पुरानी गाड़ी फाइनल करने से पहले, इन 4 चीजों को जरूर चेक करें, पता लग जाएगी गाड़ी की सही कंडीशन
Used Car Buying Guide: पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं बल्कि गाड़ी की असली कंडीशन जांचना बेहद जरूरी है. कुछ जरूरी चीजें चेक करके आप बड़े नुकसान से बच सकते हैं.

Used Car Buying Guide: आज के समय में सेकेंड हैंड कार खरीदना काफी लोगों के लिए समझदारी वाला फैसला बन चुका है. नई कारों की बढ़ती कीमतों के बीच कम बजट में अच्छी गाड़ी पाने के लिए लोग यूज्ड कार मार्केट की तरफ तेजी से जा रहे हैं. लेकिन सिर्फ चमकदार बॉडी और कम कीमत देखकर पुरानी गाड़ी खरीद लेना बाद में बड़ा नुकसान करा सकता है. कई बार बाहर से अच्छी दिखने वाली कार अंदर से काफी खराब हालत में होती है.
ऐसे में अगर सही जांच न की जाए तो बाद में भारी रिपेयर खर्च उठाना पड़ सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले कुछ जरूरी चीजें जरूर चेक करनी चाहिए. इससे आपको गाड़ी की असली कंडीशन का अंदाजा लग जाता है और गलत डील से बचने में मदद मिलती है.
ओडोमीटर और सर्विस हिस्ट्री जरूर करें चेक
पुरानी कार खरीदते समय सबसे पहले ओडोमीटर पर दिख रही किलोमीटर रीडिंग को ध्यान से देखना चाहिए. कई बार गाड़ियों में ओडोमीटर से छेड़छाड़ भी की जाती है ताकि कार कम चली हुई लगे. अगर कार की हालत और किलोमीटर रीडिंग में फर्क नजर आए तो सतर्क हो जाना चाहिए. इसके अलावा सर्विस रिकॉर्ड भी जरूर मांगना चाहिए. समय पर सर्विस हुई है या नहीं, यह रिकॉर्ड देखकर आसानी से समझा जा सकता है.
अगर कार की नियमित सर्विस कंपनी के सर्विस सेंटर पर हुई होगी तो उसकी डिटेल ऑनलाइन भी मिल सकती है. साथ ही इंजन स्टार्ट करके उसकी आवाज भी सुननी चाहिए. अगर इंजन से ज्यादा कंपन या अजीब आवाज आए तो यह अंदरूनी खराबी का संकेत हो सकता है.
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एक्सीडेंट हिस्ट्री और बॉडी की हालत भी है जरूरी
कई लोग सिर्फ इंजन देखकर गाड़ी फाइनल कर देते हैं, जबकि बॉडी और एक्सीडेंट हिस्ट्री भी उतनी ही जरूरी होती है. कार के दरवाजों, बोनट और पेंट को ध्यान से देखें. अगर कहीं पेंट का रंग अलग दिखे या गैप ज्यादा नजर आए तो संभव है कि कार पहले एक्सीडेंट में डैमेज हुई हो. टायर की हालत भी काफी कुछ बता देती है. अगर टायर एक तरफ से ज्यादा घिसे हों तो सस्पेंशन या व्हील अलाइनमेंट में दिक्कत हो सकती है.
टेस्ट ड्राइव लेना भी बेहद जरूरी माना जाता है क्योंकि इससे ब्रेक, क्लच, स्टीयरिंग और गियरबॉक्स की असली हालत समझ आती है. थोड़ी सावधानी और सही जांच के बाद ही सेकेंड हैंड कार की डील फाइनल करनी चाहिए ताकि बाद में पछताना न पड़े.
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Source: IOCL























