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जब नहीं था स्टीयरिंग तो कैसे कंट्रोल होती थी दुनिया की पहली कार? जानें
Benz Motorwagen: कार्ल बेंज ने शुरुआत में तीन पहियों का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि उस समय चार पहियों वाली गाड़ी के लिए ऐसा स्टीयरिंग सिस्टम तैयार करना आसान नहीं था.

कैसी थी दुनिया की पहली कार?
Source : Social Media
आज कार चलाने की बात हो तो सबसे पहले स्टीयरिंग व्हील, एक्सीलेरेटर, ब्रेक और गियर का ख्याल आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की पहली पेट्रोल कार में स्टीयरिंग व्हील था ही नहीं? करीब 140 साल पहले जर्मनी के इंजीनियर कार्ल बेंज ने ऐसी कार तैयार की थी, जिसने ऑटोमोबाइल की दुनिया की शुरुआत की.इसका नाम Benz Patent-Motorwagen था.इसे 1885 में तैयार किया गया और 29 जनवरी 1886 को इसके लिए पेटेंट अप्लाई किया गया था.
कैसी थी कार्ल बेंज की पहली कार?
- कार्ल बेंज की यह कार आज की कारों से बिल्कुल अलग दिखाई देती थी.इसमें चार पहियों की जगह तीन पहिए थे.आगे की तरफ एक पहिया और पीछे दो पहिए लगाए गए थे. कार का ढांचा काफी हल्का था और इसमें ट्यूबलर स्टील फ्रेम का इस्तेमाल किया गया था.
- पीछे की तरफ सिंगल-सिलेंडर पेट्रोल इंजन लगाया गया था. शुरुआती मॉडल का इंजन करीब 0.75 हॉर्सपावर का था और इसकी रफ्तार लगभग 10 मील प्रति घंटे यानी करीब 16 किमी/घंटा तक पहुंच सकती थी.
- उस समय न तो आज जैसी सड़कें थीं और न ही पेट्रोल पंप या मॉडर्न कारों जैसी सुविधाएं थी. इसके बावजूद बेंज ने एक ऐसी मशीन तैयार की जो अपने इंजन की ताकत से खुद चल सकती थी और इसे किसी घोड़े या दूसरे जानवर की जरूरत नहीं थी.

- इस कार की सबसे दिलचस्प बात इसका स्टीयरिंग सिस्टम था. इसमें आज की तरह गोल स्टीयरिंग व्हील नहीं लगाया गया था.इसकी जगह एक टिलर (Tiller) दिया गया था.यह एक तरह का लंबा हैंडल या लीवर था, जिसे चालक अपने हाथ से दाएं-बाएं घुमाकर कार की दिशा बदलता था.
- इस टिलर का कनेक्शन आगे के पहिए से था.जब चालक टिलर को एक तरफ करता था तो सामने का पहिया उसी दिशा में घूमता था और कार भी उसी तरफ मुड़ जाती थी.यानी आज जिस काम को हम स्टीयरिंग व्हील घुमाकर करते हैं, उस समय वही काम एक साधारण लीवर की मदद से किया जाता था.
गाड़ी का इंजन और रफ्तार
- कार्ल बेंज ने शुरुआत में तीन पहियों का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि उस समय चार पहियों वाली गाड़ी के लिए ऐसा स्टीयरिंग सिस्टम तैयार करना आसान नहीं था, जो प्रभावी और नियंत्रित हो. उन्होंने एक ऐसा डिजाइन चुना जिसमें आगे का एक पहिया दिशा बदलने का काम करता था और पीछे के दो पहिए इंजन की पावर से कार को आगे बढ़ाते थे.
- यह डिजाइन उस समय की तकनीक के हिसाब से काफी जरूरी था.बेंज ने सिर्फ किसी घोड़ा गाड़ी में इंजन नहीं लगाया था, बल्कि उन्होंने गाड़ी को शुरू से ही मोटर से चलने के उद्देश्य से डिजाइन किया था.इसी वजह से Benz Patent-Motorwagen को मॉडर्न ऑटोमोबाइल के इतिहास में खास स्थान मिलता है.
- इस कार में पीछे की तरफ एक छोटा सिंगल-सिलेंडर, चार-स्ट्रोक पेट्रोल इंजन लगाया गया था.इंजन से मिलने वाली पावर को पीछे के पहियों तक बेल्ट और चेन के जरिए पहुंचाया जाता था.शुरुआती कार में आज की तरह मल्टी-स्पीड गियरबॉक्स, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन या रिवर्स गियर जैसी सुविधाएं नहीं थीं.
- 29 जनवरी 1886 को कार्ल बेंज ने अपने मोटर वाहन के लिए पेटेंट आवेदन किया.इसे जर्मन पेटेंट DRP 37435 के नाम से जाना जाता है. Mercedes-Benz के आर्काइव के मुताबिक, इसी पेटेंट को दुनिया की पहली ऑटोमोबाइल का जन्म प्रमाण माना जाता है और इसके संशोधित मॉडल का सीरीज प्रोडक्शन 1888 में शुरू हुआ.

स्टीयरिंग सिस्टम में किया गया बदलाव
- समय के साथ कारों की तकनीक तेजी से विकसित हुई. तीन पहियों की जगह चार पहियों का इस्तेमाल बढ़ा और स्टीयरिंग सिस्टम में भी बदलाव हुए. टिलर की जगह धीरे-धीरे गोल स्टीयरिंग व्हील लोकप्रिय हुआ, क्योंकि इससे चालक को वाहन की दिशा नियंत्रित करने में बेहतर सुविधा और नियंत्रण मिला.
- आज कार में जिस स्टीयरिंग व्हील को हम सबसे सामान्य चीज मानते हैं, वहां से ऑटोमोबाइल की शुरुआत नहीं हुई थी. कार्ल बेंज की पहली कार में सिर्फ एक साधारण टिलर की मदद से दिशा बदली जाती थी.
- अगर Benz Patent-Motorwagen की तुलना आज की कार से करें तो दोनों में जमीन-आसमान का अंतर दिखाई देता है. उस कार में न स्टीयरिंग था, न एयरबैग, न ABS, न सीट बेल्ट, न टचस्क्रीन और न ही आज जैसी आरामदायक केबिन. लेकिन उस समय के हिसाब से यह तकनीक बेहद क्रांतिकारी थी.
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