पेट्रोल-डीजल नहीं बल्कि Ethanol से चलेगी ये कार, Tata की नई SUV में क्या होगा खास?
Tata Flex Fuel Car: टाटा मोटर्स ने इससे पहले भी अपनी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का प्रदर्शन किया था. अब कंपनी इसे प्रोडक्शन मॉडल के रूप में लॉन्च करने की तैयारी में है. आइए डिटेल्स जानते हैं.

भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़त कीमतों के बीच ऑटोमोबाइल कंपनियां नए फ्यूल पर तेजी से काम कर रही हैं. इसी कड़ी में टाटा मोटर्स एक नई तकनीक वाली कार लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. कंपनी इस साल अपनी फ्लेक्स-फ्यूल कार बाजार में उतार सकती है, जो E100 यानी 100 फीसदी एथेनॉल पर भी चलने में सक्षम होगी. यह कदम न सिर्फ फ्यूल के खर्च को कम करने में मदद करेगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है.
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे होते हैं जो पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर आसानी से चल सकते हैं. आम पेट्रोल कारों की तुलना में इन गाड़ियों के इंजन को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे फ्यूल में मौजूद एथेनॉल की मात्रा के अनुसार खुद को एडजस्ट कर सकें. टाटा की आने वाली कार भी इसी तकनीक पर आधारित होगी और E100 तक के फ्यूल को सपोर्ट करेगी.
क्या होता है एथेनॉल?
एथेनॉल एक बायो फ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. भारत सरकार पिछले कुछ सालों से एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके. फिलहाल देश में E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन भविष्य में E100 जैसे फ्यूल के इस्तेमाल को भी बढ़ाने की योजना है.
टाटा मोटर्स ने इससे पहले भी अपनी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का प्रदर्शन किया था. अब कंपनी इसे प्रोडक्शन मॉडल के रूप में लॉन्च करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार भारतीय बाजार में इस साल के अंत तक दस्तक दे सकती है. हालांकि कंपनी ने अभी लॉन्च की तारीख और कीमत का खुलासा नहीं किया है.
इन कारों का क्या है बड़ा फायदा?
फ्लेक्स-फ्यूल कारों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाती हैं. एथेनॉल के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे प्रदूषण घटाने में मदद मिलती है. इसके अलावा, एथेनॉल का प्रोडक्शन भी देश के अंदर ही किया जा सकता है, जिससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर देशभर में एथेनॉल की मौजूदगी और फ्यूल स्टेशन नेटवर्क मजबूत हो जाता है तो फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां भविष्य में एक बड़ा विकल्प बन सकते हैं. इससे ग्राहकों को फ्यूल के कई विकल्प मिलेंगे और गाड़ी चलाने का खर्च भी कम हो सकता है.
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Source: IOCL























