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कैलाश पर्वत पर आखिर क्यों नहीं चढ़ सका कोई इंसान, चीन की सरकार ने क्यों इसे किया है बैन?

कैलाश पर्वत अपनी कठिन परिस्थितियों, धार्मिक महत्व और चीन के प्रतिबंध के कारण दुनिया के सबसे रहस्यमयी पहाड़ों में गिना जाता है, जहां आज तक कोई चोटी तक नहीं पहुंच सका.

दुनिया भर में कोई न कोई नया रिकॉर्ड बनाता है. इन्हीं में से एक गिना जाता है माउंट एवरेस्ट जैसे पर्वतों पर चढ़ना. माउंट एवरेस्ट जैसे पर्वत का नाम आते ही दिमाग में कैलाश पर्वत का नाम अपने आप आ जाता है.  कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित है, जो आज चीन के अधीन माना जाता है. इसकी ऊंचाई करीब 6,638 मीटर है, जो माउंट एवरेस्ट जैसे सबसे बड़े और विशाल पर्वत से लगभग 2,000 मीटर छोटा है. 

क्या आप जानते हैं कि माउंट एवरेस्ट जैसे सबसे ऊंचे पर्वत पर अब तक लगभग 7 हजार लोगों से भी ज्यादा लोग चढ़ाई कर चुके हैं, लेकिन यह जानकर हैरानी होगी कि इससे छोटे कैलाश पर्वत पर आज तक किसी ने चढ़ाई नहीं की.  यही बात है, जो इस पर्वत को दुनिया के सबसे रहस्यमयी पहाड़ों में से एक बनाती है.  हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर इस पर्वत पर चढ़ना इतना मुश्किल क्यों है? सबसे खास बात यह है कि चीन सरकार ने भी इस पर चढ़ने से बैन लगाया हुआ है. 

कैलाश पर चढ़ाई की कोशिश करने वालों ने क्या बताया?

कैलाश पर्वत को ऐसे ही कोई रहस्यमयी पर्वत नहीं बोलता है. इस पर्वत पर चढ़ाई करने वाले लोगों ने भी इसको नामुमकिन बताया है. उन लोगों का कहना है कि जब वे पर्वत के बिल्कुल पास पहुंचे तो उनकी दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई और भारी कमजोरी महसूस होने लगी. किसी का भी शरीर आगे बढ़ने लायक नहीं बचा था, जिसके बाद वे वापस लौट आए. विल्सन नाम के पर्वतारोही ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि वह जब इस पर्वत की चढ़ाई कर रहे थे, तब अचानक बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे उनका पूरा सफर रुक गया और वे वापस लौट आए. इन सारी बातों को देखकर और विशेषज्ञों की रिपोर्ट से यह बात साबित हो जाती है कि यहां का मौसम और वातावरण माउंट एवरेस्ट की तुलना में काफी ज्यादा खराब और कठिन है. यही वजह है कि आज तक इस पर्वत पर कोई भी पर्वतारोही चोटी तक नहीं पहुंच पाया.

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मौसम और कठिन परिस्थितियां बनती हैं सबसे बड़ी बाधा

इस पर्वत से धार्मिक आस्था जुड़ी हुई हैं. जैसे हिंदू धर्म में माना जाता है कि कैलाश पर्वत महादेव शिव का घर है.  वहीं, जैन धर्म में मानते हैं कि उनके सबसे पहले तीर्थंकर ऋषभनाथ को यहीं पर ज्ञान प्राप्त हुआ था. इस पर्वत से तिब्बत के बोन धर्म की भी आस्था जुड़ी हुई है. साथ ही, बौद्ध धर्म के लोग मानते हैं कि महात्मा बुद्ध इस पहाड़ की चोटी पर निवास करते हैं. 

चार अलग-अलग धर्मों की ये कथाएं इस पर्वत को और भी ज्यादा रहस्यमयी और पवित्र बनाती हैं. इसलिए यहां के स्थानीय लोग और श्रद्धालु यही मानते हैं कि इस पवित्र पर्वत पर अपना पैर नहीं रखना चाहिए. इससे इसकी पवित्रता भंग होती है. यही वजह है कि चीन सरकार ने भी कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने पर पूरी तरह से बैन कर दिया है.  बता दें कि 2001 में इस पर चढ़ाई की कोशिश की गई थी, जिस पर दुनियाभर में लोगों ने बहुत विरोध किया. इसके बाद चीन सरकार ने इस पर पूरी तरह से बैन लगा दिया. 

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