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इंडिया में राइट तो दूसरे देशों में लेफ्ट साइड पर क्यों होती है ड्राइवर सीट? जानिए इसके पीछे वजह

India Driving Seat: कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ कार डिजाइन का फर्क है या इसके पीछे कोई खास वजह है? आइए जान लेते हैं.

अगर आपने कभी विदेशी फिल्मों, वीडियो या सोशल मीडिया पर कारें देखी हों तो आपने एक दिलचस्प बात जरूर नोटिस की होगी. भारत में कार का स्टीयरिंग और ड्राइवर सीट दाईं तरफ होती है, जबकि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और कई दूसरे देशों में ड्राइवर सीट बाईं तरफ दी जाती है कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ कार डिजाइन का फर्क है या इसके पीछे कोई खास वजह है? दरअसल, इसके पीछे इतिहास, ट्रैफिक नियम और सुरक्षा से जुड़ी बड़ी वजहें हैं.

भारत में गाड़ी सड़क के बाईं तरफ चलाए जाते हैं. यानी सड़क का लेफ्ट हिस्सा ड्राइविंग के लिए इस्तेमाल होता है. इसी वजह से यहां कारों में ड्राइवर सीट दाईं तरफ दी जाती है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ड्राइवर सड़क के बीच वाले हिस्से के ज्यादा करीब रहे और सामने से आने वाले ट्रैफिक को साफ देख सके. इससे ओवरटेक करना, मोड़ लेना और ट्रैफिक में गाड़ी चलाना ज्यादा सेफ और आसान हो जाता है.

कब से चला आ रहा ये सिस्टम?

भारत में यह सिस्टम अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है. जब भारत पर ब्रिटिश शासन था, तब यहां के ट्रैफिक नियम भी ब्रिटेन की तरह बनाए गए थे. ब्रिटेन में उस समय से ही लोग सड़क के बाईं तरफ चलते और वाहन चलाते थे. इसलिए भारत में भी वही नियम लागू कर दिए गए. आजादी के बाद भारत ने अपने ट्रैफिक सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया और वही व्यवस्था आज तक जारी है. यही कारण है कि भारत में आज भी राइट-हैंड ड्राइव यानी दाईं तरफ स्टीयरिंग वाली गाड़ियां चलती हैं.

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और साउथ अफ्रीका जैसे कई देशों में भी यही सिस्टम अपनाया जाता है. इन देशों में सड़क के बाईं तरफ वाहन चलते हैं और कारों में स्टीयरिंग दाईं तरफ होता है.

अब बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और यूरोप के ज्यादातर देशों में ऐसा क्यों नहीं है? दरअसल, वहां गाड़ियां सड़क के दाईं तरफ चलती हैं. इसलिए उन देशों में ड्राइवर सीट बाईं तरफ दी जाती है. इसका उद्देश्य भी वही होता है. ड्राइवर सड़क के बीच वाले हिस्से के करीब रहे ताकि उसे सामने का ट्रैफिक बेहतर दिखाई दे.

पुराने समय में होता था ऐसा 

इसके पीछे एक ऐतिहासिक कारण भी बताया जाता है. पुराने समय में लोग घोड़े और बग्घियों से यात्रा करते थे. अधिकतर लोग दाएं हाथ से तलवार चलाते थे, इसलिए वे सड़क के ऐसे हिस्से में चलना पसंद करते थे जहां जरूरत पड़ने पर आसानी से अपनी रक्षा कर सकें. समय के साथ अलग-अलग देशों में यही आदतें ट्रैफिक नियमों में बदल गईं. बाद में यूरोप के कई देशों ने दाईं तरफ चलने का नियम अपनाया, जबकि ब्रिटिश साम्राज्य वाले देशों में बाईं तरफ ड्राइविंग जारी रही.

ड्राइवर सीट की सही पोजिशन सड़क सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी मानी जाती है. अगर भारत में स्टीयरिंग बाईं तरफ होता तो ओवरटेक करते समय सामने से आने वाली गाड़ियों को देखना मुश्किल हो सकता था. खासकर दो लेन वाली सड़कों पर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता था. इसी वजह से हर देश अपनी सड़क व्यवस्था के हिसाब से गाड़ी डिजाइन करता है.

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