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हादसे के टाइम पलक झपकते ही कैसे खुल जाते हैं एयरबैग? जानिए कैसे करते हैं काम
Car Airbag: एयरबैग एक नॉर्मल कपड़े का बैग नहीं, बल्कि सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल और गैस बनाने वाले केमिकल रिएक्शन से जुड़ा बेहद तेज सेफ्टी सिस्टम है.

कैसे काम करते हैं एयरबैग?
Source : Social Media
मॉडर्न कारों में एयरबैग सबसे अहम सेफ्टी फीचर्स में से एक माना जाता है. हादसे के वक्त यह ड्राइवर और यात्रियों को कार के स्टीयरिंग, डैशबोर्ड, दरवाजे और दूसरे कठोर हिस्सों से सीधे टकराने से बचाने में मदद करता है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक्सीडेंट होते ही एयरबैग महज कुछ मिलीसेकंड में कैसे खुल जाता है? क्या इसमें पहले से हवा भरी रहती है या इसके पीछे कोई दूसरी तकनीक काम करती है? दरअसल, एयरबैग एक नॉर्मल कपड़े का बैग नहीं, बल्कि सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल और गैस बनाने वाले केमिकल रिएक्शन से जुड़ा बेहद तेज सेफ्टी सिस्टम है.
कैसे काम करता है एयरबैग?
- कार में गंभीर टक्कर होने पर एयरबैग को बेहद कम समय में एक्टिव होना पड़ता है. एयरबैग करीब 10 से 30 मिलीसेकंड के भीतर खुल सकता है. यह इंसान की पलक झपकने में लगने वाले समय से भी काफी कम है. अगर एयरबैग देर से खुले, तो हादसे के दौरान यात्री के शरीर को जरूरी सुरक्षा नहीं मिल पाएगी. इसलिए एयरबैग सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि टक्कर का पता लगते ही वह तुरंत प्रतिक्रिया दे.
- एयरबैग के नाम से ऐसा लग सकता है कि इसके अंदर पहले से हवा भरी रहती है, लेकिन ऐसा नहीं है. दुर्घटना के समय इसे तेजी से फुलाने के लिए खास रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है.

- मॉडर्न एयरबैग सिस्टम में गुआनिडिनियम नाइट्रेट और कॉपर नाइट्रेट जैसे केमिकल पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. टक्कर का पता लगने पर इनसे नियंत्रित रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिससे बहुत तेजी से गैस बनती है और एयरबैग फैल जाता है. इससे यात्री और कार के कठोर हिस्सों के बीच एक सेफ्टी कुशन तैयार हो जाता है.
- पहले कई एयरबैग सिस्टम में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि, समय के साथ इसकी सेफ्टी संबंधी चिंताएं सामने आईं. नमी के संपर्क में आने पर यह अस्थिर हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में जरूरत से ज्यादा दबाव पैदा कर सकता है. इसी वजह से एयरबैग तकनीक में ज्यादा स्थिर और सुरक्षित रासायनिक विकल्पों की ओर बदलाव हुआ.
खुलने के बाद सफेद धुआं क्यों दिखाई देता है?
- हादसे के बाद जब एयरबैग खुलता है तो कई बार उसके आसपास सफेद धुएं जैसा पदार्थ दिखाई देता है. इसे देखकर लोगों को लग सकता है कि एयरबैग फटने या जलने से धुआं निकला है, लेकिन आम तौर पर ऐसा नहीं होता. एयरबैग नायलॉन के कपड़े से बना होता है और उसे लंबे समय तक मोड़कर रखने के दौरान कपड़ा आपस में चिपके नहीं, इसके लिए उस पर टैल्कम जैसे पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है. एयरबैग बहुत तेजी से खुलने पर यह पाउडर हवा में फैल जाता है और धुएं जैसा दिखाई देता है.

- मॉडर्न कारों में एयरबैग सिर्फ टक्कर को ही नहीं देखते, बल्कि कई मामलों में यह भी पता लगाया जाता है कि सीट बेल्ट लगी है या नहीं. कार में लगे MEMS सेंसर अचानक आई गति में कमी और टक्कर की तीव्रता जैसी चीजों को मापते हैं. सीट बेल्ट लगी होने या नहीं होने के आधार पर एयरबैग के सक्रिय होने की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं. यानी कार का सेफ्टी सिस्टम अलग-अलग सेंसर से मिलने वाली जानकारी के आधार पर तेजी से फैसला करता है.
- सामने से होने वाली टक्कर में कार के आगे मौजूद क्रंपल जोन टक्कर की ऊर्जा का कुछ हिस्सा सोखने में मदद करते हैं. लेकिन साइड से टक्कर होने पर यात्रियों और कार के बाहरी हिस्से के बीच जगह कम होती है. इसलिए साइड इम्पैक्ट के लिए अलग सेंसर और एयरबैग सिस्टम इस्तेमाल किए जाते हैं.
- दरवाजे या साइड हिस्से में लगे सेंसर टक्कर के दौरान दबाव में अचानक हुए बदलाव को पहचानते हैं. इसके बाद साइड या कर्टेन एयरबैग बहुत तेजी से खुलकर सिर और शरीर के लिए सुरक्षा कवच बनाने की कोशिश करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ सिस्टम लगभग 20 मिलीसेकंड के भीतर साइड कर्टेन एयरबैग को सक्रिय कर सकते हैं.
कार पलटने के दौरान कैसे करते हैं काम?
- कुछ गाड़ियों में रोलओवर सेंसर भी दिए जाते हैं. ये सेंसर कार के झुकाव और उसके बैलेंस पर नजर रखते हैं. अगर सिस्टम को लगता है कि गाड़ी पलटने की स्थिति में है, तो वह साइड और कर्टेन एयरबैग को एक्टिव कर सकता है. ऐसे एयरबैग कुछ सामान्य एयरबैग की तुलना में ज्यादा समय तक फूले रह सकते हैं, जिससे पलटने की स्थिति में यात्रियों के सिर और गर्दन को सुरक्षा मिल सके.
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