चीन के बाद अब भारत बनेगा दुनिया का नया ऑटो हब? Tata Tech ने किया बड़ा दावा
India Next Automotive Hub: चीन के बाद भारत बनेगा दुनिया का नया ऑटो हब. टाटा टेक्नोलॉजीज के नचिकेत परांजपे का बड़ा दावा, ग्लोबल कार मेकर्स के लिए भारत बनने जा रहा है सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट मैग्नेट.

India Next Automotive Hub: भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट लगातार बेहतरीन काम कर रहा है और भविष्य में और भी बेहतरीन काम ही उम्मीद की जा रही है. जिसके चलते अब ग्लोबल लेवल पर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अब तक दुनिया भर की कार कंपनियों के लिए चीन सबसे पसंदीदा और बड़ा मार्केट हुआ करता था. लेकिन अब पासा पलटता हुआ दिख रहा है. टाटा ग्रुप की दिग्गज कंपनी टाटा टेक्नोलॉजीज ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है.
कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव नचिकेत परांजपे के मुताबिक, बदलते ग्लोबल हालातों और चीन के धीमे पड़ते बाजार के बीच अब दुनिया भर के बड़े कार मेकर्स की नजरें भारत पर टिक गई हैं. भारत न सिर्फ गाड़ियों की बिक्री के मामले में बल्कि ग्लोबल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग हब के रूप में 'अगली बड़ी कहानी' बनने के लिए पूरी तरह तैयार है. तो चलिए विस्तार से जानतें हैं इस खबर के बारे में.
भारत तेजी से बढ़ रहा है आगे
बता दें कि, टाटा टेक्नोलॉजीज के प्रेसिडेंट नचिकेत परांजपे ने ईटीऑटो को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि चीन के बाजार में अब डिमांड पहले के मुकाबले काफी धीमी हो चुकी है. वहां कारों की सेल्स ग्रोथ पिछले तीन सालों में सबसे कम रही है. ऐसे में दुनिया भर के पारंपरिक वाहन निर्माता (OEMs) अब एक बैकअप और नए ग्रोथ मार्केट की तलाश कर रहे हैं.
इस मामले में भारत उनकी पहली पसंद बनकर उभरा है. भारत में मिडिल क्लास की बढ़ती इनकम और लग्जरी कारों की तरफ लोगों के बढ़ते क्रेज ने विदेशी कंपनियों को यहां निवेश करने के लिए मजबूर कर दिया है.
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भारत की ताकत बने इंजीनियर्स
आपको बता दें कि, भारत को इस रेस में सबसे आगे रखने में यहां के इंजीनियर्स का बड़ा हाथ है. नचिकेत परांजपे का कहना है कि आज के समय में अगर किसी कंपनी को बहुत कम समय में सैकड़ों कुशल इंजीनियर्स की एक बड़ी टीम खड़ी करनी हो, तो भारत से बेहतर और कोई देश नहीं है.
भारत में काम करने की स्पीड और कॉस्ट-इफेक्टिवनेस इतनी शानदार है कि विदेशी कंपनियां अपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट्स यहीं सेटअप कर रही हैं. BMW जैसी दिग्गज जर्मन कंपनी ने भी भारत में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स बनाने के लिए टाटा टेक के साथ हाथ मिलाया है.
AI का भी मिल रहा है साथ
पहले के समय में किसी भी नई कार को बिल्कुल स्क्रैच से डिजाइन करने और मार्केट में लॉन्च करने में करीब 36 से 45 महीने का लंबा वक्त लग जाता था. लेकिन अब AI और वर्चुअल इंजीनियरिंग की मदद से इस पूरे प्रोडक्शन साइकिल को लगभग 40% तक कम कर दिया गया है.
टाटा टेक अपने क्लाइंट्स के लिए इस टाइम को करीब आधा करने में मदद कर रहा है. आने वाले समय में गाड़ियां पूरी तरह से यूजर की डिजिटल लाइफस्टाइल और पर्सनल पसंद के हिसाब से कस्टमाइज होंगी. यही वजह है कि भारत अब सिर्फ गाड़ी असेंबल करने वाला देश नहीं, बल्कि उन्हें स्मार्ट बनाने वाला ग्लोबल लीडर बन रहा है.
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