लोक अदालत में यूपी के चालान कैसे होते हैं सेटल, कहां कराना होता है रजिस्ट्रेशन?
9 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. अगर आपके ऊपर यूपी ट्रैफिक पुलिस का कोई चालान लंबित है, तो आइए जानते हैं लोक अदालत में ट्रैफिक चालान निपटाने की प्रक्रिया क्या है.

अगर आपके ऊपर उत्तर प्रदेश ट्रैफिक पुलिस का ई-चालान पेंडिंग है, तो लोक अदालत आपके लिए राहत का अच्छा मौका हो सकता है. लोक अदालत में लोग अपने पुराने चालान का निपटारा आसानी से कर सकते हैं. यहां लंबी कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और कई मामलों में जुर्माने में राहत भी मिल जाती है. यही वजह है कि हर साल हजारों लोग लोक अदालत में पहुंचकर अपने चालान सेटल करवाते हैं.
लोक अदालत में चालान सेटल करने का तरीका
लोक अदालत में ट्रैफिक चालान सेटल करने के लिए सबसे पहले आपको यह देखना होता है कि आपका चालान उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से जारी किया गया है या नहीं. सिर्फ यूपी ट्रैफिक पुलिस के चालान ही यूपी की लोक अदालत में निपटाए जाते हैं. जिस दिन लोक अदालत लगती है, उस दिन आपको अपने जरूरी दस्तावेज लेकर जिला न्यायालय या तय किए गए केंद्र पर जाना होता है. वहां चालान से जुड़ी जानकारी चेक की जाती है. इसके बाद अधिकारी और कोर्ट की टीम मामले को देखकर समाधान निकालती है. कई बार लोगों को कम जुर्माना देकर मामला खत्म करने का मौका भी मिल जाता है.
कहां कराना होता है रजिस्ट्रेशन?
लोक अदालत में चालान निपटाने के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया नहीं होती. कई मामलों में पहले से ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी जाती है. इसके लिए लोग जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) या ट्रैफिक पुलिस कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. अगर आपका चालान ई-चालान पोर्टल पर दिख रहा है, तो आप उसकी जानकारी लेकर लोक अदालत में पहुंच सकते हैं. कुछ जगहों पर मौके पर भी रजिस्ट्रेशन किया जाता है. इसलिए लोक अदालत की तारीख से पहले अपने जिले की ट्रैफिक पुलिस या जिला न्यायालय की जानकारी जरूर चेक करें.
कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?
लोक अदालत में चालान सेटल करवाने के लिए वाहन की आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और चालान की कॉपी साथ ले जानी चाहिए. अगर ई-चालान है तो उसका मैसेज या प्रिंट कॉपी भी काम आ सकती है.
लोगों को क्यों मिलता है फायदा?
लोक अदालत में मामलों का समाधान जल्दी हो जाता है. लोगों को बार-बार कोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ती और कम समय में मामला खत्म हो जाता है. इससे कोर्ट पर बोझ भी कम होता है और लोगों को कानूनी परेशानी से राहत मिलती है.
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Source: IOCL


























