साथ जोड़ा गया है. यह एक मुफ्त ऑनलाइन मंच है, जहां नक्शे, तालिकाएं, लेख और पॉडकास्ट के जरिए भारत की भौगोलिक और प्रशासनिक यात्रा को समझाया गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अक्सर किसी देश या राज्य के बनने पर बड़ी बहस होती है. लोग चर्चा करते हैं, आंदोलन होते हैं, फैसले लिए जाते हैं. लेकिन जिलों के बनने की कहानी अलग होती है. कई बार सिर्फ एक सरकारी आदेश से जिले बन जाते हैं. जैसे 2016 में तेलंगाना ने अपने जिलों की संख्या तीन गुना कर दी. 2022 में आंध्र प्रदेश ने 13 जिलों को बढ़ाकर 26 कर दिया.

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जानकारी को एक जगह लाने की कोशिश
समस्या यह थी कि इन बदलावों का कोई एक साझा रिकॉर्ड नहीं था. अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों, जनगणना रिपोर्टों और फाइलों में बिखरी जानकारी को एक साथ खोजना आसान नहीं था. कई शहर पहले जिले माने जाते थे, बाद में उनकी स्थिति बदली. कई जिलों की सीमाएं बार-बार बदलीं. ऐसे में कोई भी व्यक्ति अगर लंबे समय की कहानी समझना चाहता, तो उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती.

इसी जरूरत को देखते हुए इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई. इस पहल के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर शिवकुमार जोलाड बताते हैं कि भारत के इलाकों की कई अनकही कहानियां हैं. अगर आप लंबे समय को समझना चाहते हैं, तो आपको यह जानना जरूरी है कि क्या-क्या बदला.

शोधकर्ताओं से आम लोगों तक, सबके लिए उपयोगी
यह वेबसाइट सिर्फ शोधकर्ताओं के लिए नहीं है. आम लोग भी इसे आसानी से देख और समझ सकते हैं. वेबसाइट पर एक सवाल सबसे पहले सामने आता है संविधान में भारत को राज्यों का संघ कहा गया है, लेकिन 1950 में जो राज्य थे, वे आज जैसे नहीं थे.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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