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Toll Tax Revenue: हर साल टोल से कितना कमाती है भारत सरकार? कहां खर्च होता है ये पैसा

हाल के वर्षों में हाईवे और एक्सप्रेसवे से टोल कलेक्शन में तेजी से इजाफा हुआ. इसी कारण माना जा रहा है कि आने वाले सालों में टोल से होने वाली आय पहली बार एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकती है.

Toll Tax Revenue: भारत में लगातार नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क बढ़ रहा है. इसके साथ ही टोल वसूली से होने वाली सरकार की कमाई भी हर साल नए रिकॉर्ड बना रही है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल के वर्षों में हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर, फास्टैग जैसी डिजिटल व्यवस्था और ट्रैफिक की वजह से टोल कलेक्शन में तेजी से इजाफा हुआ है. यही कारण है कि माना जा रहा है कि आने वाले सालों में टोल से होने वाली आय पहली बार एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत सरकार हर साल टोल से कितना कमाती है और यह पैसा कहां पर खर्च होता है. 

पिछले कुछ सालों में इतना हुआ कलेक्शन 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से कुल 61,408 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हुआ. वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. सरकार का मानना है कि नए हाईवे, एक्सप्रेस वे और तकनीकी आधारित टोल सिस्टम लागू होने के बाद अगले कुछ वर्षों में टोल में और बड़ी बढ़ोतरी मिलेगी. 

हर दिन 168 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार जून 2025 तक देश में कुल 1,087 टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं. इनमें 700 सरकारी और 387 प्राइवेट क्षेत्र के टोल प्लाजा शामिल है. इन टोल प्लाजाओं से रोजाना औसतन 168 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हो रही है. सरकार के अनुसार पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से कुल टोल कलेक्शन लगभग 2.27 लाख करोड़ रुपये रहा है. इससे साफ है कि टोल अब सड़क अवसंरचना के लिए राजस्व का एक बड़ा सोर्स बन चुका है. 

कहां खर्च होता है टोल का पैसा?

अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि टोल प्लाजा पर दिया गया पैसा आखिर कहां जाता है. तो केंद्र सरकार के अनुसार टोल केवल सड़क निर्माण की लागत वसूलने का माध्यम नहीं है. बल्कि यह सड़कों के उपयोग के बदले लिए जाने वाला शुल्क है. टोल से मिलने वाला राजस्व केंद्र सरकार की समेकित निधि में जमा किया जाता है. इसके बाद इस राशि का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत, नए एक्सप्रेसवे, पुल, फ्लाईओवर और दूसरे सड़क अवसंरचना परियोजनाओं में किया जाता है. इसके अलावा पेट्रोल और डीजल पर लगाए जाने वाले सेस से मिलने वाली राशि सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में जाती है, जिसका इस्तेमाल सड़क, रेलवे ओवरब्रिज, ग्रामीण सड़कें, पुल और एयरपोर्ट जैसे परियोजनाओं में विकास में किया जाता है. 

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कौन सा टोल प्लाजा कमाता है सबसे ज्यादा? 

देश के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा की बात करें तो गुजरात के वडोदरा-भरूच सेक्शन पर स्थित पर भरथना टोल प्लाजा पहले स्थान पर है. वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच इस टोल प्लाजा से 2,043 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ. इसके बाद राजस्थान का शाहजहांपुर टोल प्लाजा दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पश्चिम बंगाल का जलाधुलागोरी टोल प्लाजा तीसरी स्थान पर रहा.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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