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मेडिकल स्टोर खोलना है? जानिए कौन-सा कोर्स जरूरी, लाइसेंस के नियम और पूरी प्रक्रिया...

अगर आप मेडिकल स्टोर खोलकर अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो पहले जान लें जरूरी कोर्स, लाइसेंस नियम और क्या एक लाइसेंस से दो दुकान चल सकती हैं.

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  • मेडिकल स्टोर खोलने हेतु फार्मेसी डिग्री या डिप्लोमा अनिवार्य है.
  • डी.फार्मा (2 साल) या बी.फार्मा (4 साल) कोर्स आवश्यक हैं.
  • एक ड्रग लाइसेंस केवल एक मेडिकल स्टोर के लिए मान्य.
  • फार्मेसी डिग्री धारक को नियुक्त कर भी स्टोर खोल सकते हैं.

आज के समय में मेडिकल स्टोर एक ऐसा बिजनेस है जिसकी मांग कभी खत्म नहीं होती. चाहे दिन हो या रात, दवाइयों की जरूरत हमेशा बनी रहती है. यही कारण है कि बहुत से लोग इस फील्ड में अपना करियर या बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. लेकिन यह काम उतना आसान नहीं है जितना दिखता है, क्योंकि इसमें लोगों की सेहत जुड़ी होती है और इसी वजह से सरकार ने इसके लिए कुछ सख्त नियम बनाए हैं. अगर आप भी मेडिकल स्टोर खोलने की सोच रहे हैं, तो पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है.

मेडिकल स्टोर खोलने के लिए कौन-सा कोर्स जरूरी है

मेडिकल स्टोर खोलने के लिए सबसे जरूरी चीज होती है फार्मेसी से जुड़ी पढ़ाई.बिना फार्मेसी डिग्री या डिप्लोमा के आपको ड्रग लाइसेंस नहीं मिलेगा.सबसे पहला और आसान कोर्स है डी.फार्मा यह 2 साल का कोर्स होता है और इसे करने के लिए 12वीं में साइंस बायोलॉजी या मैथ्स होना जरूरी है. इस कोर्स में दवाइयों की जानकारी, उनका उपयोग, और स्टोर मैनेजमेंट जैसी बेसिक चीजें सिखाई जाती हैं.अगर आप जल्दी मेडिकल स्टोर शुरू करना चाहते हैं, तो यह सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है.


दूसरा कोर्स है बी.फार्मा यह 4 साल की डिग्री होती है. इसमें दवाइयों की गहराई से पढ़ाई होती है, जैसे दवा कैसे बनती है, शरीर पर उसका क्या असर होता है और नई दवाओं पर रिसर्च कैसे की जाती है.अगर आप भविष्य में बड़ा काम करना चाहते हैं या मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च में जाना चाहते हैं, तो यह कोर्स आपके लिए बेहतर रहेगा.


क्या एक लाइसेंस से दो मेडिकल स्टोर चल सकते हैं?
बहुत लोगों का सवाल होता है कि क्या एक ही लाइसेंस से दो दुकानें चलाई जा सकती हैं. इसका सीधा जवाब है नहीं.भारत में नियम के अनुसार एक ड्रग लाइसेंस सिर्फ एक ही दुकान के लिए मान्य होता है.अगर आप दूसरी जगह नया मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं, तो आपको उस जगह के लिए अलग से नया लाइसेंस लेना पड़ेगा.हर लाइसेंस एक खास एड्रेस और एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के नाम पर जारी होता है. इसका मकसद यह है कि हर दुकान पर एक योग्य व्यक्ति मौजूद रहे ताकि गलत दवा देने का खतरा न हो.

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अगर आपके पास फार्मेसी की डिग्री नहीं है तो क्या करें

अगर आपने फार्मेसी की पढ़ाई नहीं की है, तब भी आप मेडिकल स्टोर खोल सकते हैं. इसके लिए आपको एक ऐसे फार्मासिस्ट को नौकरी पर रखना होगा जिसके पास डी.फार्मा या बी.फार्मा की डिग्री हो.लाइसेंस उसी फार्मासिस्ट के नाम और डॉक्यूमेंट्स पर बनेगा, लेकिन दुकान के मालिक आप रहेंगे. ध्यान रखने वाली बात यह है कि जब भी दुकान खुली हो, उस फार्मासिस्ट का वहां मौजूद होना जरूरी है. बिना फार्मासिस्ट के दवा बेचना नियम के खिलाफ है.


मेडिकल स्टोर बिजनेस क्यों है फायदेमंद
मेडिकल स्टोर एक स्थिर और भरोसेमंद बिजनेस माना जाता है.इसमें डिमांड हमेशा बनी रहती है और सही तरीके से चलाने पर अच्छी कमाई भी होती है. हालांकि इसमें जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है, क्योंकि छोटी सी गलती भी किसी की सेहत पर असर डाल सकती है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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