तरुण तेजपाल किस केस में दोषी करार? कौन-कौन से आरोप
बॉम्बे हाई कोर्ट ने तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 रेप केस में दोषी करार देते हुए गोवा सेशंस कोर्ट का बरी करने का फैसला रद्द कर दिया. अब सजा पर फैसला सुनाया जाएगा.

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा झटका देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) को 2013 के रेप मामले में उन्हें दोषी करार दिया. अदालत ने 5 साल पहले गोवा की सेशंस कोर्ट की तरफ से सुनाए गए बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया.
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच के जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f), धारा 354(a) और धारा 354(b) के तहत दोषी ठहराया है. धारा 376(2)(f) के तहत दोषी को कम से कम 10 साल की सजा और अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. अदालत के फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि हाई कोर्ट का फैसला गलत है और वह इसे सर्वोच्च अदालत में चुनौती देंगे.
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गोवा की ट्रायल कोर्ट का फैसला
मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के आधार पर तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था. इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी. लंबी सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया. अदालत ने अभी केवल दोष सिद्ध होने का फैसला सुनाया है. सजा की अवधि पर अलग से आदेश जारी किया जाएगा. कानून के अनुसार, दोषी पाए जाने के बाद अदालत सजा तय करेगी.
क्या था पूरा मामला?
तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल का मामला 7 और 8 नवंबर 2013 का है. आरोप है कि गोवा में आयोजित तहलका के THiNK Fest कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहकर्मी के साथ दो बार यौन उत्पीड़न किया. पीड़िता का कहना था कि तेजपाल ने उसकी इच्छा के खिलाफ उसके साथ यौन हिंसा की. इस मामले में तरुण तेजपाल पर बलात्कार और महिला की इमेज को ठेस पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. घटना के बाद 18 और 19 नवंबर 2013 को पीड़िता ने संस्थान के भीतर शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद तरुण तेजपाल ने ईमेल के जरिए बिना शर्त माफी मांगी. 30 नवंबर 2013 को अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद तरुण तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने करीब सात महीने जेल में बिताए. बाद में जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली.
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2017 में ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए. उस समय तेजपाल ने खुद को निर्दोष बताया था. 21 मई 2021 को गोवा के मापुसा जिला एवं सत्र न्यायालय ने सबूतों की कमी और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का हवाला देते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया. इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी.
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