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UPSC Success Story: हार मानने का नाम नहीं लिया, बैकबेंचर से IAS तक; 5वें प्रयास में आई 199वीं रैंक

स्कूल में बैकबेंचर रहीं तृप्ति ने चार बार UPSC में असफलता झेलने के बाद पांचवें प्रयास में 199वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया. आइये जानतें हैं उनकी सफलता की कहानी.

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिना जाता है. हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है.ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS तृप्ति कलहंस की, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि स्कूल-कॉलेज में औसत प्रदर्शन करने वाले छात्र भी कड़ी मेहनत और सही रणनीति से देश की सबसे कठिन परीक्षा को पास कर सकते हैं.

गोंडा से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक की पढ़ाई

IAS तृप्ति कलहंस मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गोंडा से ही पूरी की.स्कूल के दिनों में तृप्ति एक सामान्य छात्रा थीं और अक्सर कक्षा में पिछली बेंच पर बैठा करती थीं. 12वीं के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कमला नेहरू कॉलेज से B.Com की पढ़ाई पूरी की. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया.

चार असफल प्रयास और मानसिक संघर्ष

UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति ने लगातार चार बार परीक्षा दी, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगी. बार-बार फेल होने से उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा. हालात ऐसे हो गए कि रिश्तेदारों ने उनसे UPSC को लेकर सवाल पूछना बंद कर दिया और दोस्तों को भी लगने लगा कि यह तैयारी उनकी जिंदगी का स्थायी हिस्सा बन गई है. कई बार तृप्ति खुद भी सोचने लगीं कि एक बैकबेंचर होने के बावजूद उन्होंने इतना बड़ा सपना क्यों देखा.

रणनीति में बदलाव बना सफलता की कुंजी

चार असफलताओं के बाद भी तृप्ति ने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया. उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई और लंबी घंटों की पढ़ाई के बजाय स्मार्ट और क्वॉलिटी स्टडी पर ध्यान देना शुरू किया. कठिन विषयों को उन्होंने अपनी भाषा में समझा और निरंतर आत्ममंथन किया. इसके साथ ही उन्होंने अपने इंटरव्यू स्किल्स पर भी विशेष ध्यान दिया.

5वें प्रयास में मिली ऐतिहासिक सफलता

लगातार चार साल की मेहनत, धैर्य और बदली हुई रणनीति का नतीजा यह रहा कि UPSC CSE 2023 में तृप्ति कलहंस ने 199वीं रैंक हासिल की.इस सफलता के साथ उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में हुआ और वे अफसर बनीं.
युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश

IAS तृप्ति कलहंस की कहानी यह संदेश देती है कि स्कूल की रैंक या बैकबेंचर होना आपकी सफलता तय नहीं करता. असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ना, खुद पर भरोसा रखना और लगातार प्रयास करते रहना ही असली सफलता की कुंजी है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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